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भीमा कोरेगांव मामले में आरोपी 81 वर्षीय वरवरा राव को बॉम्बे हाई कोर्ट ने छह महीने के लिए ज़मानत दी

भीमा कोरेगांव मामले में आरोपी 81 वर्षीय वरवरा राव को बॉम्बे हाई कोर्ट ने छह महीने के लिए जमानत दे दी है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने चिकित्सा आधार पर वरवरा राव को जमानत देने का फैसला लिया है। बता दें कि 28 अगस्त, 2018 से वरवरा राव ट्रायल का इंतजार कर रहे हैं। 

न्यायमूर्ति एसएस शिंडे और मनीष पिटाले की बेंच ने कहा कि छह महीने बाद वरवरा राव या तो सरेंडर कर सकते हैं या फिर अपनी जमानत की अवधि को बढ़वा सकते हैं। हालांकि वरवरा राव को सशर्त जमानत दी गई है। कोर्ट ने कहा कि वरवरा राव कोर्ट की प्रक्रिया से संबंधित कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं दे सकते और सह-आरोपी के साथ संपर्क भी नहीं साध सकते।

बेबाक पत्रकार
@SirRavishFC
80 वर्षीय वरवरा राव जो तेलगू भाषा के कवि हैं दो वर्ष से जेल में हैं. सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध है कि यह भी किसी व्यक्ति के जीने के अधिकारों का उल्लंघन है इनके भी अधिकारों की रक्षा की जाय जिससे न्यायालय मे ऐसे भी लोगों का विश्वास मजबूत हो जिनकी पहुँच अर्नब गोस्वामी जितनी नहीं है।

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि आरोपी वरवरा राव को जिस तलोजा जेल में रखा गया था, वहां की हालत अच्छी नहीं थी। इसके अलावा वरवरा राव की पत्नी हेमलता राव ने कोर्ट में एक याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने अपने पति के स्वास्थ्य, सम्मान और जीवन के मूलभूत आधारों का जिक्र किया। 

वरवरा राव की पत्नी हेमलता ने अपनी याचिका में भारतीय संविधान के आर्टिकल 21 के तहत मिले अधिकारों का जिक्र किया और कहा कि तलोजा जेल अधिकारियों ने इसका उल्लंघन किया है। उन्होंने वरवरा राव को समय से सही इलाज नहीं दिया। 

28 अगस्त 2018 से वरवरा राव जेल में बंद हैं और उन पर यूएपीए के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। हेमलता का प्रतिनिधित्व कर रहीं वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह का कहना है कि 365 दिनों में से 149 दिनों तक वरवरा राव ने अस्पताल में अपने दिन काटे। 

जयसिंह ने कहा कि राज्य सरकार और राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने इस बात को माना है कि जेल अस्पताल में तीन आयुर्वेद डॉक्टर ही हैं और एक भी एलॉपैथिक डॉक्टर नहीं है। इंदिरा जयसिंह ने कहा कि उनका वहां रहना उनके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है।

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