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#बीजेपी के टॉप लीडर्स के सेक्स स्कैंडल : वीडियो देखें @Vijayg एवं @nitin_gadkari

जब सत्ता में बैठे लोगों के लिए अलग कानून, तौर तरीके होते हैं और बाकी के लिए दूसरे तब पूरा समाज, देश बिखर जाता है, कोई भी समाज देश कानून से चलता है और कानून सभी के लिए एक जैसा, बराबर होता है वो नाइंसाफी नहीं करता है, न्याय के नाम पर अन्याय नहीं कर सकता है, भारत में एक संगठन के लिए देश का कानून लागू नहीं होता है वो देश की किसी भी व्यवस्था को नहीं मानते हैं बल्कि उनका अपना ज़ोर ही कानून है, उनकी सत्ता की मनमाने ही अंतिम न्याय है, न्याय करने के लिए बैठे लोग मस्जिद की ज़मीन पर मंदिर बनाने के लिए आदेश दे देते हैं और खुद राजय सभा की सीट लेकर अपना अंतिम समय तक का बंदोबस्त कर लेते हैं, जज की हत्या हो जाती है लेकिन उसकी जाँच करने की जुर्रत किसी जज में नहीं होती, एक अदालत का पूर्व जज चीख चीख कर कहता है कि मेरे पास सबूत हैं कि ‘X’ ने पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी से 20 करोड़ रूपए लिए हैं लेकिन देश के अंदर कानून के ही मुहाफ़िज़ उसकी बात पर असर नहीं लेते, एक पुलिस कमिश्नर कहता है कि मुंबई और संसद हमला तत्कालीन सरकारों ने करवाए हैं लेकिन मजाल है जो उसकी जांच हो जाये, यहाँ जैसे अंधेर गर्दी चल रही है वो डरा ने वाली है, खौफनाक है,

A video of a woman who calls herself Bobby is doing the rounds on micro-blogging site Twitter in which the woman is seen talking about two prominent Bharatiya Janata Party (BJP) ministers. The content of the woman who is talking about two senior BJP government ministers may defame the image of these leaders and may bring trouble for the BJP led government. The video has been shared on Twitter by fan pages of Delhi Chief Minister Arvind Kejriwal, Aam Aadmi Party (AAP), and individuals.

However, it is not confirmed yet that whether these videos are fake, real or carry any substance and NewsX takes no responsibility for the authenticity of these videos. The woman who is seen talking about two BJP prominent ministers in these videos also said that BJP ministers are scared from her that she will give all this information in the media. The woman also alleged that she had received offers from Congress party asking for this information and offering her crores of rupees. The content of the woman who is speaking in these videos can seriously defame the two BJP minister and could create massive trouble. NewsX once again takes no responsibility for the authenticity and validity of the videos and also its content.

The fan page of Arvind Kejriwal which is also among other Twitter accounts those who have shared this video says that the Bharatiya Janata Party should sack these ministers about whom this woman is talking about which could seriously malign the image of BJP ministers and the party. It’s not the first time when Aam Aadmi Party fans or BJP fans have tried to defame each other. Given the political scenario between both the parties, in the past too, both the parties have indulged in political mud slugging and levelled charges on each other.

In the video, the woman is saying “But, I told them I will never go to the media. Fights happen even in the family. That doesn’t mean you start to wash dirty linen in public,” she is seen boasting in the videos. The woman in the video also claimed she had received a text message from a union minister Vijay Goel, who called her a ‘sex bomb.’. She added that Congress had offered her crores for giving out this information, but she refused to do that as she considers BJP like her family and believes such things should not be leaked. Following the surfacing of the video, many women leaders from Opposition parties have demanded a probe into Bobby’s allegations.

comments on Twitter : ““This clip should be investigated because this lady seen in many pics with prominent BJP leaders is also a BJP member and she here is labelling quite serious allegations vs Nitin Gadkari, Vijay Goel et al Biggest political sex scandal is waiting to be unearthed if true #BobbyGate”.

( From newsx.com)

#BobbyGate – Woman Alleges Senior BJP Leader Used to Send Vulgar Messages

A video has surfaced in which a woman is seen talking explosive things about senior BJP leaders. She is talking about some BJP leader saying that “he roams around with new ladies everyday”. In the video she takes the name of Vijay Goyal and alleges that Vijay Goyal sent her vulgar messages like “you are hot bomb”, “you are sexy bomb” after getting drunk. The lady names herself Bobby and says that “There were Amit Shah, Mohan Bhagwat and Nitin Gatkari and they asked me, what do you want?” then she (Bobby) replied to them that he send me vulgar messages and also showed others that I(Vijay Goyal) have sent such messages to Bobby. The lady claims that at that time Vijay Goyal was “Pradesh Adhyaksh (State President) and due to her Vijay Goyal was immediately removed from his post. She also claimed in the video that she has offer of 3 crores from congress to give that message but she is not giving. Below is the video in which everything can be heard clearly:

In the second video she is heard saying that Nitin Gadkari used to call a girl associated with her and he never say no to any of her work. Below is the second video:

The above videos can bring lots of trouble for BJP. Though the authenticity of the video needs to be examined, still the allegations made in the video is very serious and should be investigated. It is surprising that the traditional media is silent on this sting which has surfaced from a fan page of Arvind Kejriwal. The details can only come out when an investigation is carried out.

 

 

देखें कुछ माननियों के सेक्स स्कैंडिल से जुड़े वीडियो, अपना सिर किसी हथोड़े से……

 

 

 

 

 

 

वे राजीव गाँधी की खुद्दार बेटी हैं

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी ने आज मुज़फ्फरनगर के बघरा गाँव आयोजित किसान पंचायत में कहा कि वे राजीव गाँधी की खुद्दार बेटी हैं। किसानों के साथ ग़द्दारी नहीं कर सकतीं। राजनीति में मुँह दिखाने नहीं आयीं। किसानों के संघर्ष में बार-बार शामिल होती रहेंगी। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की तुलना अहंकारी राजा से करते हुए कहा कि जब राकेश टिकैत की आँखों में आँसू निकल रहे थे तो मोदी के ओठों पर हँसी थी।

किसान आंदोलन में कांग्रेस अब पूरी तरह कूद पड़ी है। उसकी जय-जवान, जय किसान महापंचायतों का सिलसिला सहारनपुर और बिजनौर के बाद आज मुज़फ्फरनगर पहुँचा था। प्रियंका गाँधी ने केंद्र की मोदी सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि 90 दिनों से लाखों किसान दिल्ली के बाहर बैठे हुए हैं। 215 किसान अब तक शहीद हो चुके हैं। लेकिन चीन, पाकिस्तान, अमरीका जाने वाले पीएम मोदी कुछ किलोमीटर दूर उनसे मिलने नहीं जा सके। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारी किसानों को प्रताड़ित किया गया, उनकी बिजली-पानी काटी गयी, दिल्ली की सीमा को देश की सीमा जैसी बना दिया गया। जो किसान अपने बेटों को सरहद पर देश की रखवाली के लिए भेजते हैं, उन्हें अपमानित किया गया, उन्हें देशद्रोही और आतंकवादी कहकर ज़लील किया गया। प्रधानमंत्री ने संसद में किसानों का मज़ाक़ उड़ाया। उन्हें आंदोलनजीवी और परजीवी कहा।

कांग्रेस महासचिव ने कहा कि इंसान की तरह देश का भी एक हृदय होता है जिसके धड़कने से देश जीवित रहता है। देश का दिल किसान है जो ज़मीन को सींचता है, उपजाता है, देश को जीवित खता है। लेकिन जब चौधरी राकेश टिकैत के आंखों में आसूँ आते हैं तो प्रधानमंत्री के ओठों पर हँसी आती है।

प्रियंका गाँधी ने कहा कि पीएम मोदी ने किसानों की आमदनी दोगुनी करने का वादा किया था। गन्ने के बकाये का जल्द भुगतान करने को कहा था। किसानों का बकाये 15 हज़ार करोड़ है जिसे उन्होंने नहीं दिलाया लेकिन अपने लिए 16 हज़ार करोड़ में अपने लिए दो हवाई जहाज उन्होंने ख़रीद लिये। बीस हज़ार करोड़ रुपये की स्कीम बन रही है ताकि संसद के आस पास सुंदरीकण किया जा सके।किसानों की परेशानी लगातार बढ़ रही है। डीज़ल, खाद से लेकर गैस सिलेंडर तक के दाम बढ़ते जा रहे हैं। जबकि गन्ने का दाम वही है।

कांग्रेस महासचिव ने कहा कि मोदीजी के पूंजीपति मित्र हज़ारों करोड़ कमा रहे हैं। कृषि कानूनों से धीरे–धीरे सरकारी मंडियां बंद हो जाएंगी। प्राइवेट मंडियों के खुलने से पूंजीपतियों की चलेगी। जो चाहेंगे वो करेंगे। इस कानून के तहत किसानों की सुनवाई नहीं है। किसान अदालत नहीं जा सकते। एसडीएम के पास जाना होगा। किसान लड़ नहीं सकते, ये नए कानूनों में लिखा है।

प्रियंका गाँधी ने कहा कि पुरानी कहानियों में अहंकारी राजा होता था, हमारे प्रधानमंत्री जी भी अहंकारी राजा बन गए हैं जिसे किसानों की आवाज़ सुनाई नहीं पड़ रही है। जो जवान इस देश की सीमा की सुरक्षा पर तैनात है वो किसान का बेटा है। उनका सम्मान होना चाहिए। पीएम मोदी बताएं कि ये कानून किस किसान से पूछकर बनाया गया है।

प्रियंका ने अपने पिता और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के समय चले किसान आंदोलन का ज़िक्र करते हुए कहा कि ‘जब आपने संघर्ष किया था तो मेरे पिता जी राजीव गांधी ने आपकी बातें मानी थीं। मेरे पिता जी ने आपको सम्मान दिया था। मैं भी खुद्दार हूं, मैं ग़द्दारी नहीं करूंगी। मैं राजनीति के लिए मुंह दिखाने के लिए नहीं आई। मैं बार बार आती रहूंगी. हम आपके साथ संघर्ष करेंगे। आप पीछे मत हटिए. इस सरकार को पीछे हटना पड़ेगा।’

प्रियंका गाँधी के तेवर से साफ़ है कि वे इन किसान पंचायतों के जरिये कांग्रेस कार्यकर्ताओं में एक नया जोश भरना चाहती हैं। आंदोलन के ज़रिये संगठन मज़बूत करने की रणनीति पार्टी को कितना ऊँचाई पर ले जायेगी, ये तो भविष्य बतायेगा लेकिन प्रियंका गाँधी को सुनने के लिए भारी भीड़ भी उमड़ रही है, ये सच है।

 

कड़वी सच्चाई
@KadaviSachai
Feb 22, 2020
केंद्रीय मंत्री @Vijayg
एवं @nitin_gadkari
पर आरोप लगाया था आज इस वीडियो में किसी ललिता जो की महिपालपुर दिल्ली से है, को उसकी बेटी की हत्या आरोप लगा रही है और सरे आम किसी महिला की छवि को उड़ा रही है

मोदी की कॉरपोरेटपरस्ती डॉ.आंबेडकर के विचारों और आरक्षण की हत्या है!

आप मानेंगे ही कि संविधान निर्माता डा. अंबेडकर नरेंद्र मोदी से ज्यादा समझदार अर्थशास्त्री थे! उन्होंने राज्य और अल्पसंख्यक नामक ज्ञापन जो उन्होंने संविधान सभा मे प्रस्तुत किया था में साफ साफ कहा है कि प्राइवेट सेक्टर कभी भी देश का भला नहीं कर सकता न ही लोगों का भला कर सकता है। उन्होंने कहा -” भारत का तेजी से औद्योगीकरण के लिए राजकीय समाजवाद जरूरी है। निजी उद्यम ऐसा नहीं कर सकता और यदि करेगा तो वह संपदा की विषमताओं को जन्म देगा, जो निजी पूंजीवाद ने यूरोप में पैदा की है और जो भारतियों के लिए एक चेतावनी होगी। “

आर.राम
किसानों और कॉर्पोरेट के बीच चल रही लडाई के बीच संसद मे प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद बोलते हुए खुल कर कॉर्पोरेट और निजीकरण का समर्थन किया। कहा कि निजी क्षेत्र को गाली देना अस्वीकार्य है, निजी क्षेत्र की आलोचना बंद होनी चाहिए और देश के विकास में इनका भी उतना ही योगदान है जितना सार्वजनिक क्षेत्र का। अव्वल तो निजी क्षेत्र को कोई गाली नहीं देता बल्कि उनकी मुनाफ़ाखोरी और क्रोनी पूंजीवाद की आलोचना होती है, और सरकार से उम्मीद यह की जाती है कि वह अपने चहेते पूंजीपतियों को देश की संम्पति बेचने के बजाय देश के सार्वजनिक क्षेत्र को सुदृढ़ करे और लोकतंत्र के जन कल्याणकारी रूप को संरक्षित करे।

लेकिन हमारे प्रधानमंत्री बात का बतंगड़ बनाने और मुद्दे को किसी अंधी गली में भटका देने में माहिर हैं जहाँ जाकर बात का मूल सिरा ही गायब हो जाता है। वे कह रहे थे कि नौजवानों की प्रतिभा पर भरोसा करें, प्रधानमंत्री की बात मानें तो ऐसा लगेगा मानो देश के सारे नौजवान निजीकरण का झंडा बुलंद करते हुए अपना अपना स्टार्ट अप खोल कर मुनाफ़ा पीटते हुए सरकारी खजाना भर रहे हैं। और जो बेरोजगार युवा बैंक, रेलवे ,सेना, और तमाम सरकारी नौकरियों के लिए दर दर की ठोकरें खा रहे हैं वे तो किसी और ग्रह से आये हैं।

जहाँ तक निजी क्षेत्र की देश भक्ति और जिम्मेदारी का सवाल है तो उसे लॉकडाउन के दौरान पूरा देश देख चुका है। निजी अस्पतालों, निजी उद्योगों और सेवाओं ने संकट की घडी में सरकार और जनता का कितना साथ दिया है या अब कोई छिपी हुई बात नहीं है। कोरोना महामारी से भी देश ने अपने लुँज पुंज सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के भरोसे ही लडाई लड़ी गई। उस समय निजी क्षेत्र भाग खड़ा हुआ था। प्रधानमंत्री कोरोना वैक्सीन को लेकर बोल रहे थे कि निजी क्षेत्र की वजह से ही यह संभव हो पाया लेकिन वे यह नहीं बोले कि वैक्सीन के मामले में कॉर्पोरेट के तेजी दिखाने के पीछे मुनाफे का कितना योगदान है?

बहरहाल मोदी जी द्वारा निजी क्षेत्र की हिमायत का रहस्य छुपा हुआ नहीं है, पर हमारे स्वप्नदर्शी नेताओं और आज़ादी के बाद राष्ट्र निर्माताओं ने निजी क्षेत्र की बजाय पब्लिक सेक्टर पर जोर दिया था इसके पीछे उनकी दूर दृष्टि और लोक कल्याणकारी राज्य का स्पष्ट नक्शा था। यह तो आप मानेंगे ही कि संविधान निर्माता डा. अंबेडकर नरेंद्र मोदी से ज्यादा समझदार अर्थशास्त्री थे! उन्होंने राज्य और अल्पसंख्यक नामक ज्ञापन जो उन्होंने संविधान सभा मे प्रस्तुत किया था में साफ साफ कहा है कि प्राइवेट सेक्टर कभी भी देश का भला नहीं कर सकता न ही लोगों का भला कर सकता है। उन्होंने कहा -“भारत का तेजी से औद्योगीकरण के लिए राजकीय समाजवाद जरूरी है। निजी उद्यम ऐसा नहीं कर सकता और यदि करेगा तो वह संपदा की विषमताओं को जन्म देगा, जो निजी पूंजीवाद ने यूरोप में पैदा की है और जो भारतियों के लिए एक चेतावनी होगी। ” उनका मानना था कि निजी उद्यम लोकतंत्र को भी कमजोर करता है। वे लिखते हैं – “जो लोग निजी उद्यम पर आधारित सामाजिक अर्थव्यवस्था और निजी लाभ की कार्यप्रणाली का अध्ययन करते हैं वे जानते होंगे कि यह लोकतंत्र के अंतिम दो आधार स्तंभों को यदि वस्तुतः भंग नहीं करती है तो दुर्बल अवश्य बना देती है। अपनी आजीविका पाने के लिए कितनों को अपने संवैधानिक अधिकार छोड़ने पड़ेंगे? कितने लोगों को प्राइवेट नियोजकों से शासित होना पड़ेगा? ”

भारत जैसे अविकसित पूंजीवादी देश जहाँ पर सामंती जातिवाद की जड़ें बहुत गहरी हैं वहाँ पर निजीकरण की व्यवस्था सामाजिक अन्याय को और अधिक गहरा करती है। आज इसका सबसे बड़ा प्रमाण है आरक्षण का खात्मा! सार्वजनिक क्षेत्र के खत्म होने का सबसे बड़ा दुष्परिणाम वंचित और दलित तबकों के आरक्षण पर पड़ रहा है। इन वर्गों की भागीदारी निरंतर घटती जा रही है और मोदी सरकार की जातिगत पेशों पर आधारित कौशल विकास की परियोजना के कारण वर्ण व्यसस्था नये संदर्भ में पुनर्गठित हो रही है। इसका परिणाम यह होने जा रहा है कि निचली जातियाँ धीरे धीरे ऊँचे स्तर की ‘ व्हाइट कॉलर ‘ नौकरियों से बेदखल होकर जातिगत पेशों को अपनाने पर मजबूर होन्गे या फिर मजदूर बने रहने पर विवश होंगे।

आज जिस तरह सरकार सभी उद्योग- कृषि, रेलवे, बैंक- बीमा इत्यादि को निजी हाथों में सौंप कर राज्य के हस्तक्षेप और नियंत्रण से मुक्त होना चाहती है उसका परिणाम क्या होगा इसके बारे में डा. अंबेडकर ने लिखा था – “यह सच है कि जहाँ राज्य हस्तक्षेप से विमुख रहता है, वहाँ जो शेष रहता है वह है स्वाधीनता। किंतु बात यहीं समाप्त नहीं हो जाती है। एक और प्रश्न का उत्तर दिया जाना शेष है। यह स्वाधीनता किसे और किसके लिए? प्रकटतः यह स्वाधीनता जमींदारों को लगान बढ़ाने, पूंजीपतियों को कार्य के घंटे बढ़ाने और मजदूरी घटाने की स्वाधीनता है… दूसरे शब्दों में जिसे राज्य के नियंत्रण से मुक्ति कहते हैं वही प्राइवेट नियोजक के एकाधिकार का दूसरा नाम है। ”

कृषि कानूनों में राज्य द्वारा अहस्तक्षेप के प्रावधान के पीछे के निहितार्थ को इस बात से समझ सकते हैं। साफ है कि वर्तमान सरकार की मंशा कॉर्पोरेट के हाथ एकाधिकार सौंपने की है। इसलिए यह लडाई आम जनता और कॉर्पोरेट की है, सरकार ने अपना पक्ष चुन लिया है।

लेखक सामाजिक प्रश्नों पर सजग-सक्रिय लेखक हैं।

डिस्क्लेमर : इन आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. लेख सोशल मीडिया फेसबुक पर वायरल है, इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति तीसरी जंग हिंदी उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार तीसरी जंग हिंदी के नहीं हैं, तथा तीसरी जंग हिंदी उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है

 

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