साहित्य

दुख्तरे नारंज व तुरन्ज : कहानी : पार्ट 3

पिछले कार्यक्रम में हमने कहा कि एक राजा ने नज़्र किया था कि अगर ईश्वर ने उसे बेटा प्रदान किया तो वह एक हौज़ में तेल और दूसरे हौज़ को शहद से भर देगा और उसे वह निर्धन लोगों के अधिकार में दे देगा।

राजा का लड़का १८ वर्ष का हो चुका था जब उसने अपनी नज़्र पूरी की।

इस बीच राजा के लड़के ने मज़ाक में एक बूढिया के प्याले को तीर मार कर तोड़ दिया। उसके बाद बूढ़ी महिला ने श्राप दे दिया कि जाओ तुम नारंज और तुरंज नाम की लड़की के चक्कर में फंस जाओगे। बूढी महिला का यह कहना था कि वह नारंज व तुरंज लड़की की सोच में पड़ गया। राजा के लड़के ने सारी समस्याओं व कठिनाइयों को तय कर लिया और हर उस कार्य को उसने अंजाम दे दिया जो उससे कहा गया था यहां तक कि वह उस बाग तक पहुंच गया और नारंज व तुरंज के कई पत्ते तोड़ कर लौट आया। नारंज व तुरंज को उसने अपनी जेब से बाहर निकाला।

वह जिस पत्ते को भी फाड़ता था उससे एक सुन्दर लड़की निकलती थी जो रोटी या पानी मांगती थी और लड़का जैसे ही पानी या रोटी देता था लड़की मर जाती थी। लड़का बहुत दुःखी था और उसने अंतिम पत्ते को अपनी जेब में रख लिया और अपने शहर लौट आया। जब वह शहर के निकट आ गया तो उसने वहां पर उसी बूढी महिला को देखा जिसका उसने प्याला तोड़ दिया था और उसने कहा था कि तुम नारंज व तुरंज लड़की की मुसीबत में फंस जाओ। बूढी महिला ने उससे पूछा कि नारंज व तुरंजलड़की तक पहुंचे या नहीं? राजा के लड़के ने बूढी महिला से सारी बात बताई। बूढ़ी महिला ने कहा कि अगर यह चाहते हो कि लड़की न मरे तो जब वह पानी मांगे तो पानी के बजाये रोटी देना और रोटी को उसके मुंह में रख देना और जब रोटी मांगे तो रोटी के बजाये पानी दे देना। यह सुनकर लड़का बहुत प्रसन्न हो गया और बूढी महिला भी ने रास्ता चल दिया।

बहुत ही सुन्दर लड़की जैसे ही नारंज व तुरंज के पत्ते से बाहर निकली कहा रोटी परंतु राजा के लड़के ने रोटी के बजाये उसे पानी दिया, लड़की ने पानी पिया। जब लड़की पानी पी कर बड़ी होती गयी यहां तक वह एक वास्तविक लड़की के अंदाज़े की हो गयी। उसके बाद उसने राजा के लड़के से कहा तू कौन है? मैं यहां क्या कर रही हूं? राजा के लड़के ने कहा तुम नारंज व तुरंज लड़की हो। मैंने हज़ारों मुश्किलों व समस्याओं का सामना करने के बाद तुम्हें नारंज व तुरंज के बाग से तोड़ा है और मैं चाहता हूं तुम मेरी पत्नी बन जाओ। मैं इस शहर के राजा का एकमात्र बेटा हूं। अब मैं तुम्हें यहां छिपाना चाहता हूं ताकि जाऊं और तुम्हारे लिए कपड़ा लेकर आऊं। मैं इस तरह तुम्हें अपने बाप के महल में ले चलना चाहता हूं जिसके तुम योग्य हो। लड़की ने कहा कि मैं इस पेड़ के ऊपर जाती हूं और तुम जाकर लौट आओ। लड़की पेड़ पर चढ गयी और लड़का शहर की ओर चला गया। संयोग से उस पेड़ के निकट उस व्यक्ति का घर था जो अपनी बीवी- बच्चों और काली दासी के साथ वहीं रहता था। जैसे ही लड़की पेड़ के ऊपर पहुंची काली दासी बच्चे के कपड़े को धोने के लिए नदी के किनारे लेकर पहुंची। जैसे ही उसने पानी पर नज़र डाली लड़की की तस्वीर उसमें दिखाई दे गयी। पहले तो उसने सोचा कि यह उसी की परछाई है जो पानी में दिखाई दे रही है। वह अपने आपको पानी में देखकर बहुत प्रसन्न थी। उसने स्वयं से कहा मैं इतनी सुन्दर हूं!

मुझे पता नहीं था। इस आधार पर उसने सोचा कि घर की मालेकिन भी मेरी नौकरानी बनने की योग्य नहीं है। अब मैं उसकी दासी नहीं रहूंगी। मैं राजा के लड़के की पत्नी बनने की योग्य हूं और घर की मालेकीन जैसी सौ महिलाएं मेरी दासी बनें। दासी कपड़ों को बिना धोये घर ले आयी। घर की मालेकिन ने जैसे ही देखा कि कपड़ों को पानी तक नहीं छुलाया है तो उसने बहुत क्रोधित हो कर कहा कपड़ों को क्यों नहीं धुला? दासी कमरे में चली गयी और उसमें बैठ कर कहा कि मैं इतनी खूबसूरती के साथ कपड़ा क्यों धोऊं?अब तक तूने मुझे बेवकूफ बनाया। अब तक मैंने जितना कर दिया वही काफी है। अब से मैं तुम्हारी दासी नहीं हूं। घर की मालेकिन हंसी और बोली कौन सी सुन्दरता? जाओ स्वयं को आइने में देखो ताकि तुम्हें पता चल जाये कि तुम कौन हो? दासी आइना देखने के लिए गयी। उसकी नज़र जैसे ही आइने पर पड़ी उसने देखा कि वह बहुत काली है और काली के अलावा बहुत बदसूरत भी है। उसके बाल इधर उधर बिखरे हैं। दासी को अपनी बात पर बड़ा पछतावा हुआ और उसे बड़ी शर्मिन्दगी हुई। उसने कपड़ा उठाया और धुलने चली गयी। जैसे ही वह नदी के किनारे पहुंची उसने पानी में दोबारा वही दृश्य देखा। दासी ने सोचा निश्चित रूप से मालेकिन ने दर्पण को एसा बनाया है कि मैं कुरूप दिखाई दूं ताकि मैं उनकी दासी बनने पर सहमत हो जाऊं और वह मुझसे काम लेती रहें।

यह बातें उसने कहीं और लौट आयी और उसने आइने को तोड़ दिया। घर की मालेकिन ने देखा कि कपड़ा नहीं धुला और इस बार उसने आइना भी तोड़ दिया। वह चिल्लाई और कहने लगी कि तुम पागल हो गयी हो? तुम क्यों इतनी एक्टींग कर रही हो? दासी ने कहा तुम मुझे मूर्ख बनाती रही है। तुमने आइने को इस तरह बनाया है कि मुझे करूप दिखाई दे ताकि मैं हमेशा तुम्हारी दासी बनी रहूं। मालेकिन ने कहा अगर तुम्हें इस आइने पर भरोसा नहीं है तो पड़ोसी के आइने में देखकर आओ। दासी गयी और वह स्वयं को पड़ोसी के आइने में देखकर आयी। उसने देखा कि उसकी मालेकिन सही कह रही है। इस बार भी उसने माफी मांगी और कपड़ लेकर धुलने चली गयी। जैसे ही उसने कपड़ा धुलने के लिए पानी में हाथ डालना चाहा तो पानी में वही सुन्दर लड़की की छाया दिखाई दी। फिर ज़ोर ज़ोर से कहने लगी कि निश्चय ही इन दोनों आइनों को एक ही आदमी ने बनाया है। मैं इतनी सुन्दरता के साथ बच्चे का कपड़ा क्यों धुलूं? पेड़ के ऊपर बैठी लड़की दासी की बात सुन कर हंसने लगी।

दासी ने जैसे ही हंसने की आवाज़ ऊपर से सुनी उसने अपना सिर ऊंचा किया और उसने लड़की को देख लिया और समझ गयी कि पानी में जो तस्वीर दिखाई दी थी वह इसी लड़की की। जल्दी से उसने कपड़ा धुला और घर लौट आयी। घर आकर उसने इस तरह से कपड़ा फैलाया कि उसकी मालेकिन की नज़र न पड़े। दासी ने रसोईघर का चाकू अपने कपड़े में छिपा लिया और पेड़ के नीचे आ गयी और नारंज व तुरंज लड़की से कहा कि मैं भी तुम्हारे पास ऊपर आना चाहती हूं अपनी चोटी नीचे लटका दो। नारंज व तुरंज लड़की बहुत ही भोली भाली थी उसे कुछ पता नहीं और किसी को नहीं जानती थी। उसने अपनी लम्बी चोटी नीचे लटकी दी और दासी उसके सहारे से ऊपर पहुंच गयी। उसने नारंज व तुरंज से पूछा तुम यहां ऊपर क्या कर रही हो?

लड़की ने पूरी कहानी बयान कर दी। दासी ने लड़की से कहा मुझे अपना बाल साफ करने दो, लड़की ने कहा आराम से साफ करो कोई परेशानी की बात नहीं है। जैसे ही लड़की ने बाल साफ कराने के लिए अपना सिर झुकाया दासी ने उसका सिर काट कर पानी में फेंक दिया परंतु उसके खून को नदी के किनारे डाल दिया और नारंगी रंग का पेड़ हरा हो गया। राजा का लड़का जब लौटा कि उसे कपड़ा दे दो तो उसने देखा कि वहां एक बहुत ही डरावना इंसान बैठा है जिसकी ओर देखने की भी किसी में साहस नहीं था पंरतु दासी ने जैसे ही राजा के लड़के को देखा आगे बढ़ी और बोली क्यों इतना देर कर दिये? हर बार इतनी देर करते हो?

एक जोड़ा कपड़ा लाने में इतना समय तो नहीं लगाना चाहिये। राजा का लड़का काली दासी की बातें सुनकर हतप्रभ रह गया जब उसने देखा कि सारी बातें तो सही कह रही हैं तो उसने कहा तुम तो सफेद थी काली कैसे हो गयी? दासी बोली मुझमें सूरज की रोशनी सहन करने की क्षमता नहीं है उसकी धूप ने मुझे काला कर दिया है। राजा के लड़के ने कहा कि तुम्हारे चेहरे में फफोले कैसे निकल आये? दासी ने कहा कौओं ने चोंच मारी है। लड़के ने कहा तुम्हारे लम्बे बाल कहां हैं दासी ने कहा हवा उड़ा ले गया। राजा के लड़के के अंदर पैर उठाने की क्षमता नहीं रह गयी थी। उससे ग़लती हो गयी थी और अब वह बात को खत्म करने के प्रयास में था। वह आगे बढा और उसने वह कपड़ा निकाला जिसे लड़की को देने के लिए ले आया था उसने उस कपड़े को दासी को दिया और दासी उन कपड़ों को पहन कर नीचे आयी। वह जल्दी से रथ पर बैठी और दास उसे राजा के महल की ओर लेकर चल दिये परंतु लड़का जैसे दासी के पीछे चलना चाह रहा था उसकी नज़र नारंज के पेड़ पर पड़ गयी। उसने जल्दी से उसे जड़ से उखाड़ लिया और महल पहुंचने के बाद उसे अपने कमरे के सामने मौजूद बगीचे में लगा दिया।

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