इतिहास

17 जून 1631 को मुग़ल बादशाह शाहजहां की बेग़म मुमताज़ का इन्तेक़ाल हुआ

आज ही के दिन 17 जून 1631 को मुग़ल बादशाह शाहजहां की बेग़म मुमताज़ का बुराहनपुर में इन्तेक़ाल हुआ। इन्तेक़ाल के बाद उन्हें ताप्ती नदी के किनारे जैनाबाद के मक़बरे में दफनाया गया।

बेग़म मुमताज़ की वफ़ात के बाद शाहजहां दक्कन अभियान छोड़ दिया था एक साल तक ग़म में रहे। उन्होंने अपनी बेग़म की याद में एक ख़ुबसूरत मक़बरा बनाने का हुक़्म दिया।
ताजमहल की तामीर मुकम्मल होने के बाद उनकी क़ब्र को आगरा यमुना नदी के किनारे ताजमहल में दोबारा दफन किया गया। ताजमहल में जो ज़ाहिरी क़ब्र है वो असल क़ब्र नही है ये एक सांकेतिक क़ब्र बनाई गई जिसे महंगे पथरो से सजाया गया। असल क़ब्र नीचे तहख़ाने में है जिसे बिल्कुल सादग़ी से बनाया गया है।

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