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#StanSwamy : फ़ादर स्टेन स्वामी 84 साल का ”राष्ट्र-द्रोही” आदमी : हर आवाज़ को दबाने की ज़िद्द : रिपोर्ट

Ranchi:
फादर स्टेन स्वामी अभी चर्चा में हैं. उन्हें एनआइए ने गिरफ्तार किया है. उन पर भीमा-कोरेगांव हिंसा की साजिश में शामिल होने का शक है. 83 साल की दुबली-पतली काया वाले इस शख्स पर नक्सलियों से संबंध रखने के भी आरोप हैं. हालांकि झारखंड सरकार के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इनका बचाव किया है.

Sunil Deodhar
@Sunil_Deodhar
It’s good that #NIA arrested Stan Swamy, a Jharkhand based Jesuit priest & member of banned outfit CPI(Maoist), in #BhimaKoregaon case.
This may further reveal links between the Christian missionaries & #UrbanNaxals

जानिये कौन हैं स्टेन स्वामी
स्टेन स्वामी को सामाजिक और मानवाधिकार कार्यकर्ता के रूप में भी जाना जाता है. झारखंड में चल रहे जल, जंगल जमीन, विस्थापन जैसे आंदोलन को उन्होंने बौद्धिक समर्थन दिया. फादर स्टेन स्वामी साठ के दशक में तमिलनाडु के त्रिचि से झारखंड पादरी बनने आये थे. थियोलॉजी (धार्मिक शिक्षा) पूरी करने के बाद वह पुरोहित बने, पर ईश्वर की सेवा करने के बजाय उन्होंने आदिवासियों और वंचितों के साथ रहना चुना.

बिंदराय इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च स्टडी एंड एक्शन के फाउंडर मेंबर जेवियर डायस कहते हैं, “फादर स्टेन स्वामी ने आदिवासियों और शोषितों के लिए काम करना चुना. उनका (फादर) कहना था कि ईश्वर के लिए काम करने वाले बहुत हैं, मैं लोगों के लिए काम करूंगा.”

तमिलनाडु के किसान परिवार से हैं स्टेन स्वामी
फादर स्टेन स्वामी तमिलनाडु के त्रिचि से हैं. पिता किसान थे. स्टेन की प्रारंभिक स्कूली और कॉलेज की पढ़ाई त्रिचि में हुई. फादर (पुरोहित) बनने की इच्छा के साथ वह जमशेदपुर पहुंचे. वह संभवत: 1960 का दशक था. पढ़ाई करते हुए ही उनके मन में झारखंड के आदिवासी समुदाय के साथ जुड़कर काम करने की इच्छा हुई.

जेवियर डायस बताते हैं, “फादर ने फिलीपींस (मनीला) की यूनिवर्सिटी से भी ग्रेजुएशन किया. इसके बाद उन्होंने यूरोप के शहर ब्रासेल्स में भी उच्च शिक्षा प्राप्त की. मनीला में रहते हुए उन्होंने वहां के तानाशाह मार्कोस के खिलाफ चल रहे आंदोलन को करीब से देखा. बताया जाता है कि इस आंदोलन ने भी उनके मन में गहरा प्रभाव डाला.”

Avinash Srivastava
@go4avinash
Oct 10
CPI (Maoist) involved, Pak ISI Link emerged, Connection with banned Kangleipak Communist Party (KCP) of Manipur.

– Anand Teltumbde
– Gautam Navlakha
– Hany Babu
– Sagar Gorkhe
– Ramesh Gaichor
– Jyoti Jagtap
– Stan Swamy
– Milind Teltumbde

बगईचा की नींव डाली, जनांदोलनों के साथ जुड़े
झारखंड (रांची) में आकर फादर स्टेन स्वामी ने नामकुम में बगईचा नामक संस्थान की नींव डाली. यह संस्थान चर्च के सहयोग से बना. इसमें वे झारखंड से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सेमिनार, प्रशिक्षण के कार्यक्रम करते रहे हैं. झारखंड में चलनेवाले जनांदोलनों का उन्होंने खुलकर साथ दिया. उन्हें बौद्धिक दिशा दिखायी.

जनजातीय परामर्शदात्री परिषद (TAC) के पूर्व सदस्य रतन तिर्की ने कहा कि फादर के साथ लंबे अरसे तक काम करने का अनुभव रहा है. फादर इंडियन सोशल इंस्टीट्यूट बेंगलुरु के निदेशक के पद पर भी काम कर चुके हैं. यहां उनके साथ झारखंडी ऑर्गेनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स (जोहार) में काम करने का अवसर मिला है.

रतन तिर्की कहते हैं, “फादर ने झारखंड में आदिवासियों के संवैधानिक अधिकार, समता जजमेंट, विस्थापन, मानवाधिकार, जल, जंगल जमीन जैसे विषयों पर गंभीरता से काम किया. उन्होंने जेल में बंद विचाराधीन कैदियों के विषय पर भी काम किया. उन्होंने उन विषयों को उठाया, इसलिए वे सरकार और पूंजीपतियों की आंखों की किरकिरी बन गये.”

झारखंड में वे कितने लोकप्रिय थे, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उनकी गिरफ्तारी के बाद से ही रांची में लगातार उनकी रिहाई के लिए आंदोलन चल रहे हैं. लोग सोशल मीडिया पर भी उनके समर्थन में आगे आ रहे हैं.

Yogendra Yadav
@_YogendraYadav
Shocking and condemnable act on 83 year old priest who has spent all his life serving the poor.

Prashant Bhushan
@pbhushan1
Just got news that the NIA has forcibly taken Octogenarian Father Stan Swamy from his ashram at Ranchi. It would be difficult to imagine a gentler & kinder person. It is the sign of the venality of the NIA that they are trying to implicate him under UAPA!

Ramachandra Guha
@Ram_Guha
Like Sudha Bharadwaj, Stan Swamy has spent a lifetime fighting for the rights of adivasis. That is why the Modi regime seeks to suppress and silence them; because for this regime, the profits of mining companies take precedence over the lives and livelihoods of adivasis.

Hemant Soren (घर में रहें – सुरक्षित रहें)
@HemantSorenJMM
गरिब, वंचितों और आदिवासियों की आवाज़ उठाने वाले 83 वर्षीय वृद्ध ‘स्टेन स्वामी’ को गिरफ्तार कर केंद्र की भाजपा सरकार क्या संदेश देना चाहती है?

अपने विरोध की हर आवाज को दबाने की ये कैसी जिद्द?

 

Bhima-Koregaon case: NIA arrests CPI (Maoist) member Stan Swamy from Ranchi

NEWS AGENCIES
Updated on : 9 October 2020

Stan Swamy, a member of CPI (Maoist), was arrested by NIA yesterday from Ranchi, Jharkhand in connection with the Bhima-Koregaon case, according to the National Investigation Agency (NIA) sources on Friday.

They said that Swamy received funds through an associate for furtherance of CPI (Maoist) activities and propaganda materials of the CPI (Maoist) as well as literature were seized from his possession

“Stan Swamy received funds through an associate for the furtherance of CPI (Maoist) activities. Documents related to communications for furthering the activities of CPI (Maoist) and propaganda material of the CPI (Maoist) as well as literature, seized from his possession,” NIA sources said.

On January 1 in 2018, violence erupted at an event to mark 100 years of the Bhima-Koregaon battle, leaving one dead and several injured, including 10 policemen. The police had filed 58 cases against 162 people during a state-wide shutdown in January following clashes in Bhima-Koregaon.

(ANI)

The Pioneer
@TheDailyPioneer

#NIA: #StanSwamy received funds through an associate for furtherance of #CPI (Maoist) activities. Documents related to communications for furthering the activities of CPI (Maoist) & propaganda material of the CPI (Maoist) as well as literature, seized from his possession.

स्टेन स्वामी, मोदी की हत्या की साजिश

लोगों को भड़काकर कानून हाथ में लेने के लिए उकसाने और संविधान की गलत व्याख्या कर उन्हें व्यवस्था के खिलाफ विद्रोही बनाने से जुड़े पत्थलगड़ी मामले में भड़काऊ पोस्ट करने के आरोपित फादर स्टेन स्वामी के घर सोमवार को कुर्की की कार्रवाई की गई। रांची के नामकुम बगइचा निवासी स्टेन के घर से खूंटी पुलिस ने नामकुम थाने के सहयोग से टेबल, कुर्सी, अलमारी, बिस्तर सहित कई सामान जब्त किए हैं।

इससे पहले स्टेन स्वामी का नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश रचने और भीमा कोरे गांव हिंसा से भी जुड़ा था। इन दोनों मामलों में महाराष्ट्र पुलिस ने फादर स्टेन के घर दो बार छापेमारी की थी। 12 जून 2019 को महाराष्ट्र पुलिस ने उनके घर से लैपटॉप, कई सीडी कैसेट, सूटकेस व अन्य सामान जब्त किए थे। पत्थलगड़ी मामले में 28 अगस्त को हुई छापेमारी में भी पुलिस ने उनके घर से एक लैपटॉप, दो टैब, कुछ सीडी और दस्तावेज जब्त किए थे।


खूंटी थाना प्रभारी सह इंस्पेक्टर जयदीप टोप्पो ने बताया कि वर्ष 2018 में खूंटी में चल रहे पत्थलगड़ी विवाद के दौरान फादर स्टेन ने अपने फेसबुक वाल पर पत्थलगड़ी के समर्थन में और सरकार के विरोध में टिप्पणी पोस्ट की थी। इसके बाद 26 जुलाई 2018 को उनके खिलाफ आइपीसी की धारा 121 ए, 124 ए, आइटी एक्ट की धारा 66ए, के तहत खूंटी थाना कांड संख्या 124/18 दर्ज किया गया था।

खूंटी इंस्पेक्टर के अनुसार केस दर्ज किए जाने के बाद जून 2019 में कोर्ट ने वारंट जारी किया था। इसके बाद फादर स्टेन स्वामी की गिरफ्तारी के लिए खूंटी और नामकुम पुलिस ने छापेमारी की थी। इस दौरान वे फरार मिले थे। इसके बाद 22 सितंबर को स्टेन स्वामी के बगईचा स्थित आवास पर पुलिस ने इश्तेहार चिपकाया था। एक माह बाद कोर्ट से आदेश लेकर पुलिस ने उनके आवास पर कुर्की जब्ती की।


फादर स्टेन स्वामी मूल रूप से तमिलनाडु के रहने वाले हैं। सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर उनकी पहचान रही है। वह पिछले कई दशकों से झारखंड के आदिवासी क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्होंने विस्थापन, भूमि अधिग्रहण जैसे मुद्दों पर काम किया है। नक्सली के नाम पर जेल में बंद 3000 विचाराधीन कैदियों के पक्ष में उन्होंने हाईकोर्ट में पीआइएल दाखिल किया है।


भीमा-कोरेगांव: मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने फादर स्टेन स्वामी की गिरफ़्तारी की निंदा की

नई दिल्ली: मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा सामाजिक कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी की गिरफ्तारी को ‘निंदनीय कृत्य’ करार दिया और उन्हें आदिवासियों के अधिकारों के लिए लड़ने वाला व्यक्ति बताया.

एनआईए ने एक जनवरी, 2018 को पुणे के पास भीमा-कोरेगांव में भीड़ को कथित तौर पर हिंसा के लिए उकसाने के मामले में कथित संलिप्तता के लिए 83 वर्षीय स्टेन स्वामी को बृहस्पतिवार को उनके झारखंड के रांची स्थित घर से गिरफ्तार किया था.

अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज समेत देश भर के करीब दो हजार कार्यकर्ताओं ने 83 वर्षीय स्वामी की गिरफ्तारी की निंदा की और कहा कि यह कदम झारखंड में मानव और संवैधानिक अधिकारों के लिए काम करने वाले सभी लोगों पर हमला है.

झारखंड जनाधिकार मंच ने एक बयान जारी कर कहा, ‘हम भीमा-कोरेगांव मामले में एनआईए द्वारा झारखंड के स्टेन स्वामी की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा करते हैं. स्टेन स्वामी एक महत्वपूर्ण और देशप्रेमी नागरिक हैं, जिन्होंने झारखंड में दशकों से आदिवासी अधिकारों के लिए काम किया है.’

अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज, दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर नंदिनी सुंदर, वकील रेबेका जॉन और कार्यकर्ता अरुणा रॉय द्वारा हस्ताक्षरित बयान ने इस मामले को सरकार द्वारा आधारहीन और गढ़ा हुआ करार दिया है.

बयान में कहा गया, ‘केंद्र सरकार भीमा-कोरेगांव मामले की आड़ में इन कार्यकर्ताओं के खिलाफ एक राष्ट्रीय माओवादी साजिश का झूठा आख्यान बनाने की कोशिश कर रही है. इस मामले का मुख्य उद्देश्य आदिवासियों, दलितों और हाशिये के लोगों के अधिकारों के लिए काम करने वाले और सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ सवाल उठाने वाले कार्यकर्ताओं को निशाना बना कर परेशान करना है.’

वहीं, स्वराज इंडिया पार्टी के अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने एक ट्वीट में कहा, ‘अस्सी वर्ष से अधिक उम्र के पादरी, जिन्होंने अपना पूरा जीवन गरीबों की सेवा में बिताया, उनके साथ जो किया गया वह स्तब्ध करने वाला और निंदनीय है.’

प्रशांत भूषण ने फादर स्वामी को एक भला व्यक्ति बताया. उन्होंने ट्वीट किया, ‘पता चला कि एनआईए फादर स्टैन स्वामी को उनके रांची स्थित आश्रम से जबरदस्ती ले गई. उनसे अधिक सज्जन और विनम्र व्यक्ति की कल्पना करना भी मुश्किल है.’

भूषण ने आगे लिखा, ‘उन पर (स्वामी पर) गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने का प्रयास एनआईए के बिकाऊपन का संकेत है.’

इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने ट्वीट किया, ‘सुधा भारद्वाज की तरह ही स्टेन स्वामी ने भी आदिवासियों के अधिकारों के लिए लड़ते हुए अपना जीवन बिताया इसलिए मोदी शासन उन्हें दबाना और चुप कर देना चाहता है, क्योंकि इस सरकार के लिए खनन कंपनियों का लाभ आदिवासियों के जीवन और आजीविका से अधिक मायने रखता है.’

कार्यकर्ता हर्ष मंदर ने भी स्वामी के प्रति समर्थन जताते हुए ट्वीट किया, ‘फादर स्टेन स्वामी ने 80 वर्ष से अधिक आयु में भी भारत के आदिवासी लोगों की नि:स्वार्थ भावना से सेवा की है तथा अन्याय के खिलाफ उनके साथ मिलकर शांतिपूर्ण संघर्ष किया. सरकार एक-एक करके भारत के अच्छे बेटे-बेटियों के पीछे पड़ रही है. वंचितों के लिए आवाज उठाने वालों से वह इतनी डरी हुई क्यों है?’

फिल्मकार एवं पत्रकार प्रीतीश नंदी ने कहा कि यह बहुत ही पीड़ादायक है कि 80 साल से अधिक उम्र के पादरी, जो आदिवासी अधिकारों के लिए खड़े होते हैं, उन्हें महामारी के काल में गिरफ्तार कर लिया गया.

वहीं, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी स्टेन स्वामी के गिरफ्तारी पर सवाल उठाया. उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘गरीब, वंचितों और आदिवासियों की आवाज उठाने वाले 83 वर्षीय वृद्ध स्टेन स्वामी को गिरफ्तार कर केंद्र की भाजपा सरकार क्या संदेश देना चाहती है? अपने विरोध की हर आवाज को दबाने की ये कैसी जिद्द?’

हालांकि भाजपा के राष्ट्रीय सचिव और त्रिपुरा के प्रभारी सुनील देवधर ने एनआईए की कार्रवाई का समर्थन किया. उन्होंने कहा, ‘यह अच्छी बात है कि एनआईए ने भीमा-कोरेगांव मामले में स्टेन स्वामी को गिरफ्तार कर लिया. वह प्रतिबंधित संगठन भाकपा (माओवादी) के सदस्य हैं.’

देवधर ने कहा, ‘इससे ईसाई मिशनरियों और शहरी नक्सलियों के बीच संबंधों के बारे में और खुलासे हो सकेंगे.’

बता दें कि स्टेन स्वामी को बृहस्पतिवार (8 अक्टूबर) को रांची से गिरफ्तार कर मुंबई लाया गया और शुक्रवार को एक अदालत में पेश किया गया, जिसने उन्हें 23 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया. हालांकि स्वामी का कहना है कि उनका भीमा-कोरेगांव मामले से कोई लेना-देना नहीं है.

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने दावा किया है कि स्टेन स्वामी भाकपा (माओवादी) की गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं.

पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) ने स्वामी की गिरफ्तारी की निंदा करते हुए बयान जारी किया है. बयान में पीयूसीएल के सदस्यों ने कहा है कि वे स्वामी की हिरासत और उनकी गिरफ्तारी से अचंभित हैं और इसकी निंदा करते हैं.

बयान में कहा, ‘स्टेन को गिरफ्तार करना एनआईए प्रशासन का अमानवीय और निंदनीय कृत्य है. स्टेन ने एनआईए के जांचकर्ताओं के साथ पूरा सहयोग किया. एनआईए द्वारा स्वामी की गिरफ्तारी दुर्भावनापूर्ण है. एनआईए द्वारा स्टेन स्वामी को गिरफ्तार करने का सही कारण यह है कि उन्होंने (स्टेन) पूर्ववर्ती भाजपा के नेतृत्व वाली झारखंड सरकार द्वारा आतंकवाद रोधी कानून और राजद्रोह कानून के व्यापक स्तर पर दुरुपयोग का पर्दाफाश करने की हिम्मत की थी.’

बयान के अनुसार, ‘स्टेन ने आदिवासी युवाओं की अनकही पीड़ाओं के अनुभवों का दस्तावेज तैयार किया था, जिनमें से हजारों को बिना किसी अपराध के जेल में डाला गया. इस वजह से पुलिस और राज्य सरकार में नाराजगी थी, जिस वजह से स्टेन स्वामी और अन्य के खिलाफ झारखडं में मानवाधिकार आंदोलन में निशाना बनाया गया.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)
– BY द वायर

 

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