साहित्य

#एक_माँ_की_मुहब्बत_की_यह_कहानी_आप_को_रूला देगी____●●●●●●●●

मेरी मां की एक ही आंख थी ,और वह मेरे स्कूल के किचन में खाना बनाती थी ,

जिसकी वजह से मैं बहुत शर्मिंदा रहता था और उससे नफरत करता था मैं जब पांचवी क्लास में था तो वह मेरी क्लास में मेरी हालचाल पूछने आई मैं बहुत गुस्सा हुआ तिलमिलाया उसको मुझे इस तरह से बेइज्जत करवाने की हिम्मत कैसे हुई उसके बाद मैं उसकी तरफ लापरवाही करने लगा
और उसको झिड़कने लगा और इग्नोर करने लगा अगले दिन एक मेरे क्लास वाले ने मुझसे कहा तुम्हारी मां की सिर्फ एक आंख है उस वक्त मेरा जी चाहा कि मैं जमीन में गड़ जाऊं और मैंने मां से कहा कि मुझसे अलग हो जाओ और मैंने अलग होने का फैसला कर लिया

मैंने जाकर कहा मां से मैं तुम्हारी वजह से स्कूल में मजाक बना हुआ हूं तुम मेरी जान छोड़ दो मेरे पास मत रहो लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया मुझे नहीं मालूम था कि मैं क्या कह रहा हूं मैं मां के रद्दे अमल का एहसास किए बगैर शहर छोड़ कर चला गया

मैंने मेहनत की बहुत मेहनत के साथ पढ़ा पढ़ता रहा मुझे एक गैर मुल्क में तालीम हासिल करने के लिए स्कॉलरशिप मिल गई तालीम मुकम्मल करने के बाद मैंने उसी मुल्क में नौकरी कर ली और शादी करके रहने लगा

एक दिन मेरी मां हमें मिलने आई उसे मेरी शादी और बाप बनने का इल्म ना था वह दरवाजे के बाहर खड़ी रही और मेरे बच्चे उसका मजाक उड़ाते रहे मैं मां पर चीखा तुमने यहां आकर मेरे बच्चों को डराने की हिम्मत कैसे की

बड़ी खामोशी से उसने कहा माफी चाहती हूं मैं गलत जगह पर आ गई हूं और वह चली गई एक दिन मुझे अपने बचपन के शहर से एक पार्टी में शामिल होने का दावतनामा मिला जो मेरे स्कूल में पढ़े हुए बच्चों की पुरानी यादों के सिलसिले में था मैंने अपनी बीवी से झूठ बोला कि मैं दफ्तर के काम से जा रहा हूं इस स्कूल में उस मजलिस के बाद मेरा जी चाहा कि मैं उस मकान को देखूं जहां मैं पैदा हुआ

और अपना बचपन गुजारा मुझे हमारे पुराने पड़ोसी ने बताया कि मेरी मां मर चुकी है जिसका मुझे कोई अफसोस नहीं हुआ हमसाए ने मुझे एक खत दिया वह माँ ने मेरे लिए दिया था मैं दिल पर हाथ रख कर लिफाफा खोला और खत को पढ़ने लगा

लिखा था मेरे प्यारे बेटे सारी जिंदगी तू मेरे ख्यालों में बसा रहा मुझे अफसोस है कि जब तुम मुल्क से बाहर रिहाईश अख्तयार कर चुके थे तो मैंने तुम्हारे बच्चों को डराकर तुम्हें बेजार किया

जब मुझे मालूम हुआ कि तुम अपने स्कूल की मजलिस में शामिल होने के लिए आओगे तो मेरा दिल बाग-बाग हो गया मुश्किल सिर्फ यही कि मैं अपनी चारपाई से उठ ना सकती थी कि तुम्हें जाकर देखु

फिर जब मैं सोचती हूं कि मैंने हमेशा तुम्हें बेइज्जत करवाया है तो मेरा दिल टूट जाता है क्या तुम जानते हो कि जब तुम अभी बहुत छोटे थे एक दुर्घटना में तुम्हारी एक आंख खराब हो गई थी दूसरी मां की तरह मैं भी अपने जिगर के टुकड़े को एक आंख के साथ पलता बढ़ता खेलता नहीं देख सकती थी और अपने साथियों के ताने सुनता नहीं देख सकती थी इसलिए मैंने अपनी एक आंख तुम्हे दे दी

जब आप्रेशन कामयाब हुआ तो मेरा सर फक्र से बुलंद हो गया था कि मेरा बेटा दोनों आंखों वाला बन गया और वह दुनिया को मेरी आंख से देखेगा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *