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गोलवलकर को महान बताने पर भारतीय संस्कृति मंत्रालय ने किया बचाव, कहा, किसी भी विचारधारा को चुप नहीं करा सकते

भारत के केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय द्वारा हिंदुत्ववादी विचारक और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ “आरएसएस” के पूर्व प्रमुख एमएस गोलवलकर की जयंती पर ट्वीट करने पर हुई आलोचना के एक दिन बाद मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि वह समाज के हर वर्ग की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है और किसी भी विचारधारा को चुप कराने में विश्वास नहीं रखता।

एक दिन बाद 20 फ़रवरी को मंत्री के मीडिया सलाहकार नितिन त्रिपाठी ने ट्वीट कर कहा था कि भारत दुनिया में सांस्कृतिक रूप से विविध राष्ट्र है और बहुसंस्कृतिवाद का प्रतीक है। संस्कृति मंत्रालय समाज के हर वर्ग की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है और किसी भी विचारधारा या आवाज को चुप कराने में विश्वास नहीं रखता।

त्रिपाठी ने एक अन्य ट्वीट में कहा था कि विशिष्ट सामाजिक-सांस्कृतिक गुण, रीति-रिवाज, परंपरा और मूल्यों का हर क़ीमत पर सम्मान किया जाना चाहिए और यह सदियों से भारत जैसे लोकतंत्र के आवश्यक तत्वों में से एक है।

ज्ञात रहे कि संस्कृति मंत्रालय ने 19 फ़रवरी को एमएस गोलवलकर की तस्वीर के साथ ट्वीट करते हुए कहा था कि एक महान विचारक, विद्वान और असाधारण नेता एमएस गोलवलकर की जयंती पर उन्हें याद कर रहे हैं। उनके विचार प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे और पीढ़ियों का मार्गदर्शन करते रहेंगे।

इसके बाद कांग्रेस सांसद शशि थरूर और गौरव गोगोई सहित कई ट्विटर यूज़र्स ने गांधी जी के आदर्शों का विरोध करने वाले व्यक्ति गोलवलकर को श्रद्धांजलि देने के मंत्रालय के क़दम की आलोचना की थी।

कई लोगों ने गोलवलकर की किताबों का उल्लेख करते हुए उनके सांप्रदायिक विचारों और यहूदियों के नरसंहार के लिए हिटलर का समर्थन करने जैसे उनकी विचारधारा की निंदा की थी।

थरूर ने कहा था कि गोलवलकर ने भारतीय ध्वज और संविधान का कभी सम्मान नहीं किया.

गोगोई ने ट्वीट कर कहा था कि संस्कृति मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने एक बार संसद में उनसे कहा था कि गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे की पूजा करने में कुछ भी ग़लत नहीं है।

इस बीच कई केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा के मुख्यमंत्रियों ने ट्वीट कर गोलवलकर की प्रशंसा की। भाजपा सांसद राकेश सिन्हा ने इस ट्वीट के लिए संस्कृति मंत्रालय को बधाई तक दी थी।

गोलवलकर के विचारों को बड़े पैमाने पर लोकतंत्र के खिलाफ माना जाता है. इतना ही नहीं, खुद आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने एक आउटरीच कार्यक्रम के दौरान उनके कुछ विचारों से दूरी बना ली थी।

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