उत्तर प्रदेश राज्य

‘श्रीकृष्ण विराजमान’ पर मालिकाना हक़ के लिए ज़िला जज की अदालत ने याचिका स्वीकार की : बाबरी मस्जिद की तरह ये भी लेलो!

अयोध्या की बाबरी मस्जिद को कब्ज़ाने के लिए कैसी केसी साज़िशें रची गयी ये हर कोई जानता है

मामला देश की सर्वोच्या अदालत तक पहुंचा पर जो फैसला सुनाया गया, वो गले उतरने वाला नहीं है

मथुरा। ‘श्रीकृष्ण विराजमान’ पर मालिकाना हक के लिए जिला जज की अदालत ने शुक्रवार को याचिका को स्वीकार कर ली है। साथ ही इसकी अगली सुनवाई के लिए तारीख भी दे दी है। साथ कोर्ट ने दूसरे पक्ष को नोटिस जारी कर उनका पक्ष रखने को कहा है। बता दें, श्रीकृष्ण विराजमान द्वारा श्रीकृष्ण जन्मभूमि की 13.37 एकड़ भूमि के स्वामित्व की मांग की जा रही है।

13.37 एकड़ जमीन के मालिकाना हक के लिए विगत सोमवार (13 अक्तूबर) को जिला जज मथुरा की अदालत में अपील की गई थी। जिला जज ने दावे को दाखिल करने संबंधी मामले में निर्णय को सुरक्षित कर लिया था। शुक्रवार (16 अक्तूबर) को याचिका को स्वीकार करते हुए जिला जज ने कहा कि अब इस मामले में अब अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी। विगत सोमवार को भगवान ‘श्रीकृष्ण विराजमान’ की वादी रंजना अग्निहोत्री आदि के अधिवक्ताओं ने न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखा था। क्या है विवाद?

क्या है विवाद?

हिंदू पक्ष कृष्ण जन्मभूमि से शाही ईदगाह मस्जिद को अवैध बता रहा है और उसे हटाने की मांग कर रहा है। साथ ही 13.37 एकड़ भूमि पर अपना स्वामित्व भी वापस मांग रहा है। दावा है कि इस समय जहां मस्जिद है कभी वहां कंस का कारागार था और वहीं पर कृष्ण का मंदिर था। मुगलों ने इसे तुड़वा कर वहां शाही ईदगाह मस्जिद बनवा दी। मामले को लेकर मथुरा की सिविल जज कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी, लेकिन वहां से याचिका खारिज कर दी गई थी। जिसके बाद हिंदू पक्ष ने जिला जज की कोर्ट में अपील दाखिल की।

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