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नमकीन मिठाई, पापड़, भुजिया, रसगुल्ला, कचौरी आदि के व्यापार में ऐसी शर्ते कि ‘पकोड़ा’ बेचना भी संभव नहीं!

इंदौर और बीकानेर नमकीन उद्योग के देश मे बड़े केन्द्र है हजारों लाखों लोगों को रोजगार इन व्यापार उद्योग से मिल रहा है लेकिन अब मोदीं सरकार एक नया कानून लेकर आई है जिससे इस व्यापार में लगे लोगो को बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा नए फूड सेफ्टी एंड स्टेंडर्ड के लागू होने से नमकीन मिठाई, पापड़, भुजिया, रसगुल्ला, कचौरी आदि के व्यापार में ऐसी शर्ते रख दी गयी है जिसे पूरा करना प्रदेश के किसी भी छोटे व्यापारियों के लिए किसी भी सूरत में संभव नहीं होगा।

भास्कर लिख रहा है यह नया कानून छोटे व्यापारियों को बड़ी फ्रेंचाइजी का गुलाम बना देगा। सबसे छोटी दुकानें कचौरी बनाने की होती है। एक कचौरी बनाने वाले को सबसे पहले 7500 रुपए फीस देकर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। उसे बीएस एसी केमेस्ट्री पास युवक को तकनीकी इंचार्ज की नियुक्ति देनी होगी, जो उसके बने हर माल की जांच करेगा। 4-5 हजार रुपए देकर पानी की जांच करवाकर उसकी रिपोर्ट सब्मिट करनी होगी।

अभी तक सालाना 2 हजार किलो माल से कम उत्पादन करने वाले व्यापारी को फूड लाइसेंस हर जिले का चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी दे सकता था। 2 हजार किलो सालाना उत्पादन होने पर लाइसेंस की प्रक्रिया एफएसएसआई, नई दिल्ली से ही होती थी। ऐसे में इस आदेश से बड़े व्यापारियों को कोई परेशानी नहीं आएगी। 2 हजार किलो से कम जिस व्यापारी का भी सालाना माल का टर्न ओवर कम है, उन सभी अब नए लाइसेंस लेना होगा।…………
– Girish Malviya

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