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पेट्रोल के दमों में लगी आग : जनता में रोष : आसमान छूते पेट्रोल के मूल्यों की गूंज कश्मीर से क्न्याकुमारी तक सुनाई दे रही है!

 

आप को पता ही होगा कि खबर वही होती है जो हमेशा न हो। जब कोई अप्रत्याशित घटना होती है तो वह खबर बनती है वर्ना आम घटना। गाड़ी सड़क पर चलती है तो खबर नहीं अगर उसका एक्सीडेंट हो जाए तो खबर। यह जर्नलिज़्म का साधारण नियम है। आज कल भारतीय मीडिया में, भारतीय समाचार पत्रों ने यह खबर होती हैः आज नहीं बढ़े पेट्रोल डीज़ल के दाम, जनता को राहत! खबरों का यह अंदाज़ बता रहा है कि भारत में पेट्रोल के दाम का क्या हाल है?

भारत में हालिया कुछ बरसों में कई चीज़ें पहली बार हुई हैं और उनमें से अधिकांश का संबंध आम जनता से रहा है लेकिन हालिया दिनों में पेट्रोल ने पहली बार सौ का आंकड़ा पार किया जो एक रिकार्ड है और हां भारत के प्रधानमंत्री की मिमिक्री से मशहूर हुए एक कामेडियन ने इसमें गर्व आदि पहलु भी निकाल लिया है हालांकि ऐसा करना उन्हें भारी पड़ा और हो सकता है कि अब उन्हें बार बार माफी मांगने के बावजूद मुक़द्दमे का सामना करना पड़े। कामेडियन श्याम रंगीला ने जहां पहले पेट्रोल के बढ़े दाम को लेकर वीडिया जारी किया। श्याम रंगीला द्वारा जारी किए गए वीडियो पर विवाद बढ़ने पर उन्होंने फिर एक अन्य वीडियो जारी करके बताया कि उनको एफ़आईआर दर्ज किए जाने की लगातार धमकी मिल रही है। भारत में पिछले तीन दशकों से अगर पेट्रोल की कीमतों का जायज़ा लिया जाए तो आज की स्थिति को अच्छी तरह से समझा जा सकता है। अक्तूबर 1990 में भारत में पेट्रोल की क़ीमत थी 12 रूपये 23 पैसे। जनवरी 2000 में 26 रूपये 7 पैसे। जनवरी सन 2010 में 51 रूपये 33 पैसे। 13 मई को 2014 71 रूपये 41 पैसे 26 मई सन 2014 में नरेन्द्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री बने। पहली जून 2014 में पेट्रोल का मूल्य था 71 रूपये 51 पैसे। तब से सब कुछ भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथ में है। और अब पेट्रोल का मूल्य 100 से पार है। प्रधानमंत्री बनने से पहले उन्होंने तेल की बढ़ी क़ीमतों पर तात्कालीन मनमोहन सिंह सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया था। साथ ही उनकी क़रीबी माने जाने वाली और वर्तमान में उनकी कैबिनेट में मंत्री स्मृति ईरानी ने भी तात्कालीन सरकार पर जमकर हमला बोला था, जो अब भारत के इतिहास में अब तक की सबसे ज़्यादा बढ़ी तेल की क़ीमत का समर्थन कर रही हैं।

भारत में पेट्रोल की बढ़ती क़ीमत पर हंगामा है। जनता में रोष है। जनता के रोष की वजह से टीवी चैनलों को भी इस पर चर्चा करना पड़ रहा है क्योंकि पेट्रोल के मूल्य क्यों इतने बढ़ गये ? यह वह सवाल है जो सच में भारत पूछता है हालांकि इसका कोई जवाब नहीं है। आसमान छूती पेट्रोल की क़ीमतों के ख़िलाफ़ आम जनता के साथ-साथ राजनीतिक पार्टियां भी सड़कों पर उतर आईं हैं। प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना है कि मोदी तेल की बढ़ती क़ीमतों के लिए सीधे तौर पर मोदी सरकार ही ज़िम्मेदार है। भारतीय मीडिया की एक खबर के अनुसार 2014 में सत्ता में आने के बाद मोदी सरकार में पेट्रोल और डीज़ल पर टैक्स कलेक्शन में ऐतिहासिक वृद्धि हुई है। कंट्रोलर जनरल ऑफ अकाउंट्स यानी CGA की रिपोर्ट के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में अप्रैल-नवंबर 2020 में एक्साइज ड्यूटी कलेक्शन 1.96 लाख करोड़ रही जबकि 2019 की समान अवधि में यह 1.32 लाख करोड़ रुपए रही थी। CGA की एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2019-20 (अप्रैल 2019 से मार्च 2020) के बीच टोटल एक्साइज कलेक्शन 2.39 लाख करोड़ रुपए रहा था। इन भारतीय सूत्रों के अनुसार मोदी सरकार जब 2014 में सत्ता में आई थी, उस समय पेट्रोल और डीज़ल पर एक्साइज ड्यूटी काफी कम हुआ करती थी। 2014 में पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 9.48 रुपए और डीजल पर 3.56 रुपए प्रति लीटर थी। इस समय पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 32.90 रुपए और डीजल पर 31.80 रुपए है। जब तेल की क़ीमतें सस्ती थीं तो मोदी ने कहा था कि उनके अच्छे नसीब की वजह से तेल सस्ता हुआ है और वहीं जब पेट्रोल की क़ीमत भारत के इतिहास में सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए 100 का भी आंकड़ा कर गई तो मोदी ने कहा कि इसके लिए पूर्व की सरकारें ज़िम्मेदार हैं भारत में आसमान छूते पेट्रोल के मूल्यों की गूंज अब कश्मीर से क्न्याकुमारी तक सुनाई दे रही है हर तरफ हाहाकार मचा हुआ है, कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारूक़ अब्दुल्लाह ने भी लगातार पेट्रोल की बढ़ती क़ीमतों पर चिंता जताई है।

तेल की क़ीमत कई कारकों से प्रभावित होती है कुछ देशी और कुछ विदेशी होते हैं। कुछ पर सरकार का बस चलता है कुछ पर नहीं चलता और कुछ कारक एसे होते हैं जो सरकार के साहस, संकल्प और समझ पर निर्भर होते हैं। तेल के मूल्यों में सारे कारकों के अलावा सरकारें प्रायः जिस बड़े कारक का नाम लेती हैं वह कच्चे तेल के मूल्यों में वृद्धि है। कच्चे तेल से ही पेट्रोल और डीज़ल जैसे ईंधनों का उत्पादन होता है। भारत के वरिष्ठ राजनीतिक टीकाकार ऑनिंद्यो चक्रवती ने एनडीवी से बात करते हुए बताया कि मोदी सरकार जो दावा कर रही है वह सच्चाई से बिल्कुल दूर है।दोस्तो चर्चा के अंत में हम आप को कुछ तथ्य बताते हैं नतीजा निकालना आप पर है। ईरान दुनिया का तीसरा सब से बड़ा तेल समृद्ध देश है। पहला वेनज़ोएला, दूसरा, सऊदी और तीसरा ईरान और भारत ईरानी तेल का दूसरा सब से बड़ा खरीदार था। ईरान पर अमरीका ने प्रतिबंध लगाया और कुछ देशों को प्रतिबंध से माफ किया जिनमें भारत भी शामिल था। ईरान भारत को बहुत सी सुविधा के साथ तेल बेचता था। दाम भी कम और कीमत अदा करने की व्यवस्था भी बेहद लचकदार थी मगर फिर अमरीका ने अपनी छूट देना रोक दिया तो भारत ने भी ईरान से सस्ता तेल लेना बंद कर दिया। यही नहीं अमरीकी प्रतिबंधों की वजह से भारत ने वेनेज़ोएला से भी तेल लेना बंद कर दिया। इस तरह से दुनिया में तेल की दौलत से मालामाल पहले और तीसरे देश से सस्ता तेल लेना भारत ने इस लिए बंद कर दिया क्योंकि इससे अमरीका नाराज़ होता। वैसे आप को यह तो पता ही है कि भारत की जनता में पेट्रोल के दामों को लेकर काफी नाराज़गी है।[

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