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ईरानी डायरी : इस्राईल पर मिसाइल से हमला करेगा ईरान : इस्राईल ने पूरी दुनिया में अपने दूतावास की सुरक्षा बढ़ाई : शुरू होने जा रहा है महायुद्ध!

इस्राईल ने पूरी दुनिया में अपने दूतावास की सुरक्षा बढ़ाई, क्षेत्र में अमरीकी फ़ोर्सेज़ भी अलर्ट

इस्राईल ने ईरानी वैज्ञानिक की हत्या के बाद पूरी दुनिया में अपने दूतावास की सुरक्षा बढ़ा दी है।

ईरान के रक्षा उद्दोग के साइंटिस्ट मोहसिन फ़ख़्रीज़ादे की हत्या के बाद ज़ायोनी शासन ने पूरी दुनिया में अपने दूतावास को अलर्ट कर दिया है।

अलमयादीन टीवी चैनल के मुताबिक़, ईरानी वैज्ञानिक की हत्या और उनकी हत्या में इस्राईली शासन का हाथ होने के चिन्ह सामने आने के बाद, पूरी दुनिया में इस शासन ने अपने दूतावास को अलर्ट कर दिया और सेक्युरिटी बढ़ा दी है।

लेबनानी टीवी चैनल अलमयादीन के मुताबिक़, मोहसिन फ़ख़्रीज़ादे की हत्या के बाद, क्षेत्रीय स्तर पर अमरीकी फ़ोर्सेज़ भी अलर्ट हो गयी है।

मोहसिन फ़ख़्रीज़ादे ईरान के रक्षा मंत्रालय के शोध केन्द्र के प्रमुख थे, जो शुक्रवार को तेहरान के निकट एक आतंकवादी हमले में शहीद हो गए।

इस आतंकवादी कृत्य की इस्लामी संगठनों, हस्तियों और कुछ इस्लामी देशों ने भर्त्सना की है।

योरोपीय संघ के विदेश नीति विभाग ने एक बयान में मोहसिन फ़ख़्रीज़ादे की हत्या की आपराधिक कृत्य के रूप में निंदा की है।

इस्लामी गणतंत्र ईरान ने अपने प्रतिष्ठित साइंटिस्ट की हत्या का बदला लेने पर बल दिया है

ईरानी परमाणु वैज्ञानिक की हत्या से छिड़ सकता है तीसरा विश्व युद्ध… क्या इस्राईल जीतेगा अगला युद्ध? अब्दुलबारी अतवान का धमाका

अरब जगत के प्रसिद्ध पत्रकार अब्दुलबारी अतवान ने ईरानी वैज्ञानिक की हत्या के कई पहलुओं और ईरानी जवाब का जायज़ा लिया है।

ईरान के परमाणु वैज्ञानिक प्रोफेसर मोहसिन फ़ख्रीज़ादे की हत्या ईरान के लिए मानसिक अघात है लेकिन सब से अहम यह है कि उसकी सुरक्षा का घेरा तोड़ कर यह हत्या की गयी है इसी लिए इस हत्या का करारा जवाब दिया जाना ज़रूरी है क्योंकि ईरान के मोर्चे का दबदबा तेज़ी से कम हो रहा है और ईरान, इराक़ या सीरिया में इस्राईल व अमरीका की ओर से भड़काऊ कार्यवाहियों में वृद्धि हो रही है जबकि उनका उचित उत्तर नहीं दिया जा रहा है।

फिलहाल तो ईरान में, इस हत्या के जवाब की शैली पर व्यापक स्तर पर चर्चा हो रही है और मूल रूप से दो प्रकार के विचार सामने आ रहे हैं। एक पक्ष के लोगों का मानना है कि इस हत्या का उद्देश्य, ईरान को तत्काल जवाबी कार्यवाही के जाल में फंसा कर अमरीका के साथ युद्ध की ओर घसीटना है और इसकी योजना ट्रम्प और उनके मित्र नेतेन्याहू ने तैयार की है। दूसरे पक्ष का यह मानना है कि इस हत्या का तत्काल और मज़बूत जवाब दिया जाना चाहिए और इसके लिए ट्रम्प के अंतरिम सत्ताकाल के अंत का इंतेज़ार नहीं किया जा सकता क्योंकि सब्र का पैमाना भर चुका है। इस पक्ष के विचार में इस्राईल के भीतर या बाहर जवाबी कार्यवाही की जा सकती है और यही वजह है कि इस्राईल ने पूरी दुनिया में अपने दूतावासों की सुरक्षा बढ़ा दी है। ईरान में इस प्रकार का विचार रखने वाला पक्ष अधिक मज़बूत है।

अब दुनिया में चर्चा इस बात पर हो रही है कि ईरान इस हत्या का जवाब कैसे देगा, कब देगा और किस तरह से देगा? क्या इस जवाबी कार्यवाही की ज़िम्मेदारी, आईआरजीसी पर अकेले होगी? जैसाकि उसने फार्स की खाड़ी में आयल टैंकरों पर क़ब्ज़ा किया था और अमरीका के ड्रोन विमान ग्लोबर हाक को मार गिराया था? या फिर ईरानी सेना यह काम करेगी जैसा कि उसने जनरल क़ासिम सुलैमानी की हत्या के बाद अमरीकी छावनी पर मिसाइल बरसा कर किया था। बहुत से लोगों का यह कहना है कि जवाब तो ईरान ज़रूर देगा।

कुछ लोगों का यह भी कहना है कि ईरान की जवाबी कार्यवाही कई तरह की एक साथ हो सकती है क्योंकि इस कार्यवाही में ईरान लेबनान के हिज़्बुल्लाह, यमन के अंसारुल्लाह, इराक़ के स्वंय सेवी बल और फिलिस्तीन के हमास और इस्लामी जेहाद संगठनों जैसे अपने घटकों को प्रयोग कर सकता है। सऊदी अरब के न्यूम नगर में नेतेन्याहू, पोम्पियो और बिन सलमान की मुलाकात के दौरान यमन के अंसारुल्लाह द्वारा जद्दा पर मिसाइल हमला उसका एक उदाहरण है।

हम पिछले 40 बरसों के अनुभव और इलाक़े के हालात की समझ के आधार पर यह कह रहे हैं कि इस हत्या का जवाब न देने या देर करने से जवाब देने वालों का दबदबा कम होगा और दुश्मनों को फायदा पहुंचेगा।

इस्राईल और अमरीका में हमेशा ही नुक़सान को बहुत महत्व दिया जाता है चाहे वह उनका अपना नुकसान हो या फिर उनके घटकों का या फिर नागरिकों का या मूलभूत ढांचे का। अर्थात वह अपने सामने वाले पक्ष के नुकसान को महत्व नहीं देते हैं लेकिन अपने नुकसान को बहुत महत्व देते हैं, अफगानिस्तान में सोवियत संघ और वियतनाम व इराक़ व अफगानिस्तान में अमरीका की दशा और अंजाम इस विचार की पुष्टि करता है। इन का नुकसान जितना बड़ा होगा उतने ही जल्दी यह मैदान छोड़ कर भाग खड़े होंगे।

यह पक्की बात है कि प्रोफेसर फख्रीज़ादे की हत्या से ईरान का परमाणु कार्यक्रम रुकने वाला नहीं है बल्कि उसके में विस्तार की प्रक्रिया मे तेज़ी आ जाएगी और परमाणु हथियारों तक पहुंच और निकट हो जाएगी क्योंकि हर वैज्ञानिक का एक विकल्प होता है और ईरान के 10 परमाणु वैज्ञानिकों की हत्या इस सच्चाई का सुबूत है और अमरीकियों और इस्राईलियों को यह बहुत अच्छी तरह से मालूम है और यही वजह है कि इस प्रकार की हत्याओं के प्रतिकूल परिणाम निकलते हैं।

एक हफ्ते पहले इस्राईली सेना ने कई देशों से इस्राईल पर मिसाइल हमले को रोकने का अभ्यास किया है जबकि अमरीका के घटकों अर्थात मिस्र, सऊदी अरब, यूएई और जार्डन ने भी इसी प्रकार के युद्धाभ्यास किये हैं , हमें नहीं लगता कि यह एक संयोग है बल्कि यह वास्तव में युद्ध की तैयारी है।

हमने पिछले हफ्ते ही कहा था कि इस्राईल प्रतिरोध मोर्चे की किसी बड़ी हस्ती की हत्या की योजना बना रहा है और अब एसा लग रहा है कि पिछले हफ्ते माइक पोम्पियो का इस्राईल का दौरा इसी लिए था क्योंकि इस प्रकार की हत्या का अंजाम इलाक़े में भयानक युद्ध हो सकता है।

पहला विश्व युद्ध, आस्ट्रिया के क्राउन प्रिंस की हत्या के बाद शुरु हुआ था और हमें लगता है कि फख्रीज़ादे ही हत्या से पूरे मध्य पूर्व बल्कि दुनिया में ही विश्व युद्ध छिड़ सकता है क्योंकि नेतेन्याहू और ट्रम्प अपने अपने संकटों से बचने के लिए दुनिया को युद्ध की आग में ढकेलने के लिए तैयार हैं।

सन 2020 मध्य पूरव् के लिए बहुत बुरा साल रहा है, उसकी शुरुआत इस्राईल से अरब देशों के संबंध बनाने से हुई और अब अंत कोरोना से हो रहा है लेकिन लगता है कि सन 2021, मध्य पूर्व के लिए मिसाइलों का साल रहेगा और बहुत सी गलतियों को सुधार होगा क्योंकि यह बहुत पुराना है जो यहां पर यथार्थ होता है कि इलाक़े के लोगों के पास अब खोने को कुछ नहीं लेकिन अमरीका और इस्राईल और उनके अरब घटकों के पास खोने को बहुत कुछ है, इसी लिए आने वाले देनों में चौंका देने वाली घटनाएं सामने आएंगी। इस्राईल के पूर्व रक्षा मंत्री एविग्डोर लेबरमैन ने स्वीकार किया है कि इस्राईल को सन 1967 के बाद से किसी भी युद्ध में सफलता नहीं मिली है। इस लिए हम यह कहते हैं कि अगले किसी युद्ध में भी इस्राईल को कोई सफलता मिलने वाली नहीं है, क्योंकि समय बदल चुका है और उसके नये दुश्मन , उसके पुराने दुश्मनों की तरह नहीं हैं, सच्चाई बस सामने आने वाली है, जिसे सब देखेंगे।Q.A.

साभार, रायुलयौम, लंदन।

बिजली की तरह क़ातिलों पर गिरेंगे! ईरान का एलान

ईरान के एक वरिष्ठ परमाणु वैज्ञानिक मोहसिन फख़्री ज़ादे की हत्या के बाद व्यापक प्रतिक्रिया सामने आ रही है।

ईरान के वरिष्ठ परमाणु वैज्ञानिक मोहिसल फख्री ज़ादे को राजधानी तेहरान के निकट आबसर्द उपगर के एक चौराहे पर आत्मघाती हमले में शहीद कर दिया गया।

यह हमला शुक्रवार को दोपहर दो बजे कर चालीस मिनट पर किया गया। ब्योरे के अनुसार पहले उनकी गाड़ी के पास एक मालवाहक वाहन में सवार आत्मघाती आक्रमणकारी ने अपनी गाड़ी को धमाके से उड़ा लिया और उसके बाद निकट मौजूद उसके साथियों ने मोहसिन फख्री ज़ादे की गाड़ी पर फायरिंग शुरु कर दी। इस हमले में मोहसिन फख्री ज़ादे के साथ उनके कुछ रिश्तेदार और सुरक्षा कर्मी भी बुरी तरह घायल हो गये।

हमले के बाद ईरान के परमाणु वैज्ञानिक मोहसिन फख्रीज़ादे को हेलीकाप्टर से अस्पताल पहुंचाया गया किंतु डाक्टर उन्हें बचाने में कामयाब नहीं हुए और वह शहीद हो गये।

इस अवसर पर होने वाली झड़प में कई अन्य लोग मारे गये जिनकी पहचान अभी तक बतायी नहीं गयी है लेकिन कुछ सूत्रों के अनुसार मारे जाने वालों में से कई हमलावर भी हैं।

ईरान के रक्षा मंत्रालय ने एक बयान जारी करके घटना की जानकारी देते हुए बताया है कि हमले के बाद घायल अवस्था में मोहसिन फख्रीज़ादे को अस्तपाल ले जाया गया लेकिन उन्हें जीवित रखने की डाक्टरों की कोशिश सफल नहीं हो पायी और ईरान के एक और महान सेवक की वर्षों तक अपने देश और राष्ट्र की सेवा के बाद शहादत हो गयी।

इस्लामी गणतंत्र ईरान के विदेशमंत्री जवाद ज़रीफ ने ट्वीट करके कहा है कि शहीद फख्रीज़ादे की हत्या के पीछे इस्राईल के हाथ होने के चिन्ह मिले हैं।

उन्होंने लिखा है कि आतंकवादियों ने ईरान के एक और वरिष्ठ वैज्ञानिक की हत्या कर दी। यह कायरता पूर्ण कार्यवाही जिसमें इस्राईल के हाथ होने के चिन्ह मिले हैं, नाकामी के बाद युद्ध की कोशिश का लक्षण है।

उन्होंने लिखा कि ईरान विश्व समुदाय विशेषकर यूरोपीय संघ से मांग करता है कि वह अपने लज्जानक दोगले व्यवहार का अंत करे और इस आतंकवादी हमले की आलोचना करे।

इस्लामी गणतंत्र ईरान की सशस्त्र सेना के चीफ आफ स्टाफ जनरल मुहम्मद बाक़ेरी ने एक बयान जारी करके फख्रीज़ादे की शहादत पर संवेदना प्रकट की है और कहा है कि विश्व साम्राज्य और ज़ायोनिज़्म से संबंधित आतंकवादियों ने पाश्विक हमले में देश के एक बड़े शोधकर्ता और वैज्ञानिक की हत्या कर दी है। उन्होंने अपने बयान में कहा है कि रक्षामंत्रालय के अध्ययन व शोध विभाग के प्रमुख शहीद डाक्टर मोहसिन फ़ख्रीज़ादे ने जीवन भर देश की बहुत सेवा की और वह देश की रक्षा शक्ति को एक स्वीकारीय स्तर तक पहुंचाने में सफल रहे और इतने बड़े वैज्ञानिक की हत्या देश की रक्षा क्षमता पर बड़ी चोट है लेकिन दुश्मन यह जान लें कि शहीद फख्रीज़ादे ने जो राह बनायी है वह जारी रहेगी और यह कार्यवाही करने वाले आतंकवादी और उनके समर्थक और आदेश देने वाले यह जान लें कि कड़ा बदला लिया जाएगा।

आईआरजीसी के कमांडर जनरल सलामी ने भी ट्वीट किया है कि परमाणु वैज्ञानिकों की हत्या, हमें आधुनिक विज्ञान तक पहुंचने से रोकने के लिए वर्चस्वादियों की ओर से बेहद हिंसक और स्पष्ट टकराव का एक रूप है।

विदेशमंत्री जवाद ज़रीफ

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता के सलाहकार और ईरान के पूर्व रक्षा मंत्री जनरल हुसैन देहक़ान ने कहा है कि हम शहीद फख्रीज़ादे के कातिलों पर बिजली बन कर टूट पड़ेंगे।

उन्होंने ट्वीट किया है कि ज़ायोनी, अपने जुआरी दोस्त की सत्ता के अंतिम दिनों में एक युद्ध शुरु करने के लिए ईरान पर दबाव बढ़ाने की कोशिश में हैं लेकिन रात अभी लंबी है और हम जाग रहे हैं , इस शहीद के कातिलों पर बिजली बन कर टूट पड़ेंगे और उन्हें अपने किये पर पछताने पर मजबूर कर देंगे।

इसी मध्य इस्लामी गणतंत्र ईरान की परमाणु ऊर्जा एजेन्सी के पूर्व प्रमुख फरीदून अब्बासी ने कहा है कि शहीद फख्रीज़ादे को अमरीका में डेमोक्रेटों के सत्ता में आने से पहले शहीद किया गया क्योंकि दुश्मन यह चाहते हैं कि ईरान पर दबाव डाल कर उसे वार्ता पर तैयार किया जाए।


जनरल बाक़ेरी

उन्होंने कहा कि यह आतंकवादी हमला, मुझ पर और शहीद शहरयारी पर हमले के दस साल पूरे होने के अवसर पर किया गया है और आज से 12 साल पहले भी शहीद फख्री पर हमले के लिए आतंकवादियों की एक टीम भेजी गयी थी लेकिन सुरक्षा बलों ने उन्हें विफल कर दिया। फरीदून अब्बासी ने बताया कि दुश्मन पिछले 15 साल से शहीद फख्री की हत्या के प्रयास में था।

याद रहे इस्राईल के प्रधानमंत्री नेतेन्याहू ने दो साल पहले मोहसिन फख्रीज़ादे का नाम लिया था जिसके बाद इस्राईली मीडिया ने बताया था कि मोसाद ने बहुत पहले मोहसिन फख्रीज़ादे की हत्या की कोशिश की थी मगर वह कोशिश नाकाम हो गयी थी।

इस्राईल की वल्ला न्यूज वेबसाइट ने बताया था कि मोसाद के कुछ अधिकारियों ने बताया है कि मोहसिन फख्रीज़ादे ईरान के उन वैज्ञानिकों में शामिल हैं जिनका नाम उसकी हिट लिस्ट में है।


ट्रम्प जाते जाते कोई नई जंग छेड़ने जा रहे हैं ? किसके ख़िलाफ़…

इस्राईल और सऊदी अरब का साफ़ मैसेज बाइडन के लिए

अमरीकी अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्ज़ ने एक रिपोर्ट छापी थी कि राषट्रपति ट्रम्प ईरान के किसी परमाणु प्रतिष्ठान पर हमले के लिए, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की टीम से सलाह मशविरा किया है। फिर अमरीकी और इस्राईली मीडिया में, इस्राईली प्रधान मंत्री के सऊदी अरब के दौरे के तुरंत बाद रिपोर्ट छपी कि ईरान पर संभावित अमरीकी हमले और ईरान की जवाबी कार्यवाही के मद्देनज़र, इस्राईली नेतृत्व ने सेना को तय्यार रहने का निर्देश दिया है। ये ख़बरे क्षेत्र में एक ख़तरनाक सिनेरियो पेश कर रही हैं और इन सब ख़बरों के तार एक दूसरे से जुड़े हुए हैं।

सबसे पहले अमरीकी विदेश मंत्री का पश्चिम एशिया का दौरा और इस दौरान सऊदी अरब के नए बसाए गए तटवर्ती शहर न्योम में सऊदी युवराज बिन सलमान से इस्राईली प्रधान मंत्री बिन्यामिन नेतनयाहू की होने वाली मुलाक़ात। हालांकि सऊदी विदेश मंत्री इस मुलाक़ात को रद्द करते हैं लेकिन इस्राईली प्रधान मंत्री का कार्यालय इस ख़बर की पुष्टि करने के बजाए मूक दर्शक बना हुआ है।

अमरीका, इस्राईल और सऊदी अरब के तीन नेताओं की मुलाक़ात पर, जो सऊदी शासन के मुताबिक़, नहीं हुयी, इस्राईली और अमरीकी रिपोर्टर्ज़ का कहना है कि इस मुलाक़ात का केन्द्र बिन्दु ईरान था। हालांकि इस मुलाक़ात में सऊदी-इस्राईल संबंध को सामान्य लाने पर भी बात हुयी लेकिन फ़ौरन कोई सहमति नहीं बन पायी, लेकिन इस दौरे से कई बड़े लक्ष्य साधने की कोशिश की गयी।

इस्राईली प्रधान मंत्री 4-5 घंटे सऊदी अरब की भूमि में मौजूद रहे, इसलिए इस बात की जिज्ञासा पैदा हुयी कि इस लंबी मुलाक़ात में किन किन बिन्दुओं पर चर्चा हुयी होगी। सभी सूत्र एक बिन्दु पर सहमत थे कि इस मुलाक़ात का केन्द्र बिन्दु ईरान था लेकिन योजनाएं क्या थीं इस पर रिपोर्टिंग अलग अलग तौर पर हुयी।

एक और बात जिस पर सभी मीडिया हाउस की रिपोर्टों में सामान्य बिन्दु नज़र आया वह यह कि इस मुलाक़ात में ईरान पर हमले पर भी चर्चा हुयी ताकि जो बाइडेन को 2015 के परमाणु समझौते में वापस होने से रोका जा सके। यही ट्रम्प प्रशासन का भी लक्ष्य है।

इस मुलाक़ात में बाइडन सरकार के लिए साफ़ मैसेज था कि क्षेत्र में अमरीका के दो घटक, ईरान के मामले में उनकी पुरानी नीति का साथ नहीं देंगे।

नेतनयाहू वाइट हाउस की सहमति से पश्चिमी तट का 30 फ़ीसद हड़पने को तय्यार थे लेकिन, बाइडन की टीम ने अरब जगत में जॉर्डन के शासक से संपर्क बना कर यह इशारा दिया कि वह 2 स्टेट के हल को वरीयता देंगे और इस्राईल को पहले जैसी खुली छूट नहीं होगी।

ताज़ा घटना ईरानी वैज्ञानिक मोहसिन फख़्रीज़ादे की तेहरान के उपनगरीय भाग में हत्या है। अस्ल में इस्राईल इस हत्या के ज़रिए ईरान को किसी ऐसी कार्यवाही के लिए उकसाने की कोशिश कर रहा है जिससे क्षेत्र में कोई नई जंग छिड़ जाए और बाइडन प्रशासन आते ही परमाणु बातचीत के बजाए इस लड़ाई में उलझ जाए। ईरान ने हालांकि बदला लेने का एलान किया है लेकिन ईरान ऐसे किसी क़दम से बचेगा जिससे खुली जंग छिड़ने का खतरा हो।

साभार डान न्यूज़, पाकिस्तान

जो बाइडन के आने से ईरान व अमरीका के टकराव में कोई बुनियादी बदलाव नहीं आएगाः इराक़

इराक़ के विदेश मंत्री ने कहा है कि इस बात की अपेक्षा नहीं है कि अमरीका में नए राष्ट्रपति के सत्ता में आने से तेहरान व वाॅशिंग्टन के बीच टकराव में कोई मूल परिवर्तन आएगा।

फ़वाद हुसैन ने रशा टूडे को दिए गए इंटरव्यू में आशा जताई है कि ईरान व अमरीका एक दूसरे से वार्ता की दिशा में आगे बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि हम नहीं चाहते कि इराक़, अमरीका व ईरान के बीच टकराव का मैदान बने क्योंकि इससे इराक़ियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इराक़ के विदेश मंत्री ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि अमरीका में बाइडन के राष्ट्रपति बन जाने से ईरान व अमरीका के बीच टकराव में कोई बुनियादी बदलाव आएगा। उन्होंने अमरीका के साथ अपने देश के आगामी संबंधों के बारे में कहा कि आशा है कि जो बाइडन, इराक़ के बारे में अलग रवैया अपनाएंगे और हम एक सकारात्मक परिवर्तन की ओर आगे बढ़ेंगे। उनका कहना था कि बाइडन और उनके विदेश मंत्री एंथनी ब्लिंकन इराक़ को प्राथमिकता देंगे।

इराक़ के विदेश मंत्री फ़वाद हुसैन ने अपने पड़ोसी देशों के साथ इराक़ के संबंधों के बारे में कहा कि ये संबंध आपसी हितों पर आधारित हैं और सरकार, सऊदी अरब जैसे पड़ोसी देशों के साथ इराक़ के संबंधों के बारे में फ़ैसला करती है। उन्होंने बग़दाद में अमरीकी दूतावास और कूटनैतिक केंद्रों पर होने वाले हमलों के बारे में कहा कि कुछ गुट ये हमले कर रहे हैं और उन्हें यह संदेश मिल चुका है कि इन हमलों की बलि जनता चढ़ रही है।

उन्होंने अपना दूतावास बंद करने की अमरीका की धमकी के बारे में कहा कि अमरीकी पक्ष ने यह धमकी दी थी लेकिन अब वह बात ख़त्म हो चुकी है और अतीत का भाग बन गई है। इराक़ी विदेश मंत्री ने इसी तरह अपने देश में पी.के.के. के सदस्यों की गतिविधियों का विरोध किया लेकिन इसी के साथ कहा कि तुर्की को इराक़ी क्षेत्रों पर हमले करने का हक़ नहीं है।

परमाणु वैज्ञानिक की हत्या, अमरीका और इस्राईल के लिप्त होने के साफ़ संकेत..

ईरान के रक्षा मंत्रालय में रिसर्च एंड इन्वेन्शन संस्था के प्रमुख मुहसिन फ़ख़्रीज़ादा की राजधानी तेहरान के क़रीब हत्या एक जटिल इंटैलीजेन्स प्रक्रिया के बाद अंजाम दी जाने वाली घटना है। इस हत्या के लिए प्रशिक्षित आतंकी टीम का इस्तेमाल किया गया। टीम ने एक झड़प में वरिष्ठ वैज्ञानिक की हत्या की जो ईरान के रक्षा मंत्रालय में रक्षा उपकरणों और मिसाइलों को विकसित करने में प्रभावी भूमिका रखते थे।

इस प्रकार की हत्याओं के लिए आम तौर पर अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए और इस्राईली ख़ुफ़िया एजेंसी मोसाद मिलकर जटिल योजना बनाते और अंजाम देते हैं। इस तरह की घटनाओं में सैटेलाइट तसवीरों, ज़मीन पर मौजूद एजेंटों और बेहद माडर्न आप्रेशन और कोआर्डिनेशन रूम का इस्तेमाल किया जाता है।

इस प्रकार की टारगेट किलिंग काफ़ी मुश्किल काम है क्योंकि ईरान ने परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल कार्यक्रम और ख़ुफ़िया रक्षा उपकरणों के कार्यक्रमों से जुड़े वैज्ञानिकों और अधिकारियों की सुरक्षा बहुत बढ़ा रखी है।

यक़ीनन इस्राईल और अमरीकी इंटैलीजेन्स एजेंसियों को यह लगा होगा कि वैज्ञानिक की हत्या से ईरान के रक्षा और परमाणु कार्यक्रमों को आघात पहुंचेगा मगर यह भी तय है कि ईरान इस घटना पर बहुमुखी जवाबी कार्यवाही करेगा।

ईरान सबसे पहले तो देश के भीतर दुशमनों के इंटेलीजेन्स नेटवर्क को ध्वस्त करना चाहेगा और यही ईरान की प्राथमिकता होनी चाहिए और इसके बाद उस टारगेट को निर्धारित करेगा जिसके बारे में ईरान के राजनेताओं और सैन्य अधिकारियों ने बयान दिए हैं।

यह भी तय है कि ईरान की जवाबी कार्यवाही के बारे में बहस छिड़ेगी। दशकों का अनुभव तो यही बताता है कि ईरान आक्रोश में आकर फ़ौरन जवाबी कार्यवाही नहीं करता बल्कि हर कार्यवाही के तमाम संभावित परिणामों और आयामों पर विचार कर लेने के बाद उसे अंजाम देता है। ईरान के नीति निर्धारकों के सामने इस समय यह सवाल ज़रूर है कि क्या कोई ताक़त ईरान को किसी जाल में फंसाने की कोशिश में है कि इस प्रकार की टारगेट किलिंग के बाद ईरान जवाबी कार्यवाही करे और फिर ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमले करने के लिए ट्रम्प को बहाना मिल जाए? इन आयामों को सामने रखते हुए ईरान इंतेक़ाम की रणनीति तैयार करेगा।

कमाल ख़लफ़

फ़िलिस्तीनी पत्रकार

USS Nimitz aircraft carrier strike group is being deployed back into the Persian Gulf.


ईरान अपने वैज्ञानिक की हत्या का बदला लेने के लिए इस्राईल पर मिसाइल से हमला करेगा? इस्राईली मीडिया की यह रिपोर्ट पढ़ें

लंदन से प्रकाशित होने वाले समाचारपत्र रायुलयौम ने ईरान के वरिष्ठ परमाणु वैज्ञानिक की हत्या पर इस्राईली मीडिया के रुख का जायज़ा लिया है।

इस्राईली मीडिया, ईरान के वरिष्ठ परमाणु वैज्ञानिक प्रोफेसर मोहसिन फख्रीज़ादे की हत्या की खबरों से भरा हुआ है लेकिन इस्राईल इस हत्याकांड की ज़िम्मेदारी स्वीकार नहीं कर रहा है। इन हालात में आम तौर पर वह जैसा करता है उसी तरह उसने सरकारी हितों की रक्षा करने वाले संचार माध्यमों ने विदेशी सूत्रों के हवाले से इस बारे में रिपोर्ट दी है और विश्लेषण प्रकाशित किये जा रहे हैं जिसमें सब के सब इस हमले और हमले का निशाना बनने वाले ईरानी वैज्ञानिक के महत्व पर बल दे रहे हैं लेकिन हारित्ज़ के टीकाकार, यूसी मीलमान का कहा है कि फख्रीज़ादे की हत्या से ईरान का परमाणु कार्यक्रम रुकने वाला नहीं है क्योंकि ईरान के पास अपने हर परमाणु वैज्ञानिक का एक विकल्प मौजूद है।

मीलमान, इस्राईल की सुरक्षा एजेन्सियों से जुड़े हैं और मोसाद से उनका विशेष प्रकार से संबंध है। मीलमान का कहना है कि फख्रीज़ादे की मौत से ईरान के परमाणु विज्ञान में कोई कमी नहीं पैदा होगी क्योंकि ईरान के पास परमाणु क्षेत्र में बहुत अधिक जानकारी है जिसकी मदद से वह परमाणु बम भी बना सकता है लेकिन फख्रीज़ादे की हत्या ईरान के लिए एक मानसिक अघात है।

इसी मध्य इस्राईल के चैनल-12 के रिपोर्टर ने टार्गेट किलिंग का इतिहास पेश किया और बताया है कि हालिया वर्षों में ईरान के 10 परमाणु वैज्ञानिकों की हत्या की जा चुकी है और फख्रीज़ादे की हत्या कई बरसों से जारी अभियान का परिणाम है लेकिन उन्हें भी पुराने तरीक़े से ही मारा गया, मोटरसाइकिल पर सवार हमलावरों द्वारा।

इस्राईली टीवी के रिपोर्टर डीफोरी ने बताया है कि तेल अबीव ने हत्या की ज़िम्मेदारी नहीं ली है लेकिन एसा लगता है कि अमरीका के विदेशमंत्री माइक पोम्पियो और इस्राईली अधिकारियों की हालिया भेंट के दौरान संभावित रूप से इस हमले की भूमिका तैयार की गयी हो और जिन लोगों ने यह हमला अंजाम दिया है उन्हें फख्रीज़ादे की गतिविधियों का पता था और उन्होंने बहुत देर तक इंतेज़ार किया यहां तक कि फख्रीज़ादे हमले की जगह पर पहुंच गये।

इस्राईली रिपोर्टर ने डीफोरी ने इसी तरह बताया है कि फख्रीज़ादे को भी यह बहुत अच्छी तरह से मालूम था कि विदेशी खुफिया एजेन्सियां उन पर हमले की योजना रखती हैं इसी लिए वह अपनी यात्राओं को खुफिया रखते थे और बहुत सतर्कता करते थे मगर फिर भी वह जाल में फंस गये और डीफोरी के शब्दों में ईरान के परमाणु बम के गॉड फादर की हत्या कर दी गयी।

ईरान के परमाणु वैज्ञानिक की हत्या पर इस्राईल में जारी खुशी के सिलसिले में इस्राईली वेबसाइट ” वाल्ला” ने बताया है कि इस्राईल ने हालिया दिनों में अमरीका के नव निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन को कई संदेश भेजे और यह कहा कि वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए वह अपनी योजना को लागू करेगा और उसके लिए यह महत्वपूर्ण नहीं है कि अमरीका में कौन राष्ट्रपति बनता है।

इस्राईली वेबसाइट वाल्ला ने लिखा है कि फख्रीज़ादे की हत्या, जनरल सुलैमानी की हत्या के लगभग एक साल बाद हुई है जिसके बाद ईरान और अमरीका में सैन्य टकराव की हद तक तनाव बढ़ गया था लेकिन अब जो कुछ मध्यपूर्व में हो रहा है कि उससे ईरान के साथ समझौता करने की अमरीका के नये राष्ट्रपति का कार्यक्रम, अंसभव नहीं तो कठिन ज़रूर हो जाएगा।


इसी संदर्भ में वाल्ला वेबसाइट पर सैन्य मामलों के इस्राईली टीकाकार एमीर बुहबूत ने कहा है कि ईरान इस कार्यवाही से जाल में फंस गया है लेकिन इस बात की बहुत संभावना है कि वह अपने ” एजेन्टों” द्वारा इसका बदला ले। इस इस्राईली टीकाकार ने लिखा है कि इस्राईल के सुरक्षा अधिकारियों ने इस घटना पर चुप्पी साध रखी है लेकिन कुछ हफ्ते पहले इस्राईली वायु सेना ने ऐसा युद्धाभ्यास किया है जिसमें ईरान के प्रभाव वाले इलाकों अर्थात, इराक, लेबनान और सीरिया से इस्राईल पर मिसाइल हमले को रोकने का अभ्यास किया गया।

इस्राईली मीडिया, न्यूयार्क टाइम्ज़ की उस रिपोर्ट का भी हवाला दे रहा है जिसमें कहा गया है कि ईरानी परमाणु वैज्ञानिक फख्रीज़ादे की हत्या के पीछे इस्राईल का हाथ है। न्यूयार्क टाइम्ज़ ने यह भी लिखा है कि वाइट हाउस ने फख्रीज़ादे की हत्या पर टिप्पणी करने से इन्कार किया है इसी तरह पेंटागोन ने भी इस हत्या पर कुछ बोलने से इन्कार किया है।

इस्राईल के मआरियो समाचार पत्र ने भी फख्रीज़ादे की हत्या के जश्न में भाग लेते हुए लिखा है कि यह हत्या, बैतुलमुक़द्दस में इस्राईल और बहरैन के विदेशमंत्री की भेंट के एक हफ्ते बाद हुई है जिसके दौरान इलाक़े में ईरान के बढ़ते प्रभाव को रोकने पर चर्चा की गयी थी।

अंत में यह बताना भी ज़रूरी है कि इस्राईली मीडिया, ईरान के संगठनों में घुसपैठ और ईरानी हस्तियों पर नियंत्रण की बात नहीं कर रहा है बल्कि वह हत्या की शैली और मोसाद की दक्षता की बात कर रहा है।Q.A.

साभार, रायुलयौम, लंदन।

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