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आसमान में गूंजा अल्लाहो अकबर का नारा : यमन की जंग के मैदान से अहम् ख़बरें : वीडियो

यमन युद्ध समाप्त करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर गतिविधियां, मैदान में जारी है भीषण लड़ाई, हूती संगठन को आतंकियों की सूची से निकालने का व्यापक स्वागत

संयुक्त राष्ट्र संघ ने अंसारुल्लाह या हूती संगठन का नाम आतंकी संगठनों की सूचि से निकालने के अमरीका के फ़ैसले का स्वागत किया है। इस बीच अमरीका के विशेष दूत ने यमन युद्ध रुकवाने के लिए अपनी गतिविधियां तेज़ कर दी हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ ने कहा कि अंसारुल्लाह को आतंकी संगठनों की सूचि से बाहर निकालने के फ़ैसले से यमन संकट के शांतिपूर्ण समाधान में मदद मिलेगी।

अमरीका के विदेश मंत्री ने हाल ही में कहा है कि अंसारुल्लाह को मंगलवार के दिन आतंकी संगठनों की सूचि से बाहर निकाल दिया जाएगा जबकि संगठन के कुछ नेताओं पर प्रतिबंध लगे रहेंगे।

ब्लिंकन ने कहा कि यमन संकट के समाधान के लिए सभी पक्षों को सहयोग करने की ज़रूरत है क्योंकि इस त्रास्दी को केवल इसी एक रास्ते से हल किया जा सकता है।

पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने सत्ता से बाहर जाते जाते अंसारुल्लाह आंदोलन का नाम आतंकी संगठनों की सूचि में शामिल कर दिया था।

अंसारुल्लाह के वरिष्ठ नेता मुहम्मद अली अलहूती ने अमरीका के नए निर्णय को सार्थक बताया है। उन्होंने ट्वीट किया है कि हमें इंतेज़ार है कि अमरीका यमन का युद्ध और नाकाबंदी जारी रखने की अपनी दुष्ट नीति में कब बदलाव करता है।

अमरीकी विदेश मंत्रालय का कहना है कि यमन के मामले में अमरीका के विशेष दूत तिमोथी लिंडर किंग ने सऊदी अरब और यमन के अधिकारियों से मुलाक़ातें की हैं।

यमन के पटल पर यमनी सेना और अंसारुल्लाह के ख़िलाफ़ सऊदी अरब की सेना और किराए के सैनिकों के हमले भी भीषण रूप से जारी हैं।

इस समय लड़ाई का केंन्द्र मारिब प्रांत है। इस बीच सऊदी एलायंस के हमलों के जवाब में यमन की सेना और स्वयं सेवी फ़ोर्स के मिसाइल और ड्रोन हमले सऊदी अरब के भीतर अपने लक्ष्यों को ध्वस्त कर रहे हैं।


हथियारों की सप्लाई को रोके बिना यमन युद्ध को रोकना असंभवः मानवाधिकार संगठन

विश्व के 99 मानवाधिकार संगठनों ने अमरीका, ब्रिटेन, फ़्रांस और कुछ अन्य देशों द्वारा सऊदी अरब तथा यूएई को हथियारों को बिक्री को रुकवाने की मांग की हैं

संसार के 99 मानवाधिकार संगठनों ने एक संयुक्त बयान जारी करके यमन युद्ध के जारी रहने की कड़ी निंदा की। इन मानवाधिकार संगठनों ने मांग की है कि सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात को हथियार बेचने पर प्रतिबंध लगना चाहिए। बयान के अनुसार हथियारों की सप्लाई को रोके बिना यमन युद्ध को रोकना संभव ही नहीं है।

इन मानवाधिकार संगठनों ने शुक्रवार को एक संयुक्त बयान जारी किया है। इस बयान में कहा गया है कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद यमन का छह वर्षीय युद्ध, सबसे ख़तरनाक युद्ध साबित हुआ है। यमन युद्ध में जहां बहुत बड़ी संख्या में आम लोग हताहत और घायल हुए हैं वहीं पर इस युद्ध के कारण यमन का आधारभूत ढांचा पूरी तरह से नष्ट हो चुका है।

मानवाधिकार संगठनों के बयान के अनुसार यमन युद्ध और इस देश के लंबे समय से परिवेष्टन के कारण इस देश की 80 प्रतिशत से अधिक जनता को इस समय खाद्ध संकट का सामना है। वर्तमान समय में यमन में खाने-पीने की वस्तुओं के अतिरिक्त दवाओं की बहुत कमी है।

मानवाधिकार संगठनों ने अपने संयुक्त बयान में यमन के परिवेष्टन के तत्काल समाप्त किये जाने की मांग के साथ ही सनआ हवाई अड्डे और अलहुदैदा बंदरगाहों के खोले जाने की भी मांग की है। उनका कहना है कि अमरीका, ब्रिटेन, फ़्रांस और कुछ अन्य देशों द्वारा सऊदी अरब तथा यूएई को हथियारों को बिक्री को रुकवाया जाए। बयान में यह भी कहा गया है कि यमन संकट का समाधान युद्ध में नहीं बल्कि वार्ता में निहित है।

उल्लेखनीय है कि सऊदी अरब ने अमरीका, यूएई और कई अन्य देशों के समर्थन से मार्च 2015 से यमन के विरुद्ध युद्ध आरंभ कर रखा है जिसमें यमन में व्यापक स्तर पर विनाश हुआ है।


अमरीका को चाहिए कि यमन में युद्ध विराम के लिए व्यवहारिक क़दम उठाए

यमन के प्रधान मंत्री के सलाहकार का कहना है कि यमन में युद्ध विराम के लिए व्यवहारिक क़दम उठाए जाने की ज़रूरत है।

शनिवार की सुबह हमीद अब्दुल क़ादिर अन्तर ने इर्ना से बात करते हुए कहा कि यमन में युद्ध की समाप्ति अमरीकियों के भाषण से नहीं होगी, बल्कि इसके लिए गंभीर और व्यवहारिक क़दम उठाने की ज़रूरत है।

उन्होंने कहा कि अगर अमरीका यमन में युद्ध विराम के लिए गंभीर है तो उसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव पारित करवाना चाहिए और यमन का ज़मीनी, हवाई और समुद्री परिवेष्टन समाप्त करवाना चाहिए।

अंतर का कहना था कि अमरीका को यमनी लोगों के नरंसाह में अपनी भागीदारी को समाप्त करना चाहिए और सऊदी अरब को एक हमलावर देश के रूप में दुनिया के सामने पेश करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हमलावर देशों को यमनी लोगों को मुआवज़ा देना होगा और उन्हें उनके युद्ध अपराधों के लिए कहटरे में खड़ा किया जाएगा।

अंतर का कहना था कि 6 साल बाद भी हमलावर सैन्य गठबंधन अपना कोई लक्ष्य प्राप्त नहीं कर सका है और अगर यह युद्ध जारी रहा तो इसकी चिंगारी पूरे इलाक़े को अपनी चपेट में ले सकती है


आसमान में गूंजा अल्लाहो अकबर का नारा

सऊदी अरब ने ग़रीब देश यमन के ख़िलाफ़ जंग का बिगुल तो बजा दिया और यह सोच रहा था कि यह ग़रीब लोग हमारे आधुनिक युद्धक विमानों, मीज़ाइलों, बमों, टैंकों और ड्रोन विमानों के आगे कितनी देर टिक पाएंगे लेकिन इतिहास कुछ और ही सोच रहा था, इतिहास ने करवट ली और देखते ही देखते ग़रीब यमनियों ने सऊदी रजवाड़े की ईंट से ईंट बजा दी और महलों में बैठकर यमन की ग़रीब जनता का बुरा हाल देकर हंसने और मज़ाक़ उड़ाने वाले तानाशाह के महल भी यमनियों के मीज़ाइलों और ड्रोन विमानों के हमले से सुरक्षित नहीं रहे।

यमनियों ने सऊदी अरब और इमारात के रजवाड़ों को यह संदेश दे दिया है कि अगर यमनी शांति से नहीं रह पाएंगे तो इमारात और सऊदी अरब के नागरिकों का जीवन भी हम अजीरन कर देंगे और हो भी यही रहा है।

सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो में देखा जा सकता है कि सऊदी अरब का ड्रोन विमान, यमनियों की जासूसी में लगा था कि अचानक उस पर यमनियों का मीज़ाइल क़हर बनकर टूट पड़ा। (


इस्राईल यह नहीं चाहता कि यमन में अलहूसी ग्रुप की जीत हो…

इस्राईली सेना के एक रिटायर्ड जनरल और बैतुल मुक़द्दस थिंकटैंक के उप प्रमुख ने अपने लेख में लिखा है कि जंग में यमनियों की जीत, इस्रईल के लिए एक रणनैतिक ख़तरा हो सकता है और इस्राईल को चाहिए कि वह सऊदी अरब की मदद करे।

फ़ार्स न्यूज़ एजेन्सी की रिपोर्ट के अनुसार इस्राईली सेना के इस रिटायर्ड जनरल ने लिखा कि अमरीका और इस्राईल का हित इसी में है कि सनआ सरकार के सैनिक देश के हर क्षेत्र पर नियंत्रण न कर सकें।

उन्होंने लेख में लिखा कि यमन में मानवता प्रेमी मुद्दे इस बात का कारण बन जाएं कि इस्राईल और अमरीका के लिए यमनी सेना और स्वयं सेवी बलों की सफलता, रणनैतिक ख़तरा बन जाए और यह दोनों सरकारें ख़ामोश तमाशायी बनी रहें।

उनका कहना है कि तेल अवीव को सीधे या किसी और तरीक़े से अमरीका की सेन्ट्रल कमान के साथ मिलकर सऊदी गठबंधन की मदद करनी चाहिए और उन्हें सलाह देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब पर यमनियों के ड्रोन और मीज़ाइल हमले, तकनीकी, रणनैतिक और आडियालाजी के हिसा सब चिंता का विषय हैं।

यीरान लीरमान का कहना है कि सऊदी अरब और इमारात को चाहिए कि इस बारे में सोचना चाहिए कि इस जंग से कैसे निपटेंगे और इस संबंध में इस्राईल, इन देशों के साथ सूचनाओं के आदान प्रदान में सहायता कर सकता है और सटीक हमले करने वाले हथियार दे सकता है। उनका कहना था कि यमन युद्ध में जीतने के लिए एक मज़बूत संकल्प की आवश्यकता है और अगर दोनों पक्ष एक कूटनयिक हल की तरफ़ जाते हैं तो उसका परिणाम, ईरान की जीत के रूप में सामने नहीं आना चाहिए।

उन्होंने यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन को लाल सागर के लिए एक गंभीर ख़तरा क़रार दिया और लिखा कि हूसियों की इस्राईल से दुश्मनी किसी से छिपी नहीं है और न ही इसको छिपाते हैं।

यमनी सेना की बड़ी कार्यवाही, सऊदी अरब के महत्वपूर्ण क्षेत्र हाथ से निकला…

यमन की सेना और स्वयंसेवी बलों तथा सऊदी गठबंधन के बीच कई दिनों से जारी झड़पों के बाद बुधवार की रात यमनी सेना ने सऊदी गठबंधन की एक महत्वपूर्ण छावनी पर क़ब्ज़ा कर लिया ।

यमन की सेना ने सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सऊदी अरब की एक छावनी पर क़ब्ज़ा कर लिया है। अख़बार अलयमन की रिपोर्ट के अनुसार यमन की सेना ने तेल से संपन्न मआरिब प्रांत में प्रगति करते हुए बुधवार की रात सऊदी गठबंधन की “कौफल” नामक छावनी पर नियंत्रण कर लिया जो “सरवाह” क्षेत्र में स्थित है।

यमन की सेना और वहां के स्वयंसेवी बलों तथा सऊदी गठबंधन के बीच पिछले 4 दिनों से जारी झड़पों के बाद बुधवार की रात उन्होंने सऊदी गठबंधन की जिस छावनी पर क़ब्ज़ा किया है उसे स्ट्रैटेजिक दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। एक सुरक्षा सूत्र ने बताया है कि यमन की सेना ने मआरिब में उल्लेखनीय प्रगति की है। याद रहे कि मआरिब प्रांत में सऊदी गठबंधन की यह बहुत ही महत्वपूर्ण सैन्य छावनी थी। विशेषज्ञों का कहना है कि “कौफल” छावनी पर नियंत्रण करने के बाद यमनी, बहुत आसानी से पूरे मआरिब नगर पर नियंत्रण स्थापित कर सकते हैं।

याद रहे कि सऊदी गठबंधन ने मार्च 2015 से यमन के विरुद्ध युद्ध छेड़ रखा है और लंबे समय से उसने इस देश की घेराबंदी कर रखी है। सऊदी अरब की इस कार्यवाही से 16 हज़ार से अधिक यमनी मारे गए हैं जबकि हज़ारों निर्दोष लोग घायल हुए हैं।

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