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#बाबर तेरी मस्जिद में हम नहीं तो हमारी नसल आज़ान देंगी

Shamsher Ali Khan
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#बाबर_तेरी_मस्जिद_में_हम_नहीं_तो_हमारी_नसल_आजान_देंगी

#पानीपत_कि_तीसरी_लडाई_की_हकीकत किसे पता है अहमद शाह अबदाली मराठाओ से लडने कयू आया था

किसी को पता है हिंदुस्तान मे मुसलमानो के खिलाफ अगर कोई ताकत खडी होती है तो वो कहा से सबसे पहले खडी होती है ||

हमारे दलाल अकाबिरो ने जो मुसलमानो के हक खाकर खुद रेंज रोवर मे घूम रहे है गंगा जमुना तहजीब को ( मतलब मेरे हिसाब से दीन को एक तरफ रखकर गैरो को खुश करने वाली तहजीब ) एक मस्जिद जिसमे मुसलमानो ने सज़दे किए हो उसे मूर्ति पूजने के लिए

काफिरो को दे दिया हो जिसके लिए हजारों मुसलमानो ने अपनी जाने गवाई हो मुस्लिम चाहे कितना ही गुनहगार कयू ना हो जाए मस्जिद और नबी की हुरमत के लिए मर मिटने को तैयार हो जाता है सिर्फ दलाल और मुनाफिको के |

पानीपत की तीसरी लडाई मराठो से जाति दुशमनी पर नहीं हुई थी दरअसल जब हज़रत औरंगजेब की वफात हो गई थी तो उनके बेटो मे गद्दी के लिए फूट पड गई इसी बीच मराठा जो अब तक दबे हुए थे वो एक नई ताकत बनकर उभरे और पूरे हिंदुस्तान को फतेह कर लिया था उस समय का जो मुगल बादशाह था वो मराठो को तआवुन देकर अपनी एक महदूद हुकुमत दिल्ली को बचा रखा था लेकिन ताकत पूरी मराठो के कबजे मे थी |

तब मराठो ने अपनी ताकत के नशे मे चूर होकर दिल्ली की जामा मस्जिद के मिंबर पर शिव की मूर्ति रख दी तब हज़रत शाह वलीयुललाह देहलवी ने अहमद शाह अबदाली को एक खत लिखा जिसमे मराठो के गलत कामो को लिखा साथ मे लिखा कि मराठो से जामा मस्जिद को पाक कर, यहा आकर तब अहमद शाह अबदाली मस्जिद के लिए आया था और एक लाख मराठाओ को कत्ल कर गया 200 – 250 साल हो गए फिर से एक ताकत मुसलमानो के खिलाफ 1925 मे एक ताकत उभरी जिसे rss कहते है राजनीति मे कदम जमाने के लिए बीजेपी खडी की जिसे rss कंट्रोल करती है ये सब ताकत मुसलमानो के खिलाफ महाराष्ट्र से ही खडी होती है ||

याद रखना अगर बीजेपी अपनी रणनीति मे फेल हो गई जोकि दिख रही है तो अगर समय बचा इलेक्शन का हालाकि मुझे लगता है 2024 का इलेक्शन नही होगा ये मुझे लगता है खैर आने वाले समय मे बीजेपी के बाद शिवसेना एक बहुत ही बडी यानि की बीजेपी से भी बडी ताकत बनकर खडी होगी और ये भी महाराष्ट्र से ही खडी होगी |

खैर एक मस्जिद की हुरमत के लिए अबदाली ने मराठाओ से जंग लड पडे और उसे बुलाने वाले शाह वलीयुललाह देहलवी जैसा आलिम जिसे हर फिरके के लोग अपना कहते है उसने खुद लडने के लिए बुलाया हो और एक आज के उलेमा है कहते है नही जी अमन खराब होगा अमन आता ही जंग के बाद है |

हमारी नौजवान अपने इतिहास को पढकर देखते ही नही नही है जो बॉलीवुड ने बता दिया वही हकीकत | ये 5 जनरेशन वार है जिसमें मीडिया, फिल्म, ड्रामा मुख्य हथियार है आज हर देश अपनी गाथा गाने के लिए ड्रामा का सहारा है रहे है | और ये जंग 2010 से ही शुरु हो चुकी हैं |
बाकी सब आपको पता है मैने ये बात इसलिए लिखी है जैसे सरकारी मौलवियो ने बाबरी के लिए दशको मुसलमानो को मूर्ख बनाया अपने पेट भरे अब मथुरा वे काशी की मस्जिद व ईदगाह के लिए भी सुप्रीम कोठा मे केस चला गया है फैसला सबूतो पर नहीं आस्था पर होगा इसलिए पहले ही उन जगहो को मंदिर के लिए दे दो कम से कम मुसलमान यू तो नही मरेंगे कयुकि तुम तो #गंगा_जमुना_तहजीब वाले हो अमन वाले हो फिर कयू केस.लडकर अमन खराब करते हो, दललो लेकिन तुम्हे तो अपना पेट जो भरना है सरकार के दिए गए टुकडो से |

अब मुसलमानो पर डिपेंड करता है कि किस तरह से आगे बढना है लेकिन हम मुसलमानो की हालत ऐसी कर दी कि इन भडवो के खिलाफ बोलने से ही इस्लाम के खिलाफ बोलना समझ लिया है |

मुसलमानो ये हदीस तो बहुत सुनी होगी उलेमा अंबियाओ के वारिस है कभी ये सुनी है इन्ही उलेमाओ से जहन्नुम की आग भडकाई जाएगी ये main fuel है जहन्नुम का | कभी ये सुनी है कयामत के नजदीक आसमान तले सबसे बदबख़्त मखलूक उलेमा होंगे |

नोट : उलेमा दो तरह के होते है एक उलेमा हक दूसरे उलेमा सू अब पहचान करना तुमहारी जिम्मेदारी है |
और हा कोई ये ना कहे लफ्जों को दुरुस्त कर लो |

डिस्क्लेमर : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. लेख सोशल मीडिया फेसबुक पर वायरल है, इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति तीसरी जंग हिंदी उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार तीसरी जंग हिंदी के नहीं हैं, तथा तीसरी जंग हिंदी उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है

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