धर्म

नमाज़ में रफ़ादैन का मामला क्या है, जानिये!

Zia Imtiyaz
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सवाल- नमाज़ में रफ़ादैन के बारे में क़ुरआन में कोई गाइडलाइन नही है, हदीस में इस बारे में काफ़ी अलग अलग बातें मिलती हैं, तो नमाज़ पढ़ने का सही तरीक़ा कौन सा माना जाना चाहिए ??

जवाब : नमाज़ में पहले रफ़ादैन (तकबीर ए ऊला के वक्त हाथ कन्धों तक उठाकर नमाज़ में दाख़िल होना) के अलावा बाक़ी वक्तों के रफ़ादैन भी सही अहादीस से साबित हैं, तो अगर कोई ये रफ़ादैन करे तो बेहतर ही है…!!!

हालांकि जिस तरह से हिन्द पाक में नमाज़ अदा की जाती है तरीक़ा ये भी गलत नहीं है…. ये भी नबी सल्ल० की ही सिखाई हुई नमाज़ का तरीक़ा है, ….

…. अहादीस से साबित है कि कभी नबी सल्ल० ने सिर्फ़ पहले रफ़ादैन ही किये और बाक़ी नही, और कभी नमाज़ में बाद वाले रफ़ादैन भी किये….
हदीस की सबसे पहली किताब मलिक मुवत्ता अगर हम पढ़ते हैं तो मालूम चलता है कि इमाम मलिक रह० ने रफ़ादैन पर जो अहादीस जमा कीं उनमें रफ़ादैन के एक से ज़्यादा तरीक़े मालूम चलते हैं, किताब-3, हदीस-3/5/17 में है, हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने उमर रज़ि० से रिवायत है कि नबी सल्ल० रुकू के बाद हाथ उतने ही ऊपर, यानी कन्धों तक उठाते थे जितने नमाज़ शुरू करने में, और सुजूद में हाथ नही उठाते थे, जबकि दूसरी हदीस यानी किताब-3, हदीस-3/5/21 में है कि ख़ुद अब्दुल्लाह इब्ने उमर रज़ि० रुकू के बाद उठने पर अपने हाथ तकबीरे ऊला के मुकाबले कम उठाते थे,

…. एक ही सहाबी से रफ़ादैन के ये दोनों तरीके साबित होने का मतलब ये निकलता है कि पहले रफ़ादैन के अलावा बाक़ी रफ़ादैन पर नबी सल्ल० ने उन्हें कोई स्ट्रिक्ट रूल नही दिया था, बल्कि इसे ख़ुद नबी सल्ल० ने कभी किसी तरीके से किया और कभी किसी तरीक़े से, जो अलग अलग तरीक़े सहाबा ने देखे और अहादीस में रिवायत किये

… अबू दाऊद शरीफ़ में ये रिवायत मिलती है कि अब्दुल्लाह इब्ने मसऊद रज़ि० ने एक दफ़ा लोगों से कहा कि क्या मैं तुम्हे नबी सल्ल० के तरीके की नमाज़ पढ़ाऊँ?” फिर उन्होंने जो नमाज़ पढ़ाई उसमें उन्होंने तकबीर ए ऊला के बाद कहीं रफ़ादैन नही किया….

…. इसी तरह की बहुत सारी रिवायात हैं… अफसोस कि इन दो क़िस्म की रिवायात को लेकर लोगों ने दो धड़े बना लिए हैं कि नमाज़ में बाद के रफ़ादैन करने वालों की नमाज़ सही है, या न करने वालों की…!! जबकि ये झगड़ने और धड़ों में बंटने का मामला ही नहीं है

अलग अलग अहादीस में नबी सल्ल० के हवाले से रफादैन के अलग अलग तरीकों से ये साबित हुआ कि पहला रफ़ादैन तो नबी सल्ल० की हर हदीस में एक सा मिलता है, यानी ये सबसे ज़रूरी है, और पहले रफ़ादैन के अलावा बाक़ी रफ़ादैन इख्तियारी हैं, क्योंकि इन्हें नबी सल्ल० ने हमेशा नही, बल्कि कभी किया और कभी नहीं किया है…..

….. तो ये इख़्तियारी अमल कोई करे, बहुत बेहतर….!! और कोई न करे तब भी उसकी नमाज़ बेहतर ढंग से हो जाएगी…

… ज़रूरत इस बात की है कि रफ़ादैन न करने वाले रफादैन करने वालों की नमाज़ को कुबूलें, और अपनी मस्जिदों में ऐसे तरीके से नमाज़ पढ़ने वालों को आराम से नमाज़ पढ़ने देने की आदत डालें,

…ठीक यही सुलूक रफ़ादैन करने वाले लोग अपनी मस्जिदों में रफ़ादैन न करने वालों के लिए रखें…. क्योंकि उम्मत में मेल और इत्तिहाद बनाने की बड़ी ज़िम्मेदारी हर एक मुसलमान पर है, सिर्फ़ एक फरीक पर नही !!

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