इतिहास

ये क़ब्र मुग़ल शहज़ादा शाहशुजा की है

पाकिस्तान पंजाब के धरेमा में मौजूद ये क़ब्र मुग़ल शहज़ादा शाहशुजा की है जिनकी वफ़ात इसी महीने 7 फरवरी 1661 को हुई थी। असल मे उनकी क़ब्र की सही जानकारी मौजूद नही है क्योंकि शाहशुजा का क़त्ल म्यांमार के रखाइन में हुआ था। पंजाब और रखाइन हिन्दोस्तान के दो अलग अलग सरहद पर हैं।
फतेहपुर ख़जवां में अपने भाई औरंगजेब से जंग हारने के बाद शाहशुजा के हाथ से बंगाल भी चला गया। वो अपना परिवार लेकर हज के सफर पर चले गए थे।
म्यांमार जाकर रखाइन के राजा से जहाज का बंदोबस्त की बात हुई राजा ने उन्हें अपने यहां रोक लिया और जल्द ही जहाज बंदोबस्त करने का वादा किया। लेकिन राजा की नियत शाहशुजा के बेशकीमती धन दौलत पर थी। कुछ दिन के बाद राजा ने शाहशुजा और उनके बच्चों और शहजादियों का क़त्ल कर दिया। और सारी दौलत अपने कब्जे में ले ली।
ये ख़बर मुग़ल बादशाह औरंगजेब तक पहुचीं तो बहोत नाराज़ हुए और म्यामांर पर चढ़ाई कर दी। चटगाँव फ़तह करते हुए मुग़ल सेना रखाइन पहुच गयी। राजा और उनके सैनकों को मौत के घाट उतार दिया गया। जो बचे उन्हें ग़ुलाम बनाकर दिल्ली लाया गया। और म्यांमार को हिन्दोस्तान में शामिल कर लिया गया।
कुछ इतिहासकार ये भी दावा करते हैं कि शाहशुजा ने तख्ता पलट की कोशिश की थी जिसकी वजह से उनका क़त्ल हुआ। जो कि सच्चाई से परे है शाहशुजा के पास उस वक़्त सिर्फ 200 ख़ादिम थे। सिर्फ 200 लोगो की मदद से बिना हथियार किसी राजा के तख्त पर कब्ज़ा करना असम्भव है।

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