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कोरोना महामारी है भी या ये भी कोई षड़यंत्र है : तंजानिया के राष्‍ट्रपति बोले, अल्‍ला की मदद से देश हुआ कोरोना मुक्‍त : रिपोर्ट

एक साल पहले तक किसी ने भी कोरोना नाम नहीं सुना था लेकिन आज हर आदमी, पूरी दुनियां इसके ख़ौफ़ में जी रही है, बड़ी बड़ी ताक़तें कोरोना के सामने बेबस नज़र आ रही हैं, बीते साल चीन से शुरू हुई महामारी को बाकी दुनियां के अन्य देशों ने गंभीरता से नहीं लिए था, नतीजा ये हुआ कि कोरोना ने तबाही मचा दी है, चीन में जब कोरोना शुरू हुआ था उसके बाद WHO ने बचाव के लिए चेतावनियां जारी की जिन्हें भारत, अमेरिका ने बिलकुल भी संजीदगी से नहीं लिया था आज ये दोनों देश कोरोना से होने वाली मौतों के मामले में दुनियांभर में सबसे आगे हैं

अब सवाल भी उठता है कि क्या कोरोना वायरस सच में है भी या ये कोई बड़ा षड़यंत्र है, भारत में प्रधानमंत्री मोदी ने 21 दिन में कोरोना पर विजय पाने का दावा करते हुए पूरे देश में लॉक डाउन कर दिया था, वो लॉक डाउन कितना कामयाब रहा ये देश जानता है, यहाँ जब भी किसी प्रदेश में चुनाव होते हैं कोरोना वहां से चला जाता है और सामान्य हालात होते ही फिर से शुरू हो जाता है

देश में अज्ञानता का भण्डार है, सरकार, स्वास्थ विभाग, कोई जानकार, विशेषज्ञ है जिसने मोबाइल पर कॉलर ट्यून के ज़रिये चेतवानी देने का तरीका खोजा है, आठ माह से जनता इस कोरोना कॉलर ट्यून को झेल रही है, इससे लोग मानसिक प्रताड़ित हो रहे हैं मगर अज्ञानी विशेषज्ञों ने इसे चलाया हुआ है

कोरोना का तमाशा चल रहा है यहाँ, बड़ी बड़ी चुनावी रैलियों में हज़ारों की भीड़, नेताओं के भाषण, तब कोरोना न जाने कहाँ चला जाता है

वायरस की कोई परमानेंट शेप, साइज नहीं होता, हर वाइरस की अलग अलग प्रॉपर्टीज होती हैं, जगह बदलने पर वायरस की प्रॉपर्टी चेंज हो जाती हैं, अब जो देश कोरोना की वैक्सीन बनाने की बात कर रहे हैं, वो असल में तो मुमकिन है नहीं, लोगों को बहलाने के लिए कुछ भी ला कर कोरोना की वैक्सीन बताया जा सकता है, बता दें कि कोरोना की मौतों की दर बहुत कम है,

कोरोना से बचाव के लिए मास्क का बहुत प्रचार किया गया है, अमेरिकी राष्ट्र पति ट्रम्प कोरोना का इलाज करवा कर मीडिया के सामने आता है और मॉस्क उतार कर फैक देता है, भारत में सरकारें मास्क न पहनने वालों से वसूली कर रही हैं, बता दें कि किसी भी सरकार, स्वास्थ विभाग, संस्था ने मॉस्क को लेकर कोई स्टैण्डर्ड तै नहीं किये हैं कि कौनसा मॉस्क कोरोना के वायरस से बचा सकता है, अभी जो मास्क भारत में मौजूद हैं, उनमे से कोई एक भी ऐसा नहीं है, कोरोना के वाइरस से बचाव कर सके, मास्क की जो जाली के सुराख होते हैं वो कोरोना वायरस से दसियों गुना बड़े हैं, इस लिए इन मॉस्को से कोरोना बचाव संभव नहीं है

देखें ये रिपोर्ट

दुनिया में कोरोना महामारी के प्रसार के बीच इसका राजनीतिक एग्‍लस भी बड़ा दिलचस्‍प है। ऐसे में जब पूरी दुनिया कोरोना महामारी के इलाज के यत्‍न में जुटी है, दुनिया के कुछ शीर्ष राजनेताओं ने इसके अस्तित्‍व को इनकार कर दिया है। आइए जानते हैं अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के अलावा उन नेताओं के बारे में जिन्‍होंने अपने देश में कोरोना वायरस के प्रतिबंधों को नकार दिया, जबकि उनका देश कोरोना वायरस के प्रकोप से जूझ रहा है। इन राजनेताओं के रवैये को देखते हुए विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस अदनोम घेबियस को भी कहना पड़ा कि हमारे ल‍िए ज्‍यादा बड़ी चुनौती कोरोना वायरस नहीं, बल्कि वैश्विक नेतृत्‍व और वैश्विक समन्‍वय का ना होना है।

1- ब्राजील के राष्‍ट्रपति ने कहा कोरोना है मामूली जुकाम बुखार

ब्राजील के राष्‍ट्रपति जायर बोलसेनारो भी उन राजनीतिज्ञों में शामिल हैं, ज‍िन्‍होंने कारोना वायरस के अस्तित्‍व को अस्‍वीकार कर दिया है। ब्राजील के राष्‍ट्रपति कोविड-19 महामारी को मामूली जुकाम बुखार कहकर खारिज कर चुके हैं। उन्‍होंने अपने देश में उन अधिकारियों की खूब खिंचाई की जो कोरोना वायरस के रोकथाम के लिए प्रतिबंधों की वकालत कर चुके हैं। राष्‍ट्रपति ने उन अधिकारियों को भी लतार लगाई जो कोरोना वायरस को रोकने के लिए आर्थिक गतिविधियों को रोकने का प्रयास किया। राष्‍ट्रपति लगातार किसी भी रैली या बैठक में मास्‍क नहीं पहन रहे थे। अदालत के हस्‍तक्षेप के बाद उन्‍होंने मास्‍क पहनना शुरू किया।

2- तंजानिया के राष्‍ट्रपति बोले- अल्‍लाह की मदद से देश हुआ कोरोना मुक्‍त

तंजानिया के राष्‍ट्रपति जॉन मागुफुली ने देश को कोरोना वायरस से मुक्‍त घोषित कर दिया है। यह ऐलान करते हुए उन्‍होंने कहा कि ऐसा सिर्फ अल्‍लाह की मदद से ही संभव हो पाया है। राष्‍ट्रपति मागुफुली शुरुआत से ही तंजानिया में कोरोना वायरस के संक्रमण को लेकर चिंतित नहीं रहे हैं। उन्‍होंने देशवासियों से कहा कि कोरोना वायरस से मुक्‍त होने के लिए प्रार्थना करिए। उन्‍होंने कहा कि जीसस के शरीर में कोई शैतानी वायरस नहीं टिक सकता। विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन ने स्‍थानीय अधिकारियों से तंजानिया में शारीरिक दूरी और धार्मिक स्थलों को खुला रखने पर भी चिंता व्यक्त की थी।

3- राष्‍ट्रपति ट्रंप ने कहा कोरोना एक मामूली रोग

अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने कोरोना वायरस को मामूली रोग करार दिया। यही कारण है कि राष्‍ट्रपति ट्रंप ने देश में कोरोना वायरस के प्रतिबंधों की अनदेखी की। यहां तक की चुनावी रैलियों में उन्‍होंने खुद मास्‍क पहनने से गुरेज किया और अपने समर्थकों को भी मास्‍क नहीं पहनने पर खुशी जाहिर की। अमेरिका के राष्‍ट्रपति इन प्रतिबंधों की उस समय अनदेखी की जब अमेरिका में कोरोना वायरस का प्रसार चरम पर है। कोरोना संक्रमितों के लिहाज से यह दुनिया का अग्रणी राष्‍ट्र बना हुआ है। राष्‍ट्रपति ट्रंप ने टेक्‍सास के गवर्नर ग्रेग अबॉट की तारीफ की, जिन्‍होंने अपने राज्‍य से लॉकडाउन हटाने का निर्णय लिया था। वह अमेरिकी अर्थव्‍यस्‍था को पूरी तरह से खोल देने के पक्षधर रहे हैं। कोरोना महामारी को मामूली रोग मानने वाले ट्रंप चीन और विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन को महामारी फैलाने का दोषी ठहराते रहे हैं।

4- मैक्सिकन राष्‍ट्रपति ओब्राडोर ने देश में चुंबन का समर्थन किया

अमेरिकी राष्‍ट्रपति ट्रंप की तर्ज पर मैक्सिकन राष्‍ट्रपति ओब्राडोर ने भी अपने देश के नागरिकों से कहा कि उन्‍हें कोविड-19 से नहीं डरना चाहिए। वैश्विक स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारियों के चेतावनी के बावजूद वह राजनीतिक रैलियों में शिरकत की। उन्‍होंने सार्वजन‍िक रूप से चुंबन का समर्थन किया। मैक्सिकन राष्‍ट्रपति ने कहा कि आपको लोगों के स्‍वास्‍थ्‍य को प्राथमिकता देने और अर्थव्‍यवस्‍था के स्‍वास्‍थ्‍य के पहले कितने लोगों की मृत्‍यु हो सकती है, इस बारे में चिंता करने की जरूरत है।

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