विशेष

क़ानून का सिस्टम तो आपके हमारे जीवन में अब कभी खड़ा नहीं होगा

P.K.Talks पवन विचार
=============
अच्छा तो लगता है, लेकिन…..
(भाग – 1)
==============
यह साल 2018 की बात है। मैं उज्जैन, मध्य प्रदेश में सरकारी प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा लेकर ट्रेन से वापस दिल्ली पहुंचा था। ट्रेन से उतरकर जब मैं स्टेशन से बाहर निकल रहा था तो मैंने देखा कि प्लेटफॉर्म पर मायूसी की स्थिति में मेरे सामने चार सदस्यीय परिवार खड़ा था। जब मैंने उस परिवार के मुखिया से मायूसी का कारण पूछा तो उसने बताया कि ट्रेन में सोते समय किसी ने उसका बटुआ चुरा लिया है, जिसमें कुछ रूपए और ट्रेन की टिकटें थीं। अब उसके पास दोबारा टिकटें खरीदने एवं रास्ते में परिवार को कुछ खिलाने के लिए भी पैसे नहीं बचे।
उस परिवार ने आर्थिक मदद हेतु आशा भरी निगाहों से मेरी तरफ देखा। उस व्यक्ति की परेशानी सुनकर और छोटे बच्चों के चेहरे देखकर उनकी आर्थिक मदद करने में विलम्ब करने का न तो मुझे कोई कारण समझ आ रहा था और न ही मुझमें इतना साहस था। मानवता के नाते मैंने तुरंत उस व्यक्ति को चार टिकटें खरीदने और कुछ खाने-पीने के लिए रूपए दिए और स्टेशन से बाहर निकल आया।
परेशानी एवं संकट में घिरे किसी व्यक्ति की मदद करके स्वाभाविक रूप से एक इंसान को जो ख़ुशी एवं संतोष मिलता है, उस समय मैं भी वही ख़ुशी एवं संतोष महसूस कर रहा था। साथ ही मेरे मन में यह संदेह भी पनपा हुआ था कि कहीं उसने मुझे ठगा तो नहीं ? सच कहूं तो मेरे लिए यही महत्वपूर्ण था कि उस गरीब परिवार ने अपना जो संकट मुझे बताया था, वही भाव उनके चेहरे पर भी पढ़े जा रहे थे।
इस सच्चे वाकये के यहां पर उल्लेख करने का अभिप्राय यह है कि हमारे जीवन में समय-समय पर ऐसे अवसर आते रहते हैं, जब हम सामने वाले की विभिन्न प्रकार से मदद करके एक सुकुन, ख़ुशी, संतुष्टि एवं गर्व महसूस करते हैं। लेकिन एक अबूझ प्रश्न का उत्तर हमें नहीं मिल पाता कि सामने वाले ने जो अपने दुःख-दर्द एवं परेशानियां हमें बताई थीं, कहीं वो झूठ तो नहीं बोल रहा था ? वास्तव में, यह हम पर निर्भर करता है कि संकट काल में सामने वाले की मदद करने के लिए हम अपने अंतर्मन में किन-किन विचारों एवं मापदंडों से गुज़रना पसंद करते हैं और अंततः किन विचारों को स्वीकार करते हैं ?
हमारे जीवन में प्रायः ऐसी स्थितियां और परिस्थितियां आती रहती हैं, जिनके दो पहलू होते हैं और दोनों ही पहलू अपने आप में महत्वपूर्ण होते हैं। जो पहलू हमारे हित में होता है वही दूसरे के लिए हानिकारक अथवा अहितकारी भी हो सकता है। आइए, जीवन के ऐसे ही कुछ पहलुओं एवं परिस्थितियों पर नज़र डालते हैं।
(कृपया इसका भाग-2 भी इसी पेज पर देखियेगा।)

-पवन शर्मा,
13-10-2020


विपश्यी धनराज
==========
“मन को समझना”
मुझे लगता है कि यह समझे बिना कि हमारा अपना मन किस प्रकार कार्य करता है, हम जीवन की जटिल समस्याओं को न तो समझ सकते हैं और न ही उनका निराकरण कर सकते हैं। यह समझ किताबी ज्ञान से नहीं आती। मन स्वयं में एक जटिल समस्या है। जिन विकट परिस्थितियों का, चुनौतियों का सामना हम सभी को अपने जीवन में करना होता है, मन को समझने की प्रक्रिया में ही उनका भी राज़ खुल-सा जाता है और उनके पार जाना संभव हो पाता है।
मुझे लगता है कि अपने मन की गतिविधि को समझना अत्यंत महत्त्वपूर्ण है…
*जे.कृष्णमूर्ति*


Ravish Kumar
========= ·
कभी सोचिए कि इसका समाधान कैसे हो? लड़कों और मर्दों को हमलावर होने से कैसे रोका जाए? फाँसी की सज़ा जैसी मूर्खतापूर्ण बातों से भी कुछ नहीं हो रहा है। क़ानून का सिस्टम तो आपके हमारे जीवन में अब कभी खड़ा नहीं होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *