विशेष

ट्रम्प ने अगर जाते जाते कोई मूर्खता भरा क़दम उठाया तो ईरान जवाबी हमला ज़रूर करेगा : रिपोर्ट

 

अलक़ायदा के सरग़ना की हत्या का ख़ुलासा अब क्यों? इलाक़े से सैनिकों को निकालना अमरीका की हार का एलान है या ईरान के जवाबी हमले से सैनिकों को बचाने की कोशिश?

ट्रम्प प्रशासन ने अभी तीन दिन पहले यह ख़ुलासा किया कि इस्राईली ख़ुफ़िया एजेंसी मुसाद से जुड़ी टीम ने तीन महीना पहले तेहरान में अलक़ायदा के नंबर 2 सरग़ना अब्दुल्लाह अहमद अब्दुल्लाह और उसकी बेटी और ओसामा बिन लादेन की बहू मरियम की हत्या कर दी थी।

इस समय ट्रम्प सरकार की ओर से यह एलान केवल संयोग नहीं है बल्कि इसका सीधा संबंध ट्रम्प की उस योजना से है जो वह वाइट हाउस में बाक़ी बचे अपने कुछ हफ़्तों में पूरी करना चाहते हैं। अचानक इस एलान से ट्रम्प तीन लक्ष्य साधना चाहते हैं।

पहला लक्ष्य है ईरान को अलक़ायदा और आतंकवाद से जोड़ना ताकि ईरान के ख़िलाफ़ इस्राईल या अमरीका के संभावित हमलों का तर्क पेश किया जाए। हमने अब से पहले कभी नहीं सुना कि अब्दुल्लाह अहमद अब्दुल्लाह अलक़ायदा का सरग़ना नंबर 2 है और वह तेहरान में है। अलक़ायदा के प्रमुख एमन अलज़वाहेरी की ओर से इस बारे में कोई बयान नहीं आया है।

दूसरा लक्ष्य इस्राईली ख़ुफ़िया एजेंसी मोसाद को एक बड़ी इंटैलीजेन्स ताक़त के रूप में प्रचारित करना है जो कहीं भी सेंध लगाने में सक्षम है वरना यह बात किसको नहीं मालूम है कि अफ़ग़ानिस्तान पर अमरीका के हमले के बाद अलक़ायदा के सरग़नाओं ने बड़ी संख्या में ईरान में शरण ली थी और ईरान ने उन्हें संबंधित देशों के हवाले कर दिया था। ओसामा बिन लादेन की एक बेटी ने तो सऊदी दूतावास से संपर्क किया था जिसके बाद उसे रियाज़ भिजवा दिया गया था।

तीसरा लक्ष्य इराक़, अफ़ग़ानिस्तान और सीरिया से अमरीकी सैनिकों की वापसी के लिए बहाना ढूंढना है। इस एलान से अमरीका यह संदेश देना चाहता है कि अलक़ायदा का अब अंत हो चुका है इसलिए अमरीकी सैनिकों की वापसी का समय भी आ गया है।

पश्चिमी देशों के टीकाकारों की बड़ी संख्या यह कह रही है कि ट्रम्प वाइट हाउस से आसानी से नहीं निकलेंगे वह जाते जाते कोई बड़ा क़दम ज़रूर उठाने की कोशिश करेंगे।

अमरीकी सैनिकों को इन देशों से बाहर निकालने का मतलब यह है कि अमरीका ने अपनी हार स्वीकार कर ली है और हस्तक्षेप की रणनीति से तौबा करना चाहता है जिसके चलते उसके 6 ट्रिलियन डालर स्वाहा हो गए। इसका यह भी मतलब है कि अमरीका अब इस इलाक़े में अपने घटकों यानी इस्राईल, अरब देशों और कुर्दों को उनके हाल पर छोड़ देना चाहता है।

अमरीकी सैनिकों के निकल जाने के बाद यह इलाक़ा अधिक शांत और सुरक्षित होगा क्योंकि फिर इस इलाक़े की ज़िम्मेदारी स्थानीय ताक़तें संभालेंगी। अमरीकी सेनाओं ने हमेशा अस्थिरता फैलाने, उसे बांटने और संसाधनों को लूटने की कोशिश की है। उन्होंने कभी लोकतंत्र और विकास लाने की कोशिश नहीं की बल्कि अपने पिट्ठू तत्वों को सत्ता दिलाने की योजना पर काम किया है।

ट्रम्प ने अगर जाते जाते कोई मूर्खता भरा क़दम उठाया तो उनको करारा जवाब मिलेगा इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए।

अब्दुल बारी अतवान

अरब जगत के विख्यात लेखक व टीकाकार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *