सेहत

देश में फैला नया म्यूटेटेड आरटी-पीसीआर टेस्ट को भी चकमा दे रहा है : पूरी दुनिया कोरोना वायरस के आगे लाचार क्यों है?

बढ़ते मामलों के कारण तुर्की को पिछले हफ्ते पहली बार लॉकडाउन लगाना पड़ा। बीते हफ्ते ही ईरान में एक दिन में सबसे ज्यादा मामले सामने आने का रिकॉर्ड बना। ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने कहा है कि देश कोविड-19 महामारी की चौथी लहर झेल रहा है।

कोरोना महामारी की नई लहर से भारत के अलावा कई अन्य देश भी परेशान हैं। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर पूरी दुनिया इस वायरस के आगे इतनी लाचार क्यों है? दुनिया के आठ अरब लोगों पर मंडराता यह संकट कैसे खत्म होगा? यदि टीकाकरण ही है इसका समाधान तो इतनी बड़ी मात्रा में वैक्सीन कैसे लग पाएंगे?

ईरान झेल रहा चौथी लहर
बढ़ते मामलों के कारण तुर्की को पिछले हफ्ते पहली बार लॉकडाउन लगाना पड़ा। बीते हफ्ते ही ईरान में एक दिन में सबसे ज्यादा मामले सामने आने का रिकॉर्ड बना। ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने कहा है कि देश कोविड-19 महामारी की चौथी लहर झेल रहा है। उधर लैटिन अमेरिकी देश ब्राजील में बड़ी संख्या में नए संक्रमण और मौतों पर काबू पाना मुश्किल बना हुआ है।

पश्चिम देशों में नई लहर की आशंका
अमेरिका की जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के मुताबिक प्रति 10 लाख आबादी के अनुपात में सबसे ज्यादा मौतें अब भी ब्राजील में ही हो रही हैं। इससे पश्चिमी देशों में भी नई लहर की आशंका गहरा रही है, जो कुछ दिन पहले तक आम जिंदगी शुरू करने की योजना बना रहे थे।

वैक्सीन के पेटेंट खत्म करने की संभावना
गहराते संकट के कारण जिनेवा स्थित विश्व व्यापार संगठन (डब्लूटीओ) में कोरोना वैक्सीन पर से पेटेंट हटाने या स्थगित का मामला गरमाता जा रहा है। अगर पेटेंट (बौद्धिक संपदा अधिकार) को हटाया गया, तो जिस फॉर्मूले से कंपनियों ने वैक्सीन तैयार किए हैं, उसकी तकनीक और उन वैक्सीन को बनाने का ज्ञान उन्हें अलग-अलग देशों की वैक्सीन निर्माता कंपनियों से साझा करना होगा। उससे इन वैक्सीन के डोज ज्यादा बड़ी संख्या में तैयार किए जा सकेंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना वायरस पर काबू पाने का एकमात्र उपाय पूरी दुनिया में सबका टीकाकरण ही है। 

टीकों पर धनी देशों का कब्जा
दुनिया में इस समय वैक्सीन डोज की बेहद कमी है। जो डोज फाइजर-बायोएनटेक, मॉडर्ना, जॉनसन एंड जॉनसन और एस्ट्राजेनेका कंपनियों ने बनाए हैं, उनके ज्यादातर हिस्से पर धनी देशों ने कब्जा कर लिया है। इसलिए ज्यादातर विकासशील देशों को चीन और रूस के वैक्सीन पर निर्भर करना पड़ रहा है। 

चीन के वैक्सीन को जल्द मंजूरी
ऐसी खबर है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन जल्द ही चीन में बने वैक्सीन को अपनी मंजूरी देने वाला है। एस्ट्राजेनेका, जॉनसन एंड जॉनसन और दोनों चीनी कंपनियों के वैक्सीन की खासियत यह है कि इन्हें सामान्य रेफ्रिजरेटर के तापमान पर रखा जा सकता है। इसलिए विकासशील देशों में इन्हें लाना-ले जाना आसान है। फाइजर और मॉडर्ना के वैक्सीन के साथ ये सुविधा नहीं है।

गरीब देशों को चीन देगा एक करोड़ डोज
विकासशील और गरीब देशों को वैक्सीन सप्लाई करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन की देखरेख में चलाए जा रहे कार्यक्रम कॉवैक्स को चीन ने एक करोड़ डोज देने का वादा किया है। इसके अलावा अलग-अलग देशों से द्विपक्षीय समझौतों के तहत वह उन्हें दस करोड़ डोज भेज चुका है। इनमें बड़ी संख्या में वैक्सीन डोज अनुदान के रूप में दिए गए हैं। 

पहली प्राथमिकता लोगों की जान बचाना : थॉमस बोलिकी
अमेरिकी थिंक टैंक काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशन्स में ग्लोबल हेल्थ प्रोग्राम के निदेशक थॉमस बोलिकी ने अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन को बताया कि इस समय पहली प्राथमिकता नए संक्रमणों को रोकना और लोगों को मरने से बचाना है। ऐसे में चीन का वैक्सीन अनुदान देना खुशी की बात है, लेकिन वह ऐसा अपने रणनीतिक हितों के मुताबिक कर रहा है। उसने लगभग 65 देशों को वैक्सीन देने का वादा किया है, जिनमें ज्यादातर वे देश हैं, जो चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का हिस्सा हैं।

सभी कंपनियां स्थगित करें पेटेंट तो ही सभी को लग पाएंगे टीके
विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक सभी कंपनियां कोरोना वैक्सीन के अपने पेटेंट स्थगित नहीं करतीं, दुनिया की लगभग आठ अरब की पूरी आबादी का टीकाकरण संभव नहीं होगा। हालांकि पेटेंट हटने के बाद भी उत्पादन की समस्या बनी रहेगी। वैक्सीन उत्पादन की क्षमता सीमित देशों के पास ही है। 

विशेषज्ञों ने अनुमान लगाया है कि अगले छह से 12 महीनों तक वैक्सीन सप्लाई में बाधा बनी रहेगी। टर्की के स्वास्थ्य मंत्री फहरतिन कोका ने पिछले हफ्ते कहा कि उनके देश के लिए अगले दो महीने तक वैक्सीन हासिल करना मुश्किल बना रहेगा। टर्की ने रूसी वैक्सीन स्पुतनिक-वी के पांच करोड़ डोज मंगवाने का करार किया है। इसके अलावा वह अपने देश के अंदर भी वैक्सीन तैयार करने की कोशिशों में जुटा हुआ है। क्यूबा में पांच वैक्सीन तैयार करने पर काम चल रहा है, जिनमें दो तीसरे चरण के परीक्षण में हैं। 

पहले पांच महीनों के बराबर मामले एक हफ्ते में आए
लेकिन अभी कुल सूरत यह है कि वैक्सीन की सप्लाई छिटपुट बनी हुई है, जबकि कोरोना वायरस के नए रूप और संक्रमण की नई लहर ने दुनिया को फिर से ऐसा लगता है कि वहीं पहुंचा दिया है, जहां ये एक साल पहले थी। बल्कि स्थिति उससे भी काफी बुरी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ध्यान दिलाया है कि पिछले हफ्ते दुनिया में नए संक्रमण के उतने मामले सामने आए, जितने महामारी आने के बाद पहले पांच महीनों में आए थे। 

 

देश में फैला नया म्यूटेटेड वायरस आरटी-पीसीआर टेस्ट को भी चकमा दे रहा है

डॉ. राजन गांधी
जनरल फिजिशियन, चाइल्डकेयर हॉस्पिटल, उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
डिग्री- एम.बी.बी.एस, डिप्लोमा सी.एच
अनुभव- 25 वर्ष 

देशभर में कोरोना के मामले तेजी से तो बढ़ ही रहे हैं, साथ ही लक्षण दिखने के बावजूद आरटी-पीसीआर टेस्ट की निगेटिव रिपोर्ट भी चिंता का सबब बनी हुई है। दरअसल, कई ऐसे कोरोना मरीज हैं, जिनमें लक्षण साफ-साफ दिख रहे हैं, लेकिन उसके बावजूद टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे स्वाब गलत तरीके से लिया गया हो या फिर ऐसा भी माना जा रहा है कि देश में फैला नया म्यूटेटेड वायरस आरटी-पीसीआर टेस्ट को भी चकमा दे रहा है।

विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर आपको कोरोना के लक्षण दिख रहे हैं, लेकिन आरटी-पीसीआर टेस्ट की रिपोर्ट निगेटिव आई है, तो ऐसे में आपको सबसे पहले तो आइसोलेट हो जाना चाहिए और डॉक्टर की सलाह पर उपचार शुरू कर देना चाहिए। 

डॉक्टर की ही सलाह पर कुछ दिन के बाद आपको फिर से टेस्ट कराना चाहिए और अगर फिर भी रिपोर्ट निगेटिव आती है, तो ऐसे में सीटी-स्कैन कराने की सलाह दी जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सीटी स्कैन से महत्वपूर्ण जानकारियां मिल सकती हैं।

क्या है एचआरसीटी टेस्ट? 
एचआरसीटी टेस्ट का मतलब होता है हाई रेजोल्यूशन सीटी स्कैन। इस टेस्ट से पता चल जाता है कि आप कोरोना से संक्रमित हैं या नहीं। दरअसल, यह टेस्ट मरीज की छाती के अंदर कोरोना संक्रमण की थ्री-डी तस्वीर देता है। इसमें कोरोना वायरस पकड़ में आ ही जाता है। 

कब कराना चाहिए एचआरसीटी टेस्ट? 
विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर कोरोना मरीज को खांसी है, सांस लेने में दिक्कत महसूस हो रही है और ऑक्सीजन का स्तर लगातार नीचे जा रहा है तो एचआरटीसी टेस्ट कराना बेहतर होता है। यह टेस्ट बीमारी की तीव्रता दिखा सकता है। इससे मरीज को सही इलाज लेने में मदद मिलती है। 

क्या एचआरसीटी टेस्ट के नुकसान भी हैं? 
विशेषज्ञ कहते हैं कि एचआरसीटी टेस्ट कराने का जोखिम भी हो सकता है। कोरोना के जो मरीज मध्यम से गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं, उन्हें ही इसे करना चाहिए और वो भी डॉक्टर की सलाह पर, लेकिन ध्यान रहे कि इसके रेडिएशन के कारण बुरे प्रभाव का खतरा भी होता है।

इस बारे में सरकार का भी कहना है कि एक सीटी स्कैन 300-400 बार कराए गए चेस्ट एक्स-रे के बराबर होता है। हालांकि कोरोना के हल्के लक्षण हैं तो सीटी स्कैन कराने की कोई जरूरत नहीं है, लेकिन ध्यान रहे कि बार-बार स्कैन कराने से कम उम्र के लोगों में कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। 
नोट: डॉ. राजन गांधी अत्यधिक योग्य और अनुभवी जनरल फिजिशियन हैं। इन्होंने कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से अपना एमबीबीएस पूरा किया है। इसके बाद इन्होंने सीएच में डिप्लोमा पूरा किया। फिलहाल यह उजाला सिग्नस कुलवंती अस्पताल, कानपुर में मेडिकल डायरेक्टर और सीनियर कंसल्टेंट फिजिशियन के तौर पर काम कर रहे हैं। यह आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के आजीवन सदस्य भी हैं। डॉ. राजन गांधी को इस क्षेत्र में 25 साल का अनुभव है। 

अस्वीकरण: तीसरी जंग हिंदी में प्रकाशित लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है।  तीसरी जंग हिंदी लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 

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