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देश का सुधार चाहते हैं तो फिर राजनेताओं और धर्म गुरुओं से बच कर रहे : नॉटी चौधरी की सलाह!

Naughty Chowdhary – Sandeep
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आज के अति आधुनिक वैज्ञानिक युग में एक तरफ जहां विकसित देश हर क्षेत्र में रोज नए कीर्तिमान साबित कर रहे हैं तो वहीं राजनीतिक दल के नेता या फिर धर्म गुरु की बातों पर विश्वास करने वालों की तादाद अगर कहीं सबसे ज्यादा है तो वो भारत में देखने को मिलेगी। आस्था की बात है वहां तक तो ठीक है की हमे हर धर्म, समुदाय, मान्यताओं, रीति रिवाजों का सम्मान करना चाहिए मगर हमारी आस्था को आधार बना कर लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने वाले राजनेताओं और धर्म गुरुओं से आख़िरकार सवाल क्यों नहीं किया जाता ? की देश को आजाद हुए आज 73 साल होने को आये हैं लेकिन आज भी वही पुरानी गली सड़ी व्यवस्था के तहत छोटे गांव शहर से लोग बेहतर शिक्षा, जीवन शैली के लिए आज भी बड़े शहरों में या फिर विदेशों पर आश्रित हैं। अभी कुछ ही समय में बिहार के चुनाव होने वाले हैं, फिर पंजाब, उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों में चुनावों की सरगर्मियां तेज होने वाली हैं।हर राजनीतिक दल विकास के वही घिसे पीटे दावे, चुनावी वायदे करता नहीं थकेगा और चुनाव हो जाने के बाद जनता की फिर कोई बात नहीं पूछेगा। घर घर वोट मांगने के लिए पहुंच रहे नेताओं से क्या कोई सवाल करेगा की कब तक हमारे गांव की शामलाट जमीनों पर कब्ज़ा कर बेचने दिया जायेगा, क्यों गांव, छोटे शहरों के युवाओं को खेल के मैदानों से वंचित रखा जायेगा, उन्हें साहित्य कला संस्कृति तो दूर की बात वो खुद क्या बनना चाहते हैं, अपनी जिंदगी को आखिर को सी दिशा देना चाहते हैं यह भला उन्हें कौन और कैसे समझायेगा ? कब तक बड़े शहरों में पलायन होते रहेंगे, मजबूरन अपना घर बार छोड़ कर बेहतर जिंदगी की तलाश में विदेशों में लोग बसते रहेंगे ? आज के भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से पलायन सबसे बढ़ी समस्या है मगर राजनेताओं को पता है की उनका वोट बैंक सुरक्षित है और वो कतई नहीं चाहेंगे की लोग पढ़े लिखे और उनसे अपना हक़ मांगे। राजनेता और धर्म गुरु यह दोनों ऐसे बड़े रोग हैं जिनके पीछे लगे लोग, भेड़चाल की तरह जिंदगी जीने को मजबूर है। इन्हे अच्छी तरह से मालूम है की इनसे कोई नहीं पूछेगा की इनके पीछे लग कर धर्म को बचाने की खातिर लड़ मर जाना ही सच्चा धर्म नहीं है बल्कि रोजी रोटी कमाना, पढ़ लिख कर सिर उठा कर जिंदगी जीना और अपना व् अपने देश का नाम रोशन करना, इंसानियत की सेवा करना सबसे बड़ा धर्म है। अंत में यही कहना चाहूंगा की आँखे मूँद कर धर्म गुरुओं, राजनेताओं के पीछे मत चलिए और अपना तर्क लगा कर बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन शैली के लिए किये गए कार्यों का हिसाब पूछिए।

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