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बेचने की ख़्वाहिश में कुछ भी शर्म नहीं बची : ‘एक प्यार का नग़मा है, मोजों की रवानी है’ लिखने वाले महान कवि, गीतकार #संतोष आनंद आज भीख मांगने को मजबूर हैं : रिपोर्ट

महान फिल्म मेकर, अभिनेता गुरु दत्त ने एक फिल्म बनायी थी ”कागज़ के फूल’ जिसमे उन्होंने फिल्म जगत की हकीकत को दर्शाया था कि फ़िल्मी दुनियां में उरूज और ज़वाल के समय लोगों के बर्ताव किस तरह के होते हैं, जिन कलाकारों के लाखों दीवाने होते हैं, जो परदे पर शानदार जिंदिगी जीते नज़र आते हैं उनकी असल जिंदिगी में कितना अँधेरा, अकेलापन और तकलीफें होती हैं, चमक चली जाने के बाद फ़िल्मी दुनियां के लोग ही उन्हें भूल जाते हैं और एक वक़्त के दिग्गज मुफलिसी में जीने को मजबूर हो जाते हैं, बहुत बार तो उनके मरने की खबर भी कई कई दिन बाद पता चलती है और अंतिम समय में उनके अंतिम संस्कार तक का पैसा उनके पास नहीं होता, ओम प्रकाश, भगवान् दादा, परवीन बॉबी और न जाने कितने ऐसे ही हालात के शिकार हुए

देखें यहाँ एक खबर सोशल मीडिया पर वायरल है, ये बेहद तकलीफ पहुंचाने वाली खबर है, संतोष आनंद, एक महान कवी, लेखक आज भीख मांगने को मजबूर है, बतादें कि संतोष आनंद अटल विहारी वाजपई के समय के दिग्गज कवी हैं, उन्होंने मनोज कुमार, राज कपूर, देव आनंद की फिल्मों के यादगार गीत लिखे हैं, मनोज कुमार की फिल्म ”शोर” का उनका लिखा गीत ‘एक प्यार का नग़मा है, मोजों की रवानी है, जिंदिगी और कुछ भी नहीं तेरी मेरी कहानी है’,,,सांग ऑफ़ थे संतुरी के ख़िताब से नवाज़ा गया था, क्रांति फिल्म में उनके लिखे गाने ‘ज़िंदगी की न टूटे लड़ी, प्यार करले घडी दो घडी’,,रोटी कपडा और मकान के शानदार गाने कौन भूल सकता है,,,”और नहीं बस और नहीं, ग़म के प्याले और नहीं,,,”,,,हाय हाय ये मजबूरी, ये मौसम और ये दूरी,,” पूरब और पक्षिम, उपकार में संतोष आनंद के गीत इतिहास में दर्ज हैं मगर आज इतना महान व्यक्ति ‘भीख” मांगने को मजबूर है,,,उफ़,,,जला दो इसे फूँक डालो ये दुनियां,,,ये दुनियां यहाँ आदमी कुछ नहीं है,,,तुम्हारी है तुम्ही सम्भालो ये दुनियां,,,,संतोष आनंद के साथ समय या तकदीर ने जो ज़ुल्म किया है उससे ज़ियादा हमारी हुकूमत, फिल्म जगत और समाज ने किया है,,,ये देश का सरमाया हैं, इन पर देश को फ़ख़्र होना चाहिए, इनके साथ ऐसा होना हमरी सड़ी गली व्यवस्था को उजागर करता है ,,,में संतोष जी का बड़ा प्रशंसक हूँ, आज इस समाचार ने बहुत दुखी किया है,,,,परवेज़

Rashmi Shakya
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कुछ भी शर्म नहीं बची, बेचने की ख़्वाहिश में.
ये सब देखकर तो यही डर लगता है कि न जाने कौन, कब, कहाँ, कैसे कोई अवसर देखकर आपकी ख़ुद्दारी नीलाम कर दे…#Shame

पंडित असित पाण्डेय
बकौल संतोष आनंद साहब मैनें अपना जीवन बहुत ही सम्मान और स्वाभिमान से जिया है भगवान राम ने मेरे लिये कपाट अंत समय में बंद कर लिये लेकिन नेहा बेटा मैं आपकी राशि नही ले सकता हूँ
नेहा उसके बाद सहयोग के लिये निवेदन करती रही तब संतोष साहब ने राशि स्वीकार की
ये लोग तो किसी के सम्मान और स्वाभिमान को नीलाम कर सकते हैं


मुकेश शुक्ल
दादा संतोष आनंद जी अति स्वाभिमानी ब्यक्ति है जो राजकपूर जैसे शोमैन को डाँट दिए थे। समय की मार है जो असमय उनका परिवार छिन्न-भिन्न हो गया और त्रासदी झेल रहे हैं। तीन तीन बार फिल्म फेयर जीतने वाले , सदी का सर्वश्रेष्ठ हिंदी गीत ” इक प्यार का नगमा है ,,,,,,,,” लिखने वाले को यदि नही समझ सकते तो कम से कम अशोभनीय हरकते मत करिए। किसी की औकात नही है कि उनके किसी एक गीत की कीमत दे सके।

Yogesh Shukla
Is duniya m kaisey kaisey insan rahtey isko sirf soch lijey to ruhe kanp jay….Lekin rasmi mem ki tarh v log rahtey h jissey mery ko positive anerji milti h..Or is sansar m kuch acha kaam kar leta hai..

Sudhanshu S Singh
Flag of India
@sssingh21
Story of Santosh Anand ji on #IndianIdol made me cry. Despite being paralytic he won’t accept any help. If Mr @ManMundra
could approach him and request to write a song for our refugee programme, we can raise at least Rs Rs 5 lakhs for him

 

 

 

 

 

 

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