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ईरान की तरफ़ से सऊदी अरब को लेकर ऐसा बयान आया है जिसका मुस्लिम क़ौम को हमेशा इन्तिज़ार रहा है : रिपोर्ट

अरब में दो ऐसे देश हैं जिनके सम्बन्ध आमतौर पर हमेशा ही ख़राब रहे हैं/थे, ये देश हैं सऊदी अरब और ईरान, लेकिन अब इन देशों के रिश्ते बहुत अच्छे हो चुके हैं, तीसरी जंग हिंदी में हम कई बार ईरान-सऊदी अरब की रिश्तों पर डिटेल रिपोर्ट पेश कर चुके हैं मगर आज की ख़बर लिखते वक़्त ख़ुशी महसूस हो रही है, ख़ुशी की बात ये है कि ईरान की तरफ से ऐसा बयान आया है जिसका मुस्लिम कौम को हमेशा इन्तिज़ार रहता था

ईरान ने कहा है कि वो ”आज” सुबह को ही सऊदी अरब में अपना राजदूत भेजने को तैय्यार हैं इसके लिए बस रियाद के आदेश का इन्तिज़ार है, बता दें कि 2016 में एक मामले को लेकर सऊदी अरब और ईरान ने अपने-अपने राजदूतों को वापस बुला लिया था, उस वक़्त से अभी तक दोनों देशों के राजनयिक सम्बन्ध टूटे हुए थे

ईरान और सऊदी अरब की सुलह करवाने में सबसे बड़ा किरदार पाकिस्तान ने निभाया है, इमरान खान ने पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बनने के बाद ईरान की यात्रा की थी और उसके बाद वो सऊदी अरब की यात्रा पर गए थे, इमरान खान असल में उस समय मिशन ‘फ्रेंडशिप’ के तहत गए थे, इमरान खान की वो यात्रायें इस्लामिक देशों में दोस्ती की पहल के तहत तै की गयीं थीं


क्राउन प्रिंस बिन सलमान के वक़्त में अरब देशों समेत बाकी इस्लामिक देशों के बीच तल्खियां बहुत बढ़ गयी थीं, सऊदी अरब ने तब क़तर के खिलाफ फौजी कार्यवाही करने का मन बना लिया था, तुर्की से खाशोगी मर्डर के बाद सम्बन्ध बेहद बुरे हो गए थे, पाकिस्तान के ख़िलाफ़ क्राउन प्रिंस बिन सलमान ने अनेक षड्यंता रच डाले थे, मलेशिया से सऊदी अरब के मामलात कश्मीर पर मलेशिया के बयानों को लेकर बिगड़ गए थे, उस समय सऊदी क्राउन प्रिंस बिन सलमान अमेरिका, इस्राईल और भारत के साथ क्लब बना चुके थे, लेकिन कहानी में बड़ा बदलाव अमेरिकी चुनावों में ट्रम्प की शिकश्त के बाद आया, बाइडेन ने अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के तुरंत बाद खशोगी हत्या में बिन सलमान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और सऊदी अरब से अमेरिकी सेना, सैन्य उपकरण बाहर निकाल लिए, मामले की संजीदगी को देखते हुए किंग सलमान आगे आये और उन्होंने सऊदी अरब की हुकूमत की कमान अपने हाथों ली और क्राउन प्रिंस को अलग कर दिया, किंग सलमान ने सबसे पहले तुर्क राष्ट्रपति को खुद कॉल की, उस के बाद अपने मंत्री की पाकिस्तान भेजा, क़तर से मामलात को फ़ौरन दुरुस्त किया, और इस तरह से अरब की राजनीती में बड़े बदलाव देखने को मिले, अभी हाल ही में इस्राईल से फिलस्तीन की जंग में सऊदी अरब ने खुल कर फ़िलस्तीन की न सिर्फ हिमायत की बल्कि ईरान के ज़रिये हमास को बड़ी रसद भी भेजी


बाइडेन के अमेरिका राष्ट्रपति बनने और खशोगी हत्या में प्रिंस सलमान के खिलाफ कार्यवाही करने के हुकुम के बाद किंग सलमान ने तुर्क राष्ट्रपति एर्दोगान और इमरान ख़ान से बात कर सऊदी अरब की मदद करने को कहा था, किंग सलमान ने इमरान खान से सऊदी अरब और चीन के मामलात दुरस्त करवाने के लिए कहा जिसके बाद चीन और रूस ने पाकिस्तान और तुर्की को सऊदी अरब और ईरान की बातचीत कारवा कर इनके तमाम मसले हल करवाने के लिए कहा, तभी से ईरान और सऊदी अरब के बीच इराक की राजधानी बग़दाद में तीन दौर की उच्च स्तर पर बातचीत हो चुकी है जिसमे ईरान की तरफ से विदेश मंत्री मुहम्मद जवाद ज़रीफ़ जबकि सऊदी अरब की तरफ से वहां के बड़े मंत्री शामिल हो चुके हैं

इस वक़्त सऊदी अरब की हुकूमत की कमान किंग सलमान ने संभाल रखी है, सूत्रों के मुताबिक सऊदी किंग ने खुद ईरान के सर्वोच्च नेता सैय्यद अयातुल्लाह खमैनी से कई बार फ़ोन पर बात कर अरब में अमन और बाकी मामलात पर चर्चा की है, फिल्हाल सऊदी अरब और ईरान के तमाम मामलात को आपस में हल कर लिया गया है, अरब के इन दो देशों में जो सुलह हुई है उसका क्रेडिट चीन रूस को जाता है जबकि दरमियाँ में किरदार पाकिस्तान और तुर्की ने अदा किया है

अब सऊदी अरब अमेरिका के ग्रुप से निकल कर चीन-रूस के साथ जा चुका है, साथ ही सऊदी अरब फ़िलस्तीन कॉज के साथ भी खुल कर खड़ा है, ईरान और सऊदी अरब की ‘गुप्त’ वार्तायें ‘क़तर’ में भी हुईं थीं, क़तर के ज़रिये सऊदी अरब ने सीरिया से चर्चा कर खुद को सीरिया जंग से अलग कर लिया है वहीँ अब सऊदी अरब यमन के साथ भी जंग बंदी को लेकर ‘ओमान’ में वार्ता कर रहा है

अरब देशों में अमन के लिए ज़रूरी है सऊदी और ईरान के रिश्ते अच्छे रहे

– परवेज़ ख़ान

ईरान, सऊदी अरब में वापस भेजेगा अपना राजदूत

ईरान में सत्ता परिवर्तन होते ही इब्राहीम रईसी के नेतृत्व वाली नई सरकार पहले ही दिन बड़ा कूटनीतिक कदम उठाने जा रही है। ईरान के इस फैसले से पूरे मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक हालात बदल सकते हैं। पांच साल तक सऊदी अरब से राजनयिक संबंध तोड़ने के बाद ईरान ने रविवार को फिर से अपने राजदूत को रियाद भेजने का ऐलान किया है। हालांकि, इसके लिए अभी तक सऊदी ने औपचारिक मंजूरी नहीं दी है। ईरान शिया बहुत देश है जिसका कई मुद्दों पर कट्टर सुन्नी देश सऊदी अरब के साथ विवाद है।

सऊदी के साथ फिर से राजनयिक रिश्ते बहाल करेगा ईरान

ईरान के विदेश मंत्री जवाद जरीफ ने अंताल्या डिप्लोमेसी फोरम में एक भाषण के दौरान कहा कहा कि तेहरान कल सऊदी अरब में अपना राजदूत भेजने को तैयार है। उन्होंने कहा कि ऐसा करने के लिए ईरान को रियाद से हरी झंडी की जरूरत है। ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि उनके विचार में सऊदी अरब के साथ ईरान के संबंधों को बहाल करना संभव था।

बगदाद में ईरान और सऊदी के बीच तीन बार हुई थी बैठक
जरीफ ने कहा कि ईरान ने इराक की राजधानी बगदाद में सऊदी अरब के साथ तीन दौर की बातचीत की थी। इसके बाद ही राजदूत को वापस भेजने का फैसला लिया गया। इस बीच आज शाम को ईरान के राष्ट्रपति चुनाव में कट्टरपंथी इब्राहीम रईसी की जीत ने इस ऐलान को और बड़ा बना दिया है। जरीफ ने कहा कि रईसी की जीत के बाद ईरान अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को और मजबूत करेगा। जरीफ ने आश्वासन दिया कि नए राष्ट्रपति के आने के बावजूद क्षेत्रीय शक्तियों के साथ सुलह की ईरान की विदेश नीति यथावत रहेगी।

ईरान और सऊदी अरब के संबंध कैसे बिगड़े
ईरान और सऊदी अरब के संबंध लंबे समय तक तनावपूर्ण रहे। सऊदी अरब पूरी दुनिया में सुन्नी मुसलमानों का नेता होने का दावा करता है। वहीं, ईरान शिया मुसलमानों का मसीहा बनने का दावा करता है। ईरान में दुनिया के सबसे अधिक शिया मुसलमान रहते हैं। यही कारण है कि पड़ोसी होने के बावजूद दोनों देशों में हमेशा टकराव बना रहा है। साल 2016 में सऊदी अरब ने घरेलू मामलों में अवैध रूप से हस्तक्षेप करने के कथित प्रयासों के आरोप में शिया धर्मगुरु शेख निम्र अल-निम्र को गिरफ्तार कर मार डाला था।

दोनों देशों ने वापस बुलाए अपने-अपने राजदूत
इसके परिणामस्वरूप पूरे ईरान में सऊदी अरब के विरोध में प्रदर्शन शुरू हो गए। गुस्साई भीड़ ने तेहरान में स्थित सऊदी अरब के दूतावास पर हमला कर दिया। उपद्रवियों ने पेट्रोल बम फेंककर सऊदी के दूतावास में आग लगा दी। जिसके जवाब में सऊदी अरब ने ईरानी अधिकारियों को तलब कर अपने राजनयिक मिशन की सुरक्षा में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। इतना ही नहीं, गुस्साए सऊदी ने तेहरान में अपना दूतावास बंद कर सभी कर्मचारियों को वापस बुला लिया। तेहरान ने भी इसकी जवाबी कार्रवाई में रियाद से अपने राजदूत को वापस बुला लिया।

 

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