धर्म

अमीरुल मोमेनीन हज़रत अली इब्ने अबी तालिब की शहादत की बरसी पर पूरा इस्लामी जगत शोकाकुल

1 मई को नजफ़ में हज़रत अली के रौज़े का मंज़र (बाएं) 3 मई को उनकी शहादत की पूर्व संध्या पर मशहद में इमाम रज़ा के रौज़े का मंजर (दाएं)

आज अमीरुल मोमेनीन हज़रत अली इब्ने अबी तालिब की शहादत की बरसी पर पूरा इस्लामी जगत शोकाकुल है।

ईरान, इराक़, पाकिस्तान और भारत सहित पूरी दुनिया में मुसलमान हज़रत अली इब्ने अबी तालिब की शहादत पर शोकाकुल है। इस मौक़े पर पूरे ईरान में शोक का माहौल है।

मस्जिदों और इमामबाड़ों में काले झंडे लगे हुए हैं। लोग अपनी दुकानों व घर के दरवाज़े पर काली पट्टियां लगाकर हज़रत अली अलैहिस्सलाम की शहादत पर अपना शोक प्रकट कर रहे हैं।

शहादत की पूर्व संध्या पर सोमवार को पूरे ईरान में मन्हूस कोरोना वायरस की वजह से एसओपीज़ को मद्देनज़र रखते हुए शोक सभाओं का आयोजन हुआ जिसमें लोग एसओपीज़ का ख़्याल रखते हुए शामिल हुए। इसी तरह लोगों ने इस रात को इबादत में गुज़ारा। इस्लामी रवायत के मुताबिक़ इक्कीस की रात भी शबे क़द्र है। जिसे पवित्र क़ुरआन में 1000 महीनों से बेहतर कहा गया है।

ग़ौरतलब है कि सन 40 हिजरी क़मरी को 19वीं रमज़ान की सुबह कूफ़े की सबसे अहम मस्जिद, जो मस्जिदे कूफ़ा के नाम से मशहूर है, दुनिया के सबसे दुष्ट व्यक्ति इब्ने मुल्जिम मुरादी ने मुसलमानों के ख़लीफ़ा व शियों के पहले इमाम हज़रत अली अलैहिस्सलाम के सिर पर ऐसी हालत में तलवार से वार किया जब आप नमाज़ में सजदे में हालत में थे। 21वीं रमज़ान मुबारक को आप शहीद हो गए।

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