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अमेरिका ने अफ़ग़ान युद्ध में दो ट्रिलियन डॉलर खर्च किया : सुपर पावर अमेरिका का सारा घमंड तालिबान ने चकना चूर कर दिया : रिपोर्ट

अफ़ग़ानिस्तान का युद्ध अमेरिका की तबाही लेकर आया था, अमेरिका को उम्मीद थी कि एक-दो सप्ताह के अंदर वो अफ़ग़ानिस्तान में जीत जायेंगे और दुनियांभर में उनका दबदबा बढ़ जायेगा लेकिन जैसा अमेरिका ने सोचा था यहाँ उसके बिलकुल उलट हुआ, आज अमेरिका अफ़ग़ानिस्तान से जान बचा कर भाग रहा है, उसके लाखों सैनिक मानसिक रूप से बीमारियों का शिकार हो गए है, जानकारी के मुताबिक इन मानसिक रोगी सैनिकों की संख्या 9 लाख है जबकि तीन लाख सैनिक वृद्धाश्रमों में जीवन बिता रहे हैं, रिपोर्ट के मुताबिक अफ़ग़ानिस्तान युद्ध में शामिल होने वाले 22 अमेरिकी सैनिक मानसिक तनाव की वजह से आत्महत्या कर लेते हैं

अफ़ग़ानिस्तान अमेरिका के लिए क़ब्रिस्तान बना गया, अमेरिका और उसके तमाम सहियोगी पूरा ज़ोर लगाने के बाद भी मुट्ठीभर तालिबान के सामने घुटने टेकने पर मजबूर हो गए, इस समय जब वो जा रहे हैं तब भी उनके लिए तालिबान ने कोई नरमी नहीं दिखाई है, तालिबान ने साफ़ कर दिया था कि अगर एक मई तक अमेरिका ने अफ़ग़ानिस्तान नहीं छोड़ा तो उनके ऊपर हमले किये जायेंगे, डरे हुए अमेरिका ने समय से पहले ही बिस्तर बाँध लिए, उस यहाँ तक कहना पड़ा ‘हम जा रहे हैं, हमारे ऊपर हमले मत करना’, एक सुपर पावर का सारा घमंड तालिबान ने चकना चूर कर दिया है


अफ़ग़ानिस्तान और क्षेत्र के लोग अमेरिकी सैनिकों के निष्कासन से क्यों खुश हैं?

क्षेत्रीय मामलों के एक प्रसिद्ध विश्लेषक ने अमेरिकी सैनिकों के अफ़ग़ानिस्तान से वापस जाने के कारणों की समीक्षा की है।

अब्दुलबारी अतवान ने 20 वर्षों के बाद अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के संबंध में अपने लेख में लिखा है कि अमेरिका ने दो मई से आधिकारिक रूप से अफ़ग़ानिस्तान से अपने लगभग 3500 सैनिकों को निकालना आरंभ कर दिया है।

अब्दुलबारी अतवानी ने लिखा है कि अमेरिका ने यह क़दम उस समय उठाया है जब अफ़ग़ानिस्तान में उसके ढ़ाई हज़ार सैनिक मारे जा चुके हैं। उन्होंने लिखा है कि अमेरिका ने अफ़ग़ान युद्ध के लिए दो ट्रिलियन डॉलर खर्च किया है। अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों का निष्कासन न केवल अमेरिकी पराजय की स्वीकारोक्ति है बल्कि पूर्व एशिया और उत्तरी यूरोप में नया युद्ध आरंभ करने की तत्परता की घोषणा भी है।

अमेरिका के रक्षामंत्री जनरल लोएड आस्टिन ने कल प्रशांत महासागर में अमेरिका की सैनिक छावनी के निरीक्षण के दौरान बल देकर कहा था कि हम निकट भविष्य में संभावित लड़ाई के लिए तैयार हैं और वह पारंपरिक लड़ाई की भांति नहीं होगी जो प्रतिरक्षामंत्रालय को थका दे और वह लंबे समय तक उसकी प्रतीक्षा करे।

जनरल लोएड आस्टिन ने अपने बयान में चीन और रूस को अमेरिका के अस्ली दुश्मन के रूप में याद किया। उन्होंने इस विषय की ओर संकेत नहीं किया कि अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों का निष्कासन इन दुश्मनों से मुकाबला न कर पाने का परिणाम है कि दिन- प्रतिदिन उनकी शक्ति में वृद्धि हो रही है।

जानकार हल्कों का मानना है कि रूस और चीन के मध्य गठजोड़ और निकटता अमेरिकी चिंता का कारण है और दिन- प्रतिदिन इन देशों की शक्ति में वृद्धि हो रही है और इन देशों की निकटता की वजह से अमेरिका की बहुत चालों पर पानी फिर गया है। यही नहीं ये देश आये दिन नये व आधिनुमतम हथियारों का अनावरण करते हैं जो सैन्य क्षेत्र में उनकी बढ़ती सैन्य शक्ति का चिन्ह है।

बहरहाल बहुत से जानकार हल्कों का मानना है कि अफ़ग़ान जनता और क्षेत्र के लोग अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों के निष्कासन से खुश हैं क्योंकि उनका मानना है कि अफ़ग़ानिस्तान और क्षेत्र की बहुत सी समस्याओं की जड़ अमेरिकी और विदेशी सैनिकों की उपस्थिति है और इन सैनिकों के अफ़ग़ानिस्तान से चले जाने से न केवल बहुत सी समस्याओं का समाधान हो जायेगा बल्कि बहुत सी समस्यायें अस्तित्व में ही नहीं आयेंगी।

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