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अमरीकी आतंकी सैनिक कमांडर मैकेन्ज़ी ईरान से क्यों डरा हुआ है : ट्रम्प ईरान पर हमला कर सकते हैं : रिपोर्ट

पिछले हफ़्ते न्यूयॉर्क टाइम्स ने पेंटागन के सूत्रों के हवाले से यह दावा किया था कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने हाल ही में पेंटागन से ईरान के परमाणु संयंत्रों पर बमबारी करने के संभावित विकल्पों के बारे में पूछा था। हालांकि उनके सैन्य सलाहकारों ने ऐसे किसी भी क़दम के प्रति चेतावनी देते हुए कहा था कि यह हमला एक व्यापक युद्ध का रूप ले सकता है।

इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद, ईरान के विदेश मंत्रालय ने ट्रम्प प्रशासन को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा था कि चुनाव में हार का सामना करने वाले निराश ट्रम्प अगर कोई भी ऐसी ग़लती करेंगे, तो उसका मुंह तोड़ जवाब दिया जाएगा।

हालांकि मीडिया हलक़ों में अभी भी यह सवाल पूछा जा रहा है कि क्या व्हाइट हाउस छोड़ने से पहले और अपने शासनकाल के अंतिम दिनों में ट्रम्प ईरान पर हमला करने का आदेश दे सकते हैं? अगर वह ऐसा करते हैं तो क्या पेंटागन को उनके आदेश का पालन करना होगा?

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रम्प चुनाव में मिली हार से काफ़ी निराश हैं और चुनावी परिणामों को पलटने की उनकी हर चाल नाकाम हो रही है, दूसरी ओर ईरान के ख़िलाफ़ अधिकतम दबाव की उनकी नीति, तेहरान को एक नए समझौते के लिए झुकाने में विफल रही है, इसलिए वह झुंझलाहट में ऐसी मूर्खता कर सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वह ऐसा कोई आदेश देते हैं तो अमरीकी क़ानून के मुताबिक़, यह कोई ग़ैरकानूनी आदेश नहीं होगा, क्योंकि राष्ट्रपति को प्राप्त युद्ध के अधिकार के तहत वह कांग्रेस के अनुमोदन के बिना 60 दिनों तक अमरीकी सेना को युद्ध करने का आदेश दे सकता है।

फ़ॉरेन पालिसी पत्रिका का कहना है कि दुर्भाग्य से, सभी बुरे विचार ग़ैर क़ानूनी नहीं होते हैं। मीडिया हलक़ों में ऐसी अफ़वाहें तैर रही हैं कि ट्रम्प, ईरानी परमाणु साइटों पर हमला कर सकते हैं, या वह इस्राईल को ऐसा करने के लिए हरी झंडी दिखा सकते हैं, हालांकि वास्तव में यह एक भयानक विचार है।

वहीं कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की परमाणु साइटों पर बमबारी के जोखिम से ईरान की परमाणु प्रगति को स्थायी रूप से नहीं रोका जा सकता है, इसलिए कि ईरान की मुख्य परमाणु साइटें, भूमिगत हैं। हां, इस क़दम से क्षेत्र में एक ऐसा टकराव शुरू हो सकता है, जो अभी तक हुए सभी संघर्षों से कहीं अधिक व्यापक और भयानक होगा।

दूसरे यह कि ईरान ने अमरीका के परमाणु समझौते से निकलने और प्रतिबंध लगाने के बाद, हालांकि अपनी कुछ प्रतिबद्धताओं को कम किया है, लेकिन अभी भी वह परमाणु समझौते से जुड़ा हुआ है और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी आईएईए से सहयोग कर रहा है। इसलिए ट्रम्प प्रशासन की कोई भी सैन्य कार्यवाही, अंतरराष्ट्रीय नियमों का खुला उल्लंघन होगी, जिसके भयानक परिणामों से अमरीका को आसानी से छुटकारा नहीं मिल सकेगा।

ईरान हमें इराक़ से बाहर निकाल देने पर तुला हुआ हैः अमरीकी कमांडर

पश्चिमी एशिया में आतंकी अमरीकी सैनिक कमांड सेंटकाम के प्रमुख जनरल फ़्रांक मैकेन्ज़ी ने कहा कि ईरान अमरीकी सैनिकों को इराक़ से निकाल देना चाहता है।

जनरल मैकेन्ज़ी ने दावा किया कि इराक़ी सरकार तो चाहती है कि हमारे सैनिकों के साथ सहयोग करे लेकिन ईरान हमें इराक़ से बाहर निकाल देने पर तुला हुआ है।

ईरान सेंटकाम को आतंकी संगठन घोषित कर चुका है।

अमरीकी आतंकी सैनिक कमांडर जनरल मैकेन्ज़ी ने कहा कि ईरान का शायद सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य इराक़ से अमरीकी सैनिकों को बाहर निकालना है। उन्होंने कहा कि हम इलाक़े में अपनी सैनिक उपस्थिति से यह स्पष्ट संदेश देना चाहते हैं कि हम अपने घटकों की रक्षा का इरादा रखते है।

इससे पहले मैकेन्ज़ी ने यह बयान दिया था कि अमरीका ईरान से तनाव नहीं बढ़ाना चाहता, उन्होंने यह भी कहा है कि हम ईरान पर अधिकतम दबाव की नीति पर काम कर रहे हैं मगर यह पूर्णतः आर्थिक मैदान की नीतियां हैं इनमें सामरिक पहलू शामिल नहीं है।


ईरान ने फ़ार्स की खाड़ी में फिर रोका एक जहाज़

ईरान की इस्लामी क्रांति के सुरक्षाबलों, आईआरजीसी की नौसेना ने एक विदेशी मालवाहक जहाज़ रोक लिया है। जहाज़ पर पनामा का झंड़ा लगा हुआ था।

समाचार एजेंसी मेहर की रिपोर्ट के मुताबिक. आईआरजीसी ने फ़ार्स की खाड़ी में एक ऐसे जहाज़ को पकड़ा है तीन लाख टन ईंधन, अवैध रूप से ले जा रहा था। आईआरजीसी की नौसेना के जनसंपर्क विभाग ने एक बयान में कहा कि फ़ार्स की खाड़ी और हुर्मुज़ स्ट्रेट में व्यवस्थित तस्करी का पता लगाने के लिए आने-जाने वाली नौकाओं और जहाज़ों पर नज़र रखने के उद्देश्य से सेना, निरंतर गश्त करती रहती है। शुक्रवार को इस बात के सुनिश्चित हो जाने के बाद कि फ़ार्स की खाड़ी में लार्क द्वीप के दक्षिण में अवैध रूप में ईंधन ले जाया जा रहा है, पानामा का झंड़ा लगाए एक समुद्री जहाज़ को पकड़ लिया है।

उल्लेखनीय है कि, फ़ार्स की खाड़ी और हुरमुज़ स्ट्रेट में आईआरजीसी का मुख्य कार्य, ईरान के राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा करना, शांति की स्थापना और समुद्रीय तस्करी से संघर्ष करना है। ईरान की सेना फ़ार्स की खाड़ी में तेल की तस्करी को रोकने के उद्देश्य से तस्करी का ईंधन ले जाने वाले संदिग्ध जहाज़ों को रोकती है। संसार की समुद्री अर्थव्यवस्था में फ़ार्स की खाड़ी और हुरमुज़ स्ट्रेट की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में इस क्षेत्र के संबन्ध में देश की सेना की ज़िम्मेदारी उल्लेखनीय हो जाती है।

अमरीका के संभावित नए विदेश मंत्री ने ईरान परमाणु समझौते में वापसी का किया समर्थन, लेकिन रखी शर्त

अमरीका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन शासन के संभावित विदेश मंत्री क्रिस कूंस ने कहा है कि वह परमाणु समझौते में अमरीका की सशर्त वापसी का समर्थन करेंगे।

कूंस का कहना है कि अगर ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को सीमित करने और क्षेत्रीय देशों में उसके प्रभाव को कम करने के लिए कोई उपाय किया जाता है, तो वाशिंगटन परमाणु समझौते में वापल लौट सकता है।

ग़ौरतलब है कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने मई 2018 में ईरान परमाणु समझौते से निकलने का एलान कर दिया था, जिस पर 2015 में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रशासन ने हस्ताक्षर किए थे।

ट्रम्प प्रशासन ने समझौते से निकलने के बाद, ईरान के ख़िलाफ़ कड़े प्रतिबंध लगा दिए, जिसके जवाब में ईरान ने भी समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं में कमी कर दी।

बाइडन ने चुनावी मुहिम के दौरान परमाणु समझौते में वापसी का संकेत दिया था और ट्रम्प प्रशासन के फ़ैसले की आलोचना की थी।

बाइडान प्रशासन में विदेश मंत्री पद के संभावित उम्मीदवार डेमोक्रेटिक सेनेटर कूंस का कहना है कि वह परमाणु समझौते में वापसी का समर्थन करेंगे, अगर तेहरान अपने मिसाइल कार्यक्रम को सीमित करने और तथाकथित क्षेत्रीय प्रॉक्सी गुटों के समर्थन को बंद करने के लिए राज़ी होता है।

क्रिस कूंस का कहना था कि इससे पहले कि समझौते में अमरीका की वापसी की बात की जाए, वाशिंगटन को चाहिए कि ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रभाव को सीमित करने के लिए कोई उपाय खोजा जाए।

हाल ही में ईरानी विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने परमाणु समझौते में अमरीका की वापसी के लिए बाइडन प्रशासन को वार्ता का प्रस्ताव दिया था, लेकिन इस शर्त के साथ कि वार्ता परमाणु समझौते के प्रावधानों के तहत ही होनी चाहिए।

ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी, इधर उधर की बातें करने के बजाए, परमाणु समझौते पर पूरी तरह अमल करेंः ईरान

इस्लामी गणतंत्र ईरान के विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी से यह उम्मीद की जा रही है कि वह इधर उधर की बातें करने के बजाए परमाणु समझौते और संयुक्त आयोग में पास अपने वचनों पर पूरी तरह प्रतिबद्धता के लिए क़दम बढ़ाएं।

विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता सईद ख़तीबज़ादे ने शुक्रवार को अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेन्सी के साथ ईरान के सहयोग के बारे में ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इन तीनों देशों के ग़ैर ज़िम्मेदाराना दृष्टिकोण की निंदा की और कहा कि ईरान की शांतिपूर्ण परमाणु गतिविधियां पूर्णरूप से अंतर्राष्ट्रीय क़ानूनों की परिधि में क़ानूनी और वैध रही हैं और देश के अटल अधिकारों की परिधि में अंजाम पा रही हैं।

विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता परमाणु समझौते में यूरोपीय देशों के वचनों की ओर संकेत करते हुए कहा कि परमाणु समझौते से अमरीका के निकलने, प्रतिबंधों के दोबारा लागू होने, परमाणु समझौते में वर्णित प्रतिबंधों के हटने के बाद ईरान को आर्थिक लाभ पहुंचाने के बारे में यूरोप के उल्लंघनों की वजह से ईरान ने परमाणु समझौते के 26वें और 36वें अनुच्छे के अनुसार परमाणु क़दम उठाए हैं जो कि परमाणु समझौते के पूर्णरूप से अनुरूप है

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