दुनिया

यमन युद्ध में अमरीका के ख़ूनी क़िरदार के इन्कार की वजह : रिपोर्ट

अमरीका, यमन युद्ध में अपनी भूमिका का इन्कार करके यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि यमन में सऊदी गठजोड़ की निरंतर हार में वह सहभागी नहीं है ताकि इस तरह से उसके सुपर पावर होने का भरम बना रहे।

अमरीका के समाचारिक हल्क़ों का दावा है कि अमरीका न तो यमन के विवाद में शामिल है और न ही उसे इसमें शामिल होना चाहिए। नेश्नल इंटरेस्ट पत्रिका ने अपनी वेबसाइट पर एक लेख प्रकाशित किया है जिसका शीर्षक हैः “अमरीका को यमन के विवाद में क्यों शामिल नहीं होना चाहिए?” इस लेख में पत्रिका ने सांकेतिक रूप से यह दिखाने की कोशिश की है कि अमरीका, यमन के विवाद में शामिल नहीं है। यह ऐसी स्थिति में है कि अमरीका ने सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठजोड़ का सामरिक समर्थन करके, सैन्य परामर्श देकर और यमनी जनता की आर्थिक घेराबंदी करके सीधे सीधे यमन युद्ध में भूमिका निभाई है।

नेश्नल इंटरेस्ट ने लिखा है कि अमरीका के वर्तमान राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प जल्द ही वाइट हाउस से निकल जाएंगे लेकिन पिछले चार बरस की उनकी बिखराव वाली विदेश नीति जारी रहेगी। इस रिपोर्ट के मुताबिक़ अब जो बाइडन पर विश्व का भरोसा और विश्वास दोबारा हासिल करने की भारी और कठिन ज़िम्मेदारी है। पिछले हफ़्तों में अमरीका के वर्तमान राष्ट्रपति देश के बाहर अपनी विरासत के रूप में छोड़ी जाने वाली नीतियों को अधिक मज़बूत बनाने की कोशिश करते दिखाई दिए जिनमें ईरान के ख़िलाफ़ वाइट हाउस की शत्रुतापूर्ण नीतियां विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। उनकी इन कोशिशों में ईरान के ख़िलाफ़ नई पाबंदियां लगाने का वादा, इस देश के विदेश मंत्रालय के अधिकारियों का गोलान हाइट्स और पश्चिमी तट का दौरा और यूएई को संभावित रूप से 23 अरब डाॅलर मूल्य के हथियारों की बिक्री शामिल है।

अमरीकी विदेश मंत्रालय के एक जानकार सूत्र ने सीनएनए को बताया कि ट्रम्प सरकार की कोशिश है कि जो बाइडन की ओर से अपनी नीतियों को निष्क्रिय बनाने की संभावना को कठिन से कठिन बना दे। नेश्नल इंटरेस्ट का कहना है कि पूरे पश्चिमी एशिया के इलाक़े में चिंगारियां पैदा हो चुकी हैं लेकिन ये यमन की तरह कहीं भी ज्वाला में नहीं बदली हैं। जो बाइडन के लिए, जिन्होंने क़सम खाई है कि वे अमरीका की ओर से यमन युद्ध के समर्थन को ख़त्म कर देंगे, ट्रम्प की ओर से जाते जाते उठाए जाने वाले यह क़दम, समस्याएं पैदा कर देंगे। ट्रम्प, यमन के अंसारुल्लाह जनांदोलन को आतंकी संगठन घोषित करना चाहते हैं लेकिन सवाल यह है कि जब ट्रम्प, अपने से पहली वाली सरकार यानी ओबामा सरकार द्वारा किए गए एक अंतर्राष्ट्रीय समझौते जेसीपीओए से अमरीका को बाहर निकाल सकते हैं तो क्यों बाइडन, ट्रम्प के सत्ताकाल के अंतिम दिनों में उठाए जाने वाले क़दमों की अनदेखी नहीं कर सकते? इसके अलावा यह सवाल भी बहुत अहम है कि जब अमरीका, सऊदी गठबंधन का हर तरह का सैन्य, सामरिक व रणनैतिक समर्थन कर रहा है तो फिर यह दिखाने की कोशिश क्योंक कर रहा है कि यमन के संकट और विवाद में उसका कोई हाथ नहीं है?

क्या अमरीका, यमनी सेना व प्रतिरोधकर्ता बलों के मीज़ाइल व ड्रोन हमलों से घबराया हुआ है? या फिर वह यह ज़ाहिर करने की कोशिश कर रहा है कि यमन के युद्ध में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठजोड़ को जो लगातार हार मिल रही है, उसमें वह भागीदार नहीं है? क्योंकि इससे उसके सुपर पावर होने के अहं पर चोट लग रही है और वह अपनी सुपर पावर की हैसियत को बाक़ी रखना चाहता है। इसी के साथ यह भी संभव है कि अमरीका, यमन में सऊदी गठजोड़ द्वारा किए जाने वाले जघन्य अपराधों से अपनी आपको बरी कराना चाहता है। यमन युद्ध में अपने रोल से अमरीका के इन्कार की एक बड़ी वजह यह हो सकती है कि वाइट हाउस, वियेतनाम से हार के कटु स्वाद को एक बार फिर नहीं चखना चाहता।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *