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फ़ौजी छुट्टी आए तो सीधे किसान आंदोलन में पहुँऐ, पिता से मिलने, पिता को देख जवानों की आखों में पानी आ गया : पिता 75 दिनों से आंदोलन में बैठे हुए हैं!

Mamta Joshi
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फ़ौजी छुट्टी आए तो सीधे किसान आंदोलन में पहुँच गए अपने पिताजी से मिलने । पिता को देख जवानों की आखों में पानी आ गया । उनके पिता 75 दिनों से बॉर्डर पर किसान आंदोलन में बैठे हुए हैं ।

किसानों को खालिस्तानी-पाकिस्तानी कहने वालों को शर्म तो नहीं आती । शायद वे रोटी नहीं गोबर खाते हैं ।

#FarmersProtest
जय जवान जय किसान
जय जवान जय किसान
किसान भाईचारा ज़िन्दाबाद

Aleem Shuaib
थोड़ा एडिट किया है ।

Digvijaya Singh
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मनसुख हिरेन ने आत्महत्या कर ली, जिनकी गाड़ी में मुकेश अंबानी जी के निवास के सामने विस्फोटक पदार्थ पाए गए थे। यह अत्याधिक गंभीर प्रकरण है। इसकी निष्पक्ष जॉंच होना चाहिए।
कम से कम मुझे NIA के Director General YC Modi पर भरोसा नहीं है जो कि नरेंद्र मोदी जी के ना केवल चहते हैं लेकिन उन्होंने जितने भी बम ब्लॉस्ट के प्रकरण जिनमें संघ के लोग पकड़े गए थे सभी प्रकरणों में संघी आरोपियों को राहत दी है। NIA की निष्पक्ष हो रही जॉंच की धारा ही बदल दी थी।
क्या वे हरियाणा के RSS के प्रति समर्पित परिवार से जुड़े हुए हैं? आसाम कॉडर के अधिकारी होते हुए भी अधिकांश समय दिल्ली में ही पदस्थ रहे हैं।


Journalist Jafri
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यूपी के सीतापुर में हुआ दर्दनाक हादसा , ट्रैक्टर ने तीन सगी बहनों को रौंदा, एक की मौत

– दो की हालत गंभीर
सीतापुर के मछरेहटा इलाके में रमपुरवा गांव के निकट खेत से घर लौट रहीं तीन सगी बहनें दुर्घटना का शिकार हो गईं। शनिवार दोपहर बाद हुए सड़क हादसे में एक की मौत हो गई। गंभीर अवस्था में दो बहनों में से एक को लखनऊ ट्रामा सेण्टर रेफर किया गया। हादसे के बाद चालक वाहन छोड़कर फरार हो गया है।
मछरेहटा थाना क्षेत्र के कालूपुर गांव की तीन सगी बहनें मोनिका, सोनी और मोहिनी शनिवार को घर से खेत गई थीं। दोपहर बाद तीन बहनें आलू निकालकर घर लौटने लगीं। करीब एक बजे ये लोग गांव के निकट पटरी मार्ग पर नहर किनारे पहुंची। इसी दौरान तेज रफ्तार गन्ना लदी ट्रैक्टर-ट्राली ने अनियंत्रित होकर तीनों को चपेट में ले लिया। वाहन की टक्कर में रामपाल मौर्य की पुत्री मोनिका (12), सोनी (10), मोहिनी (17) गंभीर रूप से घायल हो गईं। हादसा होता देख गांव के लोग दौड़ पड़े। भीड़ बढ़ती देख चालक अपना वाहन छोड़कर फरार हो गया। किसी तरह परिवारीजनों ने तीनों घायलों को अफरातफरी के बीच सीएचसी लेकर पहुंचे।

बिगड़ती हालत के बीच सभी को जिला अस्पताल ले जाया गया। जहां चिकित्सकों ने मोहिनी को मृत घोषित कर दिया। मोनिका की हालत गंभीर देखते हुए उसे लखनऊ ट्रामा सेण्टर रेफर कर दिया। सोनी की हालत में मामूली सुधार है। एसओ मछरेहटा राजकुमार का कहना है कि ट्रैक्टर चालक वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गया है, वाहन को कब्जे में ले लिया गया। वाहन इलाके के सकरारा निवासी कमलेंद्र पुत्र राम किशन का बताया जा रहा है। केस दर्ज करते हुए जांच शुरू की जा रही है।


Akhilesh Yadav
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मुरैना के चौसठ योगिनी मंदिर जाने पर सुखद हर्ष हुआ लेकिन इंफ़्रास्ट्रक्चर और सुविधाओं की कमी को देखकर दुख भी हुआ.
इतने प्राचीन एवं महत्वपूर्ण मंदिर के उचित रखरखाव के लिए भाजपा सरकार को सर्वोतम प्रबंध करने चाहिए.

Syed Faizan Siddiqui
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कितना ज़्यादा दुःखद है ये ।
भारत में गर्भवती आवारा गाय से पशु चिकित्सकों ने 71 किलोग्राम प्लास्टिक, नाखून और अन्य कचरा निकाला है ।

पीपल फॉर एनिमल्स ट्रस्ट फरीदाबाद द्वारा फरवरी के अंत में सड़क दुर्घटना के बाद इस गाय को बचाया गया । चार घंटे के ऑपरेशन के दौरान मेडिक्स ने गाय के पेट से कचरा निकालने का काम किया । दुर्भाग्य से, बच्चे और माँ दोनों की मृत्यु हो गई ।

इस मामले में देश की प्रदूषण और आवारा मवेशियों की जुड़वां समस्याओं पर प्रकाश डाला गया है । अनुमानित 5 करोड़ गायें भारत के शहरों में घूमती हैं, जिसमें सड़कों पर प्लास्टिक के कूड़े की विशाल मात्रा पर भारी मात्रा में बढ़ रही हैं ।

प्लास्टिक के सेवन से हर साल कितनी गायें मरती हैं, इस पर कोई आधिकारिक, राष्ट्रव्यापी डेटा नहीं है । लेकिन 2017 में, टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट ने पशु चिकित्सा अधिकारियों और पशु कल्याण समूहों का हवाला दिया, अनुमान लगाया कि लखनऊ के उत्तरी शहर में प्लास्टिक खाने से लखनऊ में लगभग 1,000 गायें सालाना मरती हैं ।

 

डिस्क्लेमर : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. लेख सोशल मीडिया फेसबुक पर वायरल है, इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति तीसरी जंग हिंदी उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार तीसरी जंग हिंदी के नहीं हैं, तथा तीसरी जंग हिंदी उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है

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