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लद्दाख़ में हज़ारों वर्ग किमी भारत की ज़मीन पर कब्ज़ा करने के बाद #चीन की नज़र अरुणांचल प्रदेश पर, डोकलाम में दर्ज़नों शिविर बनाये!

2017 से ही चीन डोकलाम में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर सैन्य ताकत बढ़ाने में लगा हुआ है। डोकलाम संकट के बाद से चीन ने लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक एलएसी के पास गहराई वाले इलाकों में सैन्य शिविर बना लिए हैं। सूत्रों से मंगलवार को यह जानकारी मिली।

लद्दाख के इलाके में हज़ारों वर्ग किलोमीटर एरिया पर चीन पहले से ही कब्ज़ा कर के भारत के ज़मीन पर पुख्ता बैरिक, बंकर बना कर बैठा हुआ है, लद्दाख की सीमा पर मार्च से ही तनातनी जारी है, चीन भारत के 20 सैनिकों की भी हत्या कर चुका है, चीन को लेकर भारत की सरकार का रवैया बेहद ख़राब है, सरकार बताना ही नहीं चाहती है कि सीमा की असल क्या इस्थिति है, प्रधानमंत्री से लेकर गृहमंत्री, रक्षा मंत्री सबके बयान अलग अलग होते हैं, इन हालात में भारत की सरहदों पर मंदरने वाला खतरा बहुत बड़ा है

भारत और चीन की सेनाओं के बीच अप्रैल-मई से ही एलएसी पर तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। इस कड़ाके की सर्दी में भी 18 हजार फीट की ऊंचाई पर लद्दाख के रेतीले पहाड़ों पर दोनों सेनाएं आमने-सामने डटी हुई हैं। 2017 में डोकलाम विवाद के बाद से ही चीन ने किसी भी स्थिति से निपटने की तैयारी शुरू कर दी थी। 

स्थानीय नागरिकों ने देखे चीनी शिविर
एक सरकारी सूत्र ने बताया कि चीन डोकलाम विवाद के बाद से ही एलएसी के साथ अपने निचले क्षेत्रों में सैन्य शिविर बनाने में जुटा है। एलएसी के आसपास स्थानीय नागरिकों ने ऐसे 20 से अधिक शिविर देखे हैं। इन शिविरों को बना लेने से चीनी सेना को ये फायदा हुआ है कि वह अपने क्षेत्र में ज्यादा बेहतर तरीके से गश्त कर सकती है। साथ ही सीमा पर तनाव की स्थिति में चीनी सेना को मूवमेंट में भी आसानी रहेगी।

डोकलाम में इस कारण से आमने-सामने थीं सेनाएं
भारत ने 2017 में भूटान के क्षेत्र में चीनी सेना के निर्माण कार्य को दिया था, इसके बाद डोकलाम में भारत और चीन की सेनाएं आमने-सामने आ गईं थीं। इस निर्माण के चलते चीन भारत के उस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हिस्से के बेहद पास आ जाता, जिसे चिकन नेक कहा जाता है। चिकन नेक वह हिस्सा है, जो भारत के मुख्य हिस्से और उत्तर पूर्वी क्षेत्र को आपस में जोड़ता है। इस हिस्से पर अगर चीन नियंत्रण कर ले तो भारत के लिए उत्तर पूर्व से जमीनी संपर्क टूट जाएगा।

krishna raghava INC
@krishnaraghava4
Dec 7
डोकलाम और बोमला के नज़दीक चीन ने झुरमुट की तरह कई घर कैसे बसा लिए, क्या वहां हमारी फौज नहीं थी? थी, लेकिन मोदी का फरमान नहीं था। मोदी ने फौज से कह दिया, बनने दो, चुपचाप आंखें फेर लो। ये है मोदी का कैरेक्टर!

SUNIL HINDUSTANI
@SUNILHINDUSTAN3
Dec 7
नालायकों दिल्ली बार्डर पर BSF लगाकर ड्रोन से निगरानी कर रहे हो ,
इतनी निगरानी डोकलाम में करते तो चीन बार्डर पर गांव नहीं बसा पाता

नीरज पंत
@NeerajP59998612
·Nov 30
@narendramodi
मा0प्रधानमंत्रीजी डोकलाम में चीन से आमने-सामने के बाद भी वह कुटिल चाल में लगा रहा.सेटेलाइट मैपिंग से खबर आई है उसने भूटान सीमा पर अंदर 2 किलोमीटर घुसकर पूरा गांव बसा दिया है और भारत+भूटान पर नजर है यह दक्षिण चीन सागर की तर्ज पर वार्ता के बजाए सीधे कब्जा की नीति है

Naval Kishore
@NavalKishore01
·Dec 7
फेंकू के कबूतर “अखंड भारत” का लॉलीपॉप दिखा रहे हैं और चीन इनका अब्बा बनकर डोकलाम हार्मोनियम बजा रहा है…!
देश को ले डूबा चौकिदार Guard
#जयजवान_जयकिसान

Sunny Jagtap
@SamadhanJagta16
·Dec 3
किसानों के साथ मिटिंग पर मिटिंग, चाइना के साथ डोकलाम पर एक साल से मिटिंग पर मिटिंग, कोई हाल निकाला नहीं ,
हे मोदी सरकार नहीं देश को बर्बाद करने वाले RSS और अंबानी अडानी ग्रुप के दलाल है।

Surendra Pathak
@pathak_reportar
·Dec 6
चीन ने डोकलाम में गावों के निर्माण के बाद अब अरुणाचल प्रदेश में भी तीन गावों का निर्माण किया, जो कि पश्चिम में भारत, चीन और भूटान के बीच त्रिकोणीय जंक्शन के करीब स्थित है..

Tavish
@Tavish52628981
Dec 2
जैसे नोटबन्दी पर भरोसा किया था बिल्कुल वैसा ही।
बहुत हुआ नारी पर अत्त्याचार
अबकी बार ….. हाथरस।
देश सुरक्षित हाथो में है। डोकलाम और गोलवान।
अच्छे दिन आने वाले है। बक़र्बाद बैंक विकते सरकारी उपक्रम -23% GDP और बेरोजगारी।
भरोसा पूरा है

santosh gupta
@BhootSantosh
खबर है~
चीन 6 नवंबर को कोर कमांडरों की बैठक में हुए समझौते से पलट गया है.! उसने नई शर्त रखी है, कि भारतीय सेना पहले त्यो-चुशूल के पहाड़ों से पीछे हटे.. तभी वो अपनी सेना पीछे हटाएगा.!

मोदीजी को राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद़्दे पर गंभीर होना चाहिए.. ना कि बनारस जाकर तबला बजाना चाहिए.!

ANI_HindiNews
@AHindinews
बार-बार भारत की जनता हमको आशीर्वाद दे रही है। अभी-अभी बिहार के चुनाव हुए हालांकि हम बिहार का चुनाव मिलजुलकर लड़े लेकिन सबसे ज्यादा स्ट्राइक रेट 67% बिहार में भाजपा को मिला । 110 सीटों में 74 सीटें हमनें जीती 19.5 प्रतिशत वोट हमें मिला।: उत्तराखंड में भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष

ANI_HindiNews
@AHindinews

आपको मालुम है कि बॉर्डर पर हंगामा क्यों है, मुसीबत क्यों है, दिक्कत क्यों है क्योंकि मोदी जी ने पिछले पांच सालों में 4500 कि.मी. की फोरलेन रोड अरुणाचल प्रदेश से लेकर लद्दाख तक बनवा दी है: उत्तराखंड में भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा

Jagdish Mishra
@jmishra65
एक्स्क्लूसिव: सैटेलाइट इमेज से खुलासा- डोकलाम में चीन ने गांव बसाने के साथ 9KM लंबी सड़क भी बनाई – NDTV

Manish Jagan Agrawal (मनीष जगन अग्रवाल)
@manishjagan
Dec 7
चीन ने अरुणांचल प्रदेश के डोकलाम से लगे बॉर्डर एरिया में LAC पर पूरा एक गांव बसा लिया है और सेना के बंकर बना लिए हैं,

56 इंच का दावा करने वाली भाजपा सरकार की जुबान नहीं खुल रही,

देश आज भी मोदी जी के उस वायदे को याद कर रहा है जिसमें उन्होंने चीन को लाल आंख दिखाने की बात कही थी

डोकलाम में चीन ने गांव बसाने के साथ 9KM लंबी सड़क भी बनाई

डोकलाम पठार की पूर्वी परिधि पर चीनी सड़क और गाँव के निर्माण के स्पष्ट प्रमाण गुरुवार को तब सामने आए जब चीन के राज्य प्रायोजित मीडिया CGTN के सीनियर प्रोड्यूसर शेन शिवेई ने एक नदी के किनारे बसाए गए गाँवों के एक साथ कई चित्र दिखाए.

Reported by विष्णु सोम
Edited by प्रमोद कुमार प्रवीण

डोकलाम में भूटान सीमा से 2.5 किमी की दूरी पर स्थित पंगड़ा गांव, जहां 8 दिसंबर 2019 और 28 अक्टूबर, 2020 को निर्माण गतिविधियों के स्पष्ट सबूत मिले.

एनडीटीवी ने उस हाई रिजॉल्यूशन सैटेलाइट इमेजरी (Satelite Imagery) का विश्लेषण किया है, जिसमें भारत से सटे भूटान की सीमाक्षेत्र में चीनी निर्माण के सबूत छिपे हैं. सैटेलाइट इमेजरी की एनालिसिस से साफ पता चलता है कि चीन ने डोकलाम पठार (Doklam Plateau) के पूर्वी हिस्से पर भूटानी क्षेत्र के भीतर 2 किलोमीटर की दूरी पर न केवल गांव बसाया है बल्कि चीन ने भारतीय सीमा क्षेत्र तक पहुंच रखने वाली 9 किनोमीटर लंबी सड़क भी बनाई है.

यह समझा जाता है कि यह सड़क चीनी सेना को जम्पेलरी रिज (Zompelri ridge) तक पहुंचने में वैकल्पिक रास्ता दे सकती है, जिसे भारतीय सेना ने 2017 में चीनी सेना के साथ डोकलाम में हुई झड़प के बाद रोक दिया था. तब

चीनी निर्माण श्रमिकों ने डोका ला में भारतीय सेना की चौकी के पास अपने मौजूदा ट्रैक को बढ़ाकर जम्प्लेरी रिज तक पहुंचने की कोशिश की थी लेकिन भारतीय सैनिकों ने उसके मंसूबों को नाकाम कर दिया था. भारतीय सैनिकों ने सीमा पार कर चीनी बुल्डोजर्स को आगे बढ़ने से रोक दिया था. यह इलाका सिक्किम की सीमा और डोकलाम के बीच पड़ता है.

तीन साल बाद, अब अलग-अलग धुरी पर काम करने वाले चीनी निर्माण श्रमिकों ने टोरसा नदी के किनारे एक नई सड़क का निर्माण किया है, जो चीन और भूटान के बीच की सीमा से सटे दक्षिण की ओर फैली हुई है. यह साल 2017 में भारत-चीन के बीच हुए डोकलाम गतिरोध के बिन्दु से 10 किलोमीटर दूर है. यह गतिरोध तब दो महीने से ज्यादा लंबा चला था और इसका पटाक्षेप तब हुआ था, जब अप्रैल 2018 में पीएम नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की वुहान में मुलाकात हुई थी. तब दोनों नेताओं ने डोकलाम में तनाव कम करने पर सहमति जताई थी.

रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ, डॉ. ब्रह्म चेलानी कहते हैं, “चीनी सैनिकों ने 2017 के गतिरोध स्थल को भले ही अछूता छोड़ दिया है, जो डोकलाम के एक कोने में स्थित है, लेकिन धीरे-धीरे चीन ने डोकलाम के बाकी क्षेत्र में यथास्थिति के हालात में बदलाव किया है. उनलोगों ने डोकलाम में बिल्डिंग और रोड जैसे स्थाई निर्माण किए हैं. यहां तक कि पठार पर एक गांव बसा दिया है जो तीन साल पहले अस्तित्व में नहीं था.”

डोकलाम पठार की पूर्वी परिधि पर चीनी सड़क और गाँव के निर्माण के स्पष्ट प्रमाण गुरुवार को तब सामने आए जब चीन के राज्य प्रायोजित मीडिया CGTN के सीनियर प्रोड्यूसर शेन शिवेई ने एक नदी के किनारे बसाए गए गाँवों के एक साथ कई चित्र दिखाए. उन्होंने ट्वीट किया था, ”अब, हमारे पास स्थायी रूप से नवस्थापित पंगड़ा गांव में रहने वाले लोग हैं. यह एक घाटी में है जो यादोंग देश के 35 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है. यहां स्थान दिखाने के लिए एक मानचित्र भी है.”

अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनी ‘मैक्सर’ द्वारा व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए तैयार की गई सैटेलाइट इमेजरी से स्पष्ट हुआ है कि इसी साल डोकलाम क्षेत्र में ये निर्माण गतिविधियां हुई हैं, जो टोरसा नदी घाटी क्षेत्र में व्यापक सड़क-निर्माण / निर्माण गतिविधि के साथ-साथ डोकलाम क्षेत्र के पास चीन में निर्मित होने वाले नए सैन्य भंडारण बंकरों “के रूप में हुई है.

भारत-चीन के बीच सीमा विवाद लगातार जारी है (India China Border Tension). लेकिन इसी बीच खबर आ रही है कि चालबाज ड्रैगन इस गतिरोध के लिए पहले से तैयारियां कर रहा था. ऐसा लगता है कि चीन 2017 की वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारत के साथ चल रहे संघर्ष जैसी स्थितियों के लिए अपनी तैयारी को बढ़ा रहा था. क्योंकि 2017 के डोकलाम संकट (Doklam) के बाद उन्होंने लद्दाख (Ladakh) से लेकर अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) की सीमा पर अपने गहराई वाले क्षेत्रों में कई सैन्य शिविर विकसित किए हैं.

पब्लिक लिबरेशन आर्मी (चीनी सेना) और भारतीय सैनिक अप्रैल-मई के बाद से LAC पर गतिरोध की स्थिति में हैं. स्थिति यहां तक खराब हो गई है कि अब लद्दाख के ठंडे इलाके में दोनों देशों की सेनाएं 18,000 फीट की ऊंचाई पर बैठी हैं.

सरकारी सूत्रों ने न्यूज एजेंसी ANI को बताया, “चीन एलएसी के साथ-साथ अपने गहराई वाले क्षेत्रों में सैन्य शिविर विकसित कर रहे हैं. कुछ आम नागरिकों ने ऐसे लगभग 20 शिविर देखे हैं.” उन्होंने कहा कि इस तरह के शिविर चीनी सेना (Chinese Military Camp) को एलएसी पर बेहतर ढंग से गश्त करने के साथ-साथ सीमावर्ती क्षेत्रों को विकसित कर सकते हैं, जिससे उन्हें जल्दी प्रतिक्रिया देने में फायदा होगा.

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