इतिहास

महान मुग़ल बादशाह अकबर के नवरत्न तानसेन और उनके पीर सूफ़ी मुहम्मद गौस ख़ान का ग्वालियर में मौजूद मक़बरा

मुग़ल बादशाह अकबर के नवरत्न तानसेन और उनके पीर सूफ़ी मुहम्मद गौस खान का ग्वालियर में मौजूद मक़बरा। ये वही तानसेन थे जिन्हें पाने के लिए अकबर ने जंग का ऐलान कर दिया था।

तानसेन के पिता मकरंद पाल ने सूफ़ी मोहम्मद गौस से एक बेटे के लिए दुआ करवाई थी, उनकी दुआ से ही त्रिलोचन (तानसेन) का जन्म हुआ। तानसेन शुरू से ही संगीत में माहिर थे शुरू में वह शेरशाह शूरी के बेटे दौलत खां के पास रहे और उसके बाद रीवा के राजा रामचंद्र के दरबारी गायक बन गए।

तानसेन के गायकी के चर्चे पूरे हिंदुस्तान में होने लगे बात मुग़ल बादशाह अक़बर तक भी पहुंच गई। अक़बर ने रीवा के राजा के पास पैग़ाम भेज कर तानसेन को मांगा राजा ने देने से इंकार कर दिया। गुस्साए अक़बर ने सेना की एक छोटी टुकड़ी रीवा पर आक्रमण के लिए भेज दी जिसे राजा ने हरा दिया और सैनिको को क़त्ल कर दिया गया। इस बार अक़बर ख़ुद एक सेना लेकर रीवा पर आक्रमण के लिए चल पड़े जैसे ये खबर राजा को मिली उसने अक़बर के पास एक सन्देश भेजवाया अगर वह तानसेन को हमसे विनिती कर के मांगेंगे तो हम दे देंगे। अक़बर ने तानसेन के लिए यह स्वीकार कर लिया। इस तरह तानसेन अक़बर के नवरत्नों में शामिल हो गए। और ताउम्र अक़बर के ख़ास बनकर रहे।

1589 में जब उनकी वफ़ात हुई तो उन्होंने इच्छा ज़ाहिर की के मरने के बाद उन्हें उनके गुरु सूफ़ी मुहम्मद गौस के बगल में दफ़न किया जाए। उनकी वसीयत के मुताबिक वैसा ही किया गया।

मशहूर गायक केएल सहगल, तानसेन के मकबरे पर खास तौर से यहां के इमली के पेड़ की पत्तियां खाने आए थे। संगीत जगत के और भी बड़े-बड़े फनकार यहां पत्तियां खाने आते थे। कहा जाता है कि इस पेड़ की पत्तियां खाने से गला सुरीला हो जाता है। जो की अंधविश्वास है ऐसा कुछ नही होता

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *