साहित्य

तेरे ख़त से, ये जो तेरी महक आती है…..प्रीत….

Preet Pratima

from – Chandigarh, Panjab

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तेरे खत से 
ये जो तेरी महक आती है
चूम लेती हूं पढ़कर 
बरबस उसको
ख़यालों में खो जाती हूँ
जब जब भी 
करती हूं तस्सवुर तेरा
जाने क्यों?
अंदर तक 
सिंहर सी जाती हूं 
ये ख़त से ~~
तेरी झांकती आंखें
हर लफज़ को
ज़िंदा कर जाती है़ं
ढांप लेती हूं मैं चेहरा अपना
उफ्फ्फ
जाने किस से हया आती है 
ये जो खत है तेरा ~~~
कुछ कुछ रुमानी सा ,
महक जाती हैं सांसें भी मेरी
तेरीे मुहबबत की महक से 
तेरे खत से मुझे
तेरी रूहे सदा आती है
ये जो ख़त से
तेरी महक आती है
तुम क्या जानों
मुझे दीवाना किए जाती है 
तेरे खत से, ये जो
तेरी महक आती है ।

– प्रीत प्रतिमां

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