साहित्य

बहुत रफतार से लोगों करोना आ रहा है…किसी को कफ़न पहिनाने की अब फुर्सत नहीं है!

बहुत रफतार से लोगों करोना आ रहा है
इसी के खौफ से इन्सान अब घबरा रहा है
किसी मययत को नहलाने की।
जरूरत ही नहीं है
किसी को कफ़न पहिनाने की अब फुर्सत नहीं है
मशीनों से गड़े को खोद कर दफना रहा है
जगह कब्रों को कब्रिस्तान
बाकी। नहीं है
किशमशानो में भीतो
लम्बी। अब लाइन लगी है
बहुत मुश्किल से घंटों
बाद नम्बर आफ रहा है
मरीज अब आक्सीजन के लिए चिल्ला रहा। है
तसल्ली दे रहे हैं आक्सीजन आ रहा है
तड़प करके हर बीमार मरता था
रहा है
कौन लाकर के दे अब
आक्सीजन डाक्टरों को
सियासत सेही अब फुर्सत
नहीं है रहबरों को
इलेक्शन को हर एक अब
रैलियां करबा रहा है
गुनाह हमने किते है मुआफ‌ कर
हर खता को
तू कर दे। खत्म दुनियां से
करोना की बबाको
तू रहमत वाला है कुरान ये फरमा
रहा हे
हिफाजत अब तो हमको
अपनी करना है जरूरी
लगाओ मास्क को और रखो
दो मीटर की। दूरी
ये सागर तुमको अब
जवानियां बतला रहा है

बका उल्लाह खान सागर भरगैनवी

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