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भारत और चीन के दरमियान ”डोकलाम मॉडल” के तहत समझौता लगभग फ़ाइनल : क्या है ”डोकलाम मॉडल” जानिए!

मार्च 2020 से लेकर अभी तक भारत और चीन के बीच सरहद पर मुस्तकिल तनाव बना हुआ है, दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने खड़ी हैं, दोनों देश युद्ध जैसी तैयारियों में लगे हुए हैं, चीन ने इस दौरान भारत के 20 सैनिकों की हत्या भी कर दी थी, साथ चीन ने लद्दाख सीमा से लगे बड़े भू-भाग जबरन कब्ज़ा कर लिया था, भारत की सरकार विशेष कर प्रधानमंत्री ने शुरू शुरू में तो कहा था कि ‘न कोई हमारी सीमा में घुसा है, न हमारी ज़मीन पर कब्ज़ा हुआ है’ लेकिन अंतरष्ट्रीय मीडिया की रिपोर्ट्स के बाद भारत को मजबूरन मानना पड़ा कि चीन ने भारत की ज़मीन पर कब्ज़ा कर लिया है, रक्षा मंत्री ने संसद में बयान दिया और बताया कि चीन ने 38 हज़ार वर्ग किलोमीटर के इलाके पर कब्ज़ा कर लिया है

भारत सरकार और सरकार समर्थित भारतीय मीडिया चीन के अतिक्रण को लेकर जनता के सामने ग़लत रिपोर्ट/जानकारियां अभी भी देते हैं जबकि अभी तक चीन कब्ज़ा की हुई भारत की ज़मीन से वापस नहीं गया है

टीवी-9, इंडिया टीवी, ज़ी न्यूज़ आदि अन्य कई चैनलों पर दिखाई जाने वाली ख़बरों में तो हर रोज़ बताया कि ‘भारतीय सेना के हाथों मुंह की खाने के बाद चीन के होंसले पस्त’, भारत की सेना के आगे चीन ने घुटने टेके’, ये ऐसी खबरें हैं जिन में एक फीसद भी सच्चाई नहीं होती, इनको केवल एजेंडे के तहत दिखाया ताकि जनता ये न सोचे समझे कि लद्दाख में भारत कुछ कर नहीं रहा है

तनाव के बीच खबर है कि भारत और चीन के दरमियान समझौता लगभग फ़ाइनल हो चुका है, ये समझौता डोकलाम मॉडल के तहत हुआ है, बता दें कि चीन ने चीन ने अरुणाचल प्रदेश के डोकलाम में घुसपैठ कर कई महत्वपूर्ण इलाकों पर कब्ज़ा कर लिया था, तनाव और ज़ियादा न बढे इसके लिए समझौता कि चीन गया है अब उससे आगे नहीं जाएगा, और इसके सम्बन्ध में मीडिया अथवा सरकारों के लेवल पर कोई बयानबाज़ी नहीं की जायेगी, सूत्रों के मुताबिक चीन के दोनों हाथों में लड्डू थे, उसे जो चाहिए था वो उसमे कामयाब रहा, सूत्रों के मुताबिक लद्दाख के मामले में भी अब यही ‘डोकलाम मॉडल’ पर काम होता नज़र आएगा

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक भारत-चीन के बीच जो समझौता हुआ है या होने की सम्भावना है, वो इस प्रकार है

– भारत और चीन का समझौता हो गया है, कब्जा किये इलाको से चीन नही हटेगा, फिगर 1 से 8 तक चीन का कब्जा रहेगा लेकिन कहा ये जायेगा कि दोनो देश पीछे हट गये है

– समझौते के मुताबिक चीन, अमेरिका तनाव/युद्ध की सूरत मे भारत, अमेरीका को मदद नही करेगा

– समझौते के तहत भारत साउथ चाईना सी, PoK , बलोचिस्तान, गिलगित मे चीन के हितो से खुद को अलग रखेगा

– समझौते के तहत चीन अपनी ओर से कोई बयान नही देगा, भारत सरकार और मीडिया भारत की जीत बताकर जनता को खुश कर करेंगी

– भारत लद्दाख आदि सीमा के निकट कोई नया निर्माण नहीं करेगा

– भारत, अफ़ग़ानिस्तान के अंदर चल रही शांति प्रक्रिया को प्रभावित करने जैसा कोई कार्य नहीं करेगा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन दबाव कर अपना मक़सद पूरा कर लेना चाहता है, इस तरह से उसे युद्ध भी नहीं करना पड़ेगा साथ ही लद्दाख के इलाके पर उसका मुकम्मल कब्ज़ा भी बना रहेगा

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