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ये हैं गुफ़्तगू वाले इरफ़ान, इन्हें राज्यसभा टीवी चैनल से बिना कारण बताये हटा दिया गया है!

Devendra Mishra
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इनको पहचानते हैं न? गुफ़्तगू वाले इरफ़ान सर । इन्हें राज्यसभा टीवी चैनल से बिना कारण बताये हटा दिया गया है । आपको गुफ़्तगू की अहमियत तब पता चलेगी जब आप जीवन की सार्थकता खोजने की यात्रा पर निकलेंगे न कि रात को ग्यारह बजे एलियन को नीला चश्मा पहनकर देखने की ख़बर को ध्यान से देखेंगे । कला, साहित्य और संगीत से जुड़ी कितनी ही हस्तियों का साक्षात्कार लेने वाले और हमारे अंतर्मन में उठने वाले अमूर्त प्रश्नों को अपने प्रश्नों में शामिल करने वाले इरफ़ान सर को हटाने के क़दम को मैं एकदम वाहियात घोषित करता हूँ । मुझे जब यह ख़बर पढ़ने को मिली मेरी आँख से आँसू गिर पड़ा । यह आँसू क्या था, इसका मोल क्या था ? यह क्यों गिरा ? क्या यह इरफ़ान सर के काम के लिये सम्मान था ? यक़ीनन हाँ, यह उनके लिये मुहब्बत और एहतराम था, है और रहेगा । मुझे गुस्सा आ रहा है और मुझे सूझ नहीं रहा कि इसको किस तरह अभिव्यक्त करूँ और किन लोगों के सामने अपना विरोध दर्ज कराऊँ ? मुझे ही नहीं उन्हें भी अपना गुस्सा दर्ज कराना ही होगा जिन्होंने गुफ़्तगू को और इरफ़ान सर को अपनी मुहब्बत दी है ।

गुफ़्तगू का मतलब है बातचीत और बातचीत से सिरे खुलते हैं । सिरे उन पहलुओं के जिन्हें हम अपने दिल में जगह देते हैं और दुनिया को ख़ूबसूरत बनाने में अपनी हर-मुमकिन कोशिश करते हैं और ऐसे ही लोगों से गुफ़्तगू करते रहे हैं मेरे इरफ़ान सर और वो कहते हैं,”हर आदमी के पास एक कहानी होती है ।” उन्हीं कहानियों को हमें मयस्सर करवाया है इरफ़ान सर ने ।

मैं उनके साथ था, हूँ और रहूँगा इसलिये नहीं कि उन्होंने सबसे अच्छे साक्षात्कार लिए बल्कि इसलिए उन्होंने मेरे बहुत सारे सवालों को ज़ुबाँ दी जिन्हें मैं शायद ही कभी पूछ सकता था तो क्या इरफ़ान सर आपके सवालों की ज़ुबाँ नहीं थे ?

मैं यह सब लिखते वक़्त जज़्बाती हूँ । मुझे बिल्कुल कहना चाहिये कि हम सब अपनी-अपनी यात्रा तय करते हैं और हम ही तय करते हैं कि हमें क्या देखना चाहिये और क्या नहीं । अभी गुफ़्तगू का कोई भी एक एपिसोड देखिये और फिर किसी न्यूज चैनल को एक घण्टा देखिये जिसमें यह ख़बर आ रही हो कि इस कुएँ में ख़ज़ाने की उम्मीद है तब आप कहेंगे कि ख़ज़ाना नहीं मियाँ, भाँग मिलेगी ।

फिर समझेंगे गुफ़्तगू की अहमियत और ख़ुद से भी गुफ़्तगू कर सकेंगे क्योंकि यही तो मेरे इरफ़ान सर चाहते थे ।

उन्हें ढेर सारी मुहब्बत। #no_irfan_no_guftagoo
(Govind Gautam जी की यह प्रतिक्रिया मेरी भी प्रतिक्रिया समझी जाय.)

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