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किसान आंदोलन का बढ़ता दायरा : संसद मार्च में महिलाएं, दलित-आदीवासी-बहुजन बेरोज़गार युवा और समाज का हर वर्ग हिस्सा लेगा : रिपोर्ट

 
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तीनों कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ किसान आंदोलन पूरे साहस के साथ जारी है। संयुक्त किसान मोर्चा ने आगे की रणनीति तय करते हुए मई में संसद तक पैदल मार्च करने का फ़ैसला किया है।

हालांकि अभी तारीख़ का एलान नहीं हुआ है। संयुक्त किसान मोर्चे की तरफ़ से यह ऐलान किसान नेता राकेश टिकेत के उस बयान से कुछ अलग है जिसमें उन्होंने ट्रैक्टर के साथ मार्च करने की बात कही थी।

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बुधवार को संयुक्त किसान मोर्चे एसकेएम की तरफ़ से कहा गया है कि संसद मार्च में किसानों और मज़दूरों के अलावा महिलाए, दलित-आदीवासी-बहुजन बेरोज़गार युवा और समाज का हर वर्ग हिस्सा लेगा, जिससे किसान आंदोलन के बढ़ते दायरे और प्रभाव का पता चलता है। एसकेएम की तरफ़ से कहा गया है कि 10 अप्रैल को 24 घंटे के लिए कुंडली-मनेसर-पलवर एक्सप्रेस-वे केएमपी को जाम किया जाएगा।

किसानों के प्रोग्रामः 5 अप्रैल को किसान फ़ूड कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया बचाओ दिवस मनाएंगे। 10 अप्रेल को 24 घंटे के लिए कुंडली-मनेसर-पलवर एक्सप्रेस-वे केएमपी को जाम किया जाएगा। 13 अप्रैल को दिल्ली की सीमाओं पर वैशाखी का त्योहार मनाया जाएगा। 14 अप्रैल को अंबेडकर की जयंती संविधान बचाओ दिवस के रूप में मनाया जाएगा। 1 मई को दिल्ली बॉर्डर पर ही मज़दूर दिवस का आयोजन होगा।

ग़ौरतलब है कि किसानों का आंदोलन 125 दिनों से जारी है। किसान दिल्ली की सरहदों पर बैठे हुए हैं। सरकार के साथ 11 दौर की बातचीत के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकल पाया। दोनों पक्षों के बीच आख़री बातचीत 22 जनवरी को हुयी थी

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