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दुनियां में न्यू ‘वर्ल्ड आर्डर’ बन चुका है, पुराने समीकरण पूरी तरह से बदल रहे हैं : रूस और पाकिस्तान अब दोस्त बन चुके हैं : रिपोर्ट

दुनियां में नया ‘वर्ल्ड आर्डर’ बन चुका है, पुराने समीकरण पूरी तरह से बदल रहे हैं बल्कि बदल चुके हैं, एक समय जो रूस भारत का सबसे करीबी और भरोसे का साथी था अब वो रिश्ते पुरानी बात हो चुके हैं, इस वक़्त शक्ति के दो ध्रुव नहीं रहे हैं अब एक और महाशक्ति विश्व के सामने है, जिसकी अथात ताकात के सामने अमेरिका को भी घुटने टेकने पड़ते हैं, वो है चीन

चीन ने हर तरह से अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है और आज वो किसी के भी दबाव में नहीं है, नए ‘वर्ल्ड ऑडर’ के तहत जो ग्रुप बने हैं
– रूस के ग्रुप में चीन, पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान, ईरान, तुर्की, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका, मैंम्मार, नार्थ कोरिया, सेंट्रल एशिया के अन्य देश

– अमेरिका, अमेरिका के ग्रुप में इस्राईल, फ्रांस, UK, स्पेन, भारत व् क्वॉर्ड के देश

इस न्यू वर्ल्ड आर्डर की धुरी पाकिस्तान बना है, चीन को अपने सी-पैक के लिए पाकिस्तान की ज़रूरत है, रूस को पाकिस्तान की ज़रूरत ‘गर्म पानियों’ समन्दरों तक पहुँचने और गैस प्रोजेक्ट को एशिया के कई देशों तक ले कर आना है
– अफ़ग़ानिस्तान की शांति का सारा भविष्य पाकिस्तान के ऊपर टिक गया है
– ईरान को पाकिस्तान की ज़रूरत अरब देशों से बैलेंस बना कर रखने और नुक्लेअर प्रोजेक्ट्स को अंजाम तक पहुँचाने का लिए है
– तुर्की और पाकिस्तान आपस में बहुत करीब हैं

पाकिस्तान विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने यहां बुधवार को हुए बैठक में आतंक-रोधी कदमों, सुरक्षा और ऊर्जा के क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की। इससे पहले कुरैशी ने लावरोव का स्वागत किया। लावरोव 2012 के बाद पाकिस्तान आने वाले पहले रूसी विदेश मंत्री हैं।

लावरोव ने मंत्रालय परिसर में पौधरोपण के बाद प्रतिनिधि स्तर की वार्ता की। कुरैशी ने वार्ता की जानकारी देते हुए बताया कि हमने आर्थिक कूटनीति को और प्रोत्साहित करने तथा पाकिस्तान-स्ट्रीम गैस पाइपलाइन परियोजना समेत ऊर्जा सहयोग के क्षेत्र में प्रगति पर चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि हमने आतंकवाद रोधी कदमों समेत सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग की समीक्षा भी की। दोनों विदेश मंत्रियों ने शिक्षा समेत विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के जरिये लोगों के बीच आपसी संपर्क बढ़ाने की जरूर पर भी सहमति जताई। उन्होंने कहा, हम शंघाई सहयोग संगठन की रूपरेखा के तहत आपसी सहयोग को बढ़ाएंगे।


कश्मीर का मसला उठाया
पाकिस्तान जानता है कि भारत और रूस के बीच कई साल पुराने रिश्ते हैं, लेकिन इसके बावजूद उसने सर्गेई लावरोव के साथ बैठक के दौरान कश्मीर मसला उठाया। शाह कुरैशी ने कहा, दक्षिण एशिया में शांति एवं सुरक्षा के मामलों और जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकार संबंधी हालात बेहद अहम हैं।

भारत-पाक में सीधी वार्ता का समर्थन : अमेरिका
अमेरिका ने कहा है कि वह भारत-पाक के बीच आपसी विवाद को सुलझाने के लिए प्रत्यक्ष वार्ता का समर्थन करता है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने हालांकि भारत से चीनी और कपास आयात नहीं करने के पाकिस्तानी कैबिनेट के हालिया फैसले पर कोई टिप्पणी नहीं की।

Dr. S. Jaishankar
@DrSJaishankar
Warm, comprehensive and productive talks with Russian FM Sergey Lavrov.

India-Russia ties are characterised by consistent ability to identify and update shared interests.

Discussed preparations for the Annual Summit later this year.

The A&O Board
@AOBPSF
Foreign Minister of #Russia, Sergey Lavrov arrived at Pakistan Foreign Office for delegation level meetings and was welcomed by foreign minister of #Pakistan, Shah Mehmood Qureshi.

The A&O Board
@AOBPSF
RUSSIA TO SUPPLY MILITARY EQUIPMENT TO PAKISTAN, COOPERATE IN NUCLEAR FIELD

“We are ready to further strengthen the counter-terrorism capacity of Pakistan. This includes supply of military equipment to #Pakistan”, said Foreign Minister of #Russia in Islamabad today at a

Russia’s Lavrov says in talks to make more military equipment in India

Russia and India are discussing the possibility of “additional” production of Russian military equipment in India, Russian Foreign Minister Sergei Lavrov said in New Delhi on Tuesday.

Speaking at a joint news conference with India’s Foreign Minister Subrahmanyam Jaishankar, Lavrov did not specify what kind of equipment could be made in India.

But, officials from both countries have said their governments have been discussing for some years the possibility of making Russian military helicopters in India.

“We have confirmed our determination towards the development of military-technical cooperation,” Lavrov told the news conference, adding there was an inter-governmental commission dealing with the subject.

“It has its own plans, and the prospects for additional production of Russian military equipment on India’s territory are under discussion,” he said.

While such an agreement would fit with Indian Prime Minister Narendra Modi’s flagship make-in-India program, it could irk the United States.

Lavrov said the United States has been trying to discourage countries from buying Russia weapons, but US objections did not feature during his talks with Jaishankar, which had focused on deepening military ties.

Washington has already warned New Delhi that it could face sanctions if it goes through with the purchase of Russian S-400 surface-to-air missile systems under a deal struck in 2018, though it has not made the same threat over other Indian arms purchases from Russia.

The United States has urged India not to buy the S-400 air defense systems as it could trigger sanctions under Countering America’s Adversaries Through Sanctions Act. Turkey was sanctioned last year for buying the same equipment.

India made an initial payment of $800 million in 2019, and the first set of missile batteries are expected to be delivered towards the end of this year.

 

 

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