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बांग्लादेश से तुर्की की दोस्ती और भारत

बांग्लादेश यानी भारत का एक बेहद करीब पड़ोसी. एक ऐसा मुल्क जिसकी 90 फीसद जमीनी सरहदें भारत से सटी है. मगर पाकिस्तान के खास हिमायती आर टी एर्डोगन की अगुवाई वाली तुर्की की सरकार इन दिनों बांग्लादेश के साथ पींगे बढ़ाने पर खास जोर दे रही है. ढाका को लुभाने के इस एर्डोगन प्लान में मोटे निवेश से लेकर हथियार सौदों तक कई तोहफे शामिल हैं.


चंद रोज पहले ढाका पहुंचे तुर्की के विदेश मंत्री मेवलुत चवुशोवलो ने दोस्ती बढ़ाने की जुगत में कई नए प्रस्तावों का पिटारा खोला. इसमें बांग्लादेश के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी हस्तातंरण और साझा सैन्य उत्पादन की पेशकश भी शामिल थी. बांग्लादेश के विदेश मंत्री एके मोमिन के साथ गत बुधवार हुई वार्ता के बाद मेवलुत ने कहा कि तुर्की अपने मित्र मुल्क बांग्लादेश के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाना चाहता है. इसके लिए हम बांग्लादेश को सैन्य तकनीक के हस्तांतरण और उसके साथ मिलकर रक्षा उत्पादन करने पर भी तैयार हैं.

बांग्लादेशी मीडिया में सरकारी अधिकारियों के हवाले से प्रकाशित खबरों के मुताबिक दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच बीते सप्ताह हुई बातचीत के तय एजेंडा में रक्षा सहयोग जैसा मुद्दा शामिल नहीं था. बल्कि व्यापार-कारोबार पर ही बातचीत होनी थी. मगर चर्चा के दौरान रक्षा सहयोग का मुद्दा तुर्की की तरफ से ही उठाया गया. महत्वपूर्ण है कि तुर्की बीते कुछ समय से अपने मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली हिसार-ओ मिसाइल प्रणाली बांग्लादेश को बेचने में जुटा है. बीते दिनों तुर्की के रक्षा प्रदर्शनी प्रमुख हकान कुर्त ने बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान को तुर्की के सैन्य उत्पादों के लिए हॉट मार्केट करार देते हुए अगले दस सालों में 5 अरब डॉलर के डिफेन्स एयरोस्पेस उपकरणों.


गौरतलब है कि तुर्की की एर्डोगन सरकार इस्लामिक देशों के भीतर अपने पैठ मजबूत करने में जुटी है. इस कड़ी में ही बांग्लादेश को लुभाने के लिए तुर्की ने जहां ढाका में अपना नया दूतावास खोला. बल्कि न्यूयॉर्क में तुर्की दूतावास में बांग्लादेश को भी जगह देने का ऐलान किया है. ढाका में नए दूतावास भवन का उद्घाटन करने के बाद विदेश मंत्री मेवलुत ने कहा कि न्यूयॉर्क में जगह साझा करने का फैसला दोनों देशों के बीच भाईचारे का नमूना है.

रणीतिक मामलों के जानकार अवीक सेन के मुताबिक तुर्की का यह पैंतरा काफी रोचक है. क्योंकि कई सालों तक तुर्की ने बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी जैसे संगठनों की पैरोकारी करता रहा. साथ ही बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान भी तुर्की ने पाकिस्तान का ही साथ दिया था. मगर अब तुर्की अपने रिश्ते बांग्लादेश के साथ सुधारने में जुटा है क्योंकि राष्ट्रपति एर्डोगन इस्लामिक देशों की बिरादरी में नेता बनना चाहते हैं. इसके लिए उन्हें बांग्लादेश के समर्थन की ज़रूरत है.

इस बीच तुर्की के राष्ट्रपति आर टी एर्डोगन के बांग्लादेश दौरे को लेकर भी तैयारियां चल रही हैं. तुर्की का राजनयिक खेमा इस कवायद में लगा है कि 26 मार्च को बांग्लादेश के स्वर्ण जयंति स्वतंत्रता समारोह में एर्डोगन भी शरीक हों.

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