विशेष

#सार्वजनिक_जीवन_में_मर्यादा_से_रहें

Sanjiv Suman
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जिस प्रकार किसी को मनचाही स्पीड में गाड़ी चलाने का अधिकार नहीं है, क्योंकि रोड सार्वजनिक है। ठीक उसी प्रकार किसी भी लड़की को मनचाही अर्धनग्नता युक्त वस्त्र पहनने का अधिकार नहीं है क्योंकि जीवन सार्वजनिक है। एकांत रोड में स्पीड चलाओ, एकांत जगह में बेशक अर्द्धनग्न रहो। मगर सार्वजनिक जीवन में नियम मानने पड़ते हैं.

भोजन जब स्वयं के पेट मे जा रहा हो तो केवल स्वयं की रुचि अनुसार बनेगा, लेकिन जब वह भोजन परिवार खायेगा तो सबकी रुचि व मान्यता देखनी पड़ेगी.

लड़कियों का अर्धनग्न वस्त्र पहनने का मुद्दा उठाना उतना ही जरूरी है, जितना लड़को का शराब पीकर गाड़ी चलाने का मुद्दा उठाना जरूरी है. दोनों में एक्सीडेंट होगा ही.

अपनी इच्छा केवल घर की चहारदीवारी में उचित है। घर से बाहर सार्वजनिक जीवन मे कदम रखते ही सामाजिक मर्यादा लड़का हो या लड़की उसे रखनी ही होगी.

घूंघट और बुर्का जितना गलत है, उतना ही गलत अर्धनग्नता युक्त वस्त्र गलत है। बड़ी उम्र की लड़कियों का बच्चों की सी फ़टी निक्कर पहनकर छोटी टॉप पहनकर फैशन के नाम पर घूमना भारतीय संस्कृति का अंग नहीं है.

जीवन भी गिटार या वीणा जैसा वाद्य यंत्र हो, ज्यादा कसना भी गलत है और ज्यादा ढील छोड़ना भी गलत है.

सँस्कार की जरूरत स्त्री व पुरुष दोनों को है, गाड़ी के दोनों पहिये में सँस्कार की हवा चाहिए, एक भी पंचर हुआ तो जीवन डिस्टर्ब होगा.

अर्धनग्न पीढ़ी जिम्मेदार है, उन मासूम बच्चियों के साथ हो रहे बलात्कारों के लिए. वर्ना…माँ जगदम्बा की परिक्रमा करते हुए डांडिया रास नाचते हुए अर्धनग्न होना जरूरी नहीं है.

नग्नता यदि मॉडर्न होने की निशानी है तो ?????

सबसे मॉडर्न जानवर है जिनके संस्कृति में कपड़े ही नही है

अतः जानवर से रेस न करें, सभ्यता व संस्कृति को स्वीकारें एवं सार्वजनिक जीवन मे मर्यादा न लांघें, सभ्यता से रहें. महादेव

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