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अमरीका ने लिया पेरिस जलवायु में वापसी फ़ैसला

अमरीकी सरकार ने पेरिस जलवायु समझौते में वापसी की आधिकारिक घोषणा कर दी है।

फ़ार्स न्यूज़ एजेन्सी की रिपोर्ट के अनुसार ट्रम्प प्रशासन ने पेरिस जलवायु समझौते की आलोचना करते हुए इस समझौते से निकलने का फ़ैसला किया था।

अमरीका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने अपने पहले आदेश में 20 जनवरी को ही पेरिस समझौते में वापसी के मामले पर हस्ताक्षर कर दिए थे लेकिन आधिकारिक रूप से 30 दिन बाद इसमें वापसी का एलान किया है।

जलवायु के मामले में अमरीका के विशेष दूत जान कैरी ने शुक्रवार को आधिकारिक रूप से एलान किया कि पेरिस जलवायु समझौते में अमरीका की दोबारी वापसी के बावजूद इसमें अभी बहुत कुछ करने की ज़रूरत है।

ओबामा प्रशासन में विदेशमंत्री के रूप में काम कर चुके जान कैरी का कहना था कि हम जानते हैं कि पेरिस समझौते को लागू करना ही काफ़ी नहीं है और अगर सभी देश इसे लागू करते हैं तब भी हम धरती के गर्म होने के साक्षी हैं।

याद रहे कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने पिछले साल जून में अमरीका को पेरिस जलवायु समझौते से बाहर निकाल लिया था। उस समय ट्रम्प ने कहा था कि वे चाहते हैं कि जलवायु परिवर्तन को लेकर पेरिस समझौते में अमरीकी हितों के लिए एक उचित समझौता हो। बुधवार को अमरीका औपचारिक रूप से इस समझौते से बाहर निकल गया है।

अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और यूरोपीय संघ ने पेरिस जलवायु समझौते से अमरीका को निकालने के ट्रम्प के फ़ैसले की निन्दा की थी। ब्रिटेन, फ़्रान्स, इटली और चिली ने एक बयान जारी करके पेरिस समझौते से अमरीका के निकलने पर खेद प्रकट किया है। इन देशों ने कहा है कि धरती के गर्म होने की प्रक्रिया को रोकने के लिए पेरिस समझौते को पूरी तरह से लागू किया जाना ज़रूरी है।

पेरिस जलवायु समझौता पर्यावरण संबंधी एक महत्वपूर्ण समझौता है जिसे जलवायु परिवर्तन और उसके नकारात्मक प्रभावों से निपटने के लिये 2015 में दुनिया के लगभग सभी देशों ने स्वीकार किया था।

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