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रोहिंग्या मुसलमानों की हत्या-जनसंहार में कल तक जिस सेना के साथ थे बौद्ध भिक्षु आज उन्हीं के पीछे पड़ गई सेना

जिस सेना के साथ मिलकर बौद्ध भिक्षुओं ने रोहिंग्या मुसलमानों का कल जनसंहार किया था आज उसी सेना के हमलों के डर से पहाड़ों को खोदकर अपनी जान बचाने के प्रयास कर रहे हैं यह बौद्ध भिक्षु।

म्यांमार में सैन्य विद्रोह के बाद सेना के दमन की कार्यवाहियां चल रही हैं। म्यांमार की सेना प्रदर्शन करने वालों को बख़्श नहीं रही है।

इस बीच सेना अब उन बौद्ध भिक्षुओं को भी नहीं छोड़ रही है जिनके सहयोग से उसने रोहिग्या मुसलमानों का दमन किया था। कल के अपने साथियों की अब दुश्मन हो गई है म्यामांर की सेना। थाईलैण्ड से मिलने वाली म्यामारं की सीमा पर मौजूद भिक्षुओं ने पहाड़ों को खोदकर बंकर बनाने शुरू कर दिये हैं। बौद्ध भिक्षु यह काम सेना अपनी जान बचाने के लिए कर रहे हैं।

म्यांमार की सेना की एयर स्ट्राइक के बाद बहुत से बौद्ध भिक्षु, थाईलैण्ड की ओर पलायन कर रहे हैं। यह लोग अब बार्डर के पास जा छिपे हैं। अपनी जान बचाने के लिए यह भिक्षु पहाड़ों को खोदकर अपने लिए शरण हासिल कर रहे हैं। भिक्षुओं को यह डर सता रहा है कि उनकी तलाश में म्यामार की सेना कहीं पर भी हमला कर सकती है।

याद रहे कि म्यामार के रख़ाईन प्रांत में रोहिंग्या मुसलमानों के विरुद्ध बहुत भयानक अत्याचार किये गए थे। उनके घरों को जलाया गया और उनकी संपत्ति छीन ली गई साथ ही व्यापक स्तर पर रोहिग्या मुसलमानों का जनसंहार भी किया गया था। मुसलमानों को यातनाएं देने में म्यांमार की सेना और वहां के बौद्ध भिक्षु भी शामिल थे जो सेना के साथ मिलकर रोहिंग्या मुसलमानों पर अत्याचार कर रहे थे।

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