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भारत और इस्राईल दो सागे भाईयों जैसे हैं….अब तो बात बहुत आगे जा पहुंच चुकी है!

इज़रायल की टेक्नोलॉजी बाकी देशों से सबसे अच्छी है, प्रचार की वजह से किसी भी चीज़ को लोग अच्छा मान लेते हैं, 20 वीं और 21 वीं सदी में प्रोपेगंडा सबसे खतरनाक हथियार, साधन साबित हुआ है, अमेरिका, इस्राईल और यूरोपी देश प्रॉपगैंडा का हर मामले में इस्तेमाल करते हैं, दुनियां में इस्राईल प्रोपेगंडा करने के लिए कुख्यात है, ये आतंकवादी देश अपने मीडिया और ख़ुफ़िया एजेंसियों की मदद से देशों, नेताओं की छवि बिगाड़ता है, इस्राईल के पास दुनियां का सबसे बड़ा मीडिया नेटवर्क है, साथ ही ये आतंकी देश अपने मित्र देशों के मीडिया को भी अपने एजेंडे के लिए इस्तेमाल करता है

जब भी अमेरिका, इस्राईल, यूरोप को किसी देश के या नेता के खिलाफ कार्यवाही या युद्ध करना होता है तो इस्राईल अपने तंत्र और मित्र देशों के मीडिया के ज़रिये उस देश और के शासक के खिलाफ एक से खतरनाक रिपोर्ट देखना शुरू कर देते हैं, उस देश और उसके शासक को विश्व शांति के लिए खतरा बताया जाता है, उसके शासक को हद से ज़यादा क्रूर, इंसानियत का दुश्मन, विलासिता में डूबे रहने वाला, अयाश, शराबी, जानवरों से भी ज़यादा बुरा दिखाया जाता है, दिखाया जाता है, उसके बेड रूम तक के फ़र्ज़ी किस्से दिखाए जाते हैं, मर्दाना ताकात बढ़ाने के लिए वो कौन सी दवा का सेवन करता है का भी इस मीडिया को मालूम होता है, सद्दाम हुसैन, कर्नल गद्दाफी, असद बशर, हसन रूहानी, तालिबान, मुल्ला उमर, किम आदि के बारे में इस्राईली मीडिया और एजेंसियों ने इसी तरह से प्रॉपगैंडा किया था, भारत के संघी मीडिया ने भी इस्राईल से संबंधों की वजह से इस प्रॉपगैंडा में अपना पूरा योगदान दिया था, इसी गठबंधन ने मुस्लमान और इस्लाम के खिलाफ दुनियां भर में झूठा प्रॉपगैंडा कर नफ़रत फैलाने का काम किया है

ये मीडिया बहुत अच्छे से नीतिगत स्टेप बाई स्टेप काम करते हैं, भारत और इस्राईल का मीडिया दो सागे भाई जैसे हैं, ये अपने अत्याचार, आतंकवाद को छिपाने के लिए फ़र्ज़ी कहानियां तैयार कर प्रचारित करते रहते हैं, भारत में संघी आतंकवादी का खुलासा होते ही सारा सघ समर्थक, प्रायोजित मीडिया उसके पक्ष में खड़ा हो गया था, बाबरी मस्जिद के मामले में इसी मीडिया ने अदालत तक को प्रभावित करने के लिए खतरनाक समाचार चलाये, जिसका असर भी हुआ और जो फैसला आया था वो कानून के विद्वान जानकारों की भी समझ से परे है, अनेक पूर्व नयायधीषों ने खुल कर इस फैसले को ग़लत बताया

बाबरी मस्जिद विध्वंस का मामला हो या उसके बाद शुरू हुए आतंकवाद की कहानी, भारत के मीडिया ने आँख बंद कर एक धर्म विशेष के खिलाफ तै शुदा नीतिगत, कार्यक्रम के मुताबिक काम किया, इससे हज़ारों लोगों का जीवन और पूरी कौम का भविष्य ख़राब किया, गुजरात कत्ले आम के बाद वहां शुरू हुए आतंकी हमलों में सिर्फ और सिर्फ मुसलमानों को इसी मीडिया ने ‘हिट’ किया, मुंबई दंगों में बर्बाद हुए हज़ारों लोगों को नज़र अंदाज़ कर संघी मीडिया ने अपना पूरा फोकस मुंबई धमाकों पर रखा

भारत के अनेक पूर्व अधिकारी, जज अनेक बार बहुत खुल कर आतंकवाद में संघ परिवार के शामिल होने की बात कहते रहे हैं, मुंबई हाई कोर्ट के पूर्व जज, मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर, भारतीय गृह मंत्रालय का पूर्व संयुक्त सचिव समेत अन्य संघ के आतंकवादी कनेक्टन की कहानियां बयान करते हैं मगर कभी कोई कार्यवाही क्यों नहीं की गयी, बल्कि मामलों को दबा दिया गया, अगर आरोप झूठे हैं तो आरोप लगाने वालों को जेल में डालना चाहिए था, झूठे नहीं हैं ये कार्यवाही न होना खुद साबित कर देता है

पुराना लेख :—–

मेरे पास सबूत हैं, मोहन भागवत ने पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी ISI से 20 करोड़ रूपए लिए हैं : मुंबई हाई कोर्ट के पूर्व जज

भारत में तीन दशकों तक एक वर्ग आतंकवाद के नाम पर मार खाता रहा, हज़ारों लोगों की ज़िन्दिगियां तबाह हो गयीं, कितने ही परिवार कंगाल हो गए,जिस किसी का भी नाम आतंकवाद की घटना से जोड़ दिया जाता था तो तमाम रिश्तेदार, दोस्त, आसपड़ोस के लोग उसके परिवार से खुद को अलग कर लेते थे
बाबरी मस्जिद की 06 दिसंबर 1992 को शहादत के बाद आतंकवाद की कहानी गढ़ी गयी और उसके बाद एक के बाद अनेक घटनाएं होती चली गयीं, हर वारदात के बाद निशाने पर सिर्फ मुस्लमान होता था, घटना के कुछ ही देर के बाद मीडिया आतंकवादियों के नाम, पते, उनके तार, उनके हाथ-पैर कहाँ तक, किस से जुड़े हुए हैं का खुलासा तुरंत कर देती थी

असल में ये ‘गेम’ था जिसे इस्राईल और भारत की ख़ुफ़िया एजेंसियों ने संघ के साथ मिल कर खेला था यही नहीं बाबरी मस्जिद विध्वंस में भी इस्राईल की मिली भगत रही थी, जानकारी और सूत्रों के मुताबिक इस्राइली एजेंसी मोसाद और भारत की ख़ुफ़िया एजेंसी IB के संघ ने जगह जगह धमाके किये, और अपने समर्थक मीडिया से उसका प्रोपेगंडा मुसलमानों के खिलाफ करवाया

भारत के गृहमंत्रालय के संयुक्त सचिव अपने लिखित हलफनामे में अदालत में कहते हैं ”संसद हमला और मुंबई हमला तत्कालीन सरकारों ने करवाए थे’, मुंबई के तत्कालीन पुलिस कमिश्नर मुशरिफ के अनेक वीडियो और लेख सोशल मीडिया में मौजूद हैं जिसमे वो कहते हैं कि ‘मुंबई का हमला संघ ने करवाया था, हेमंत करकरे पर लिखी उनकी किताब ‘who killed karkare’ में उन्होंने मुंबई हमले में संघ के शामिल होने की पूरी डिटेल लिखी है

देशभर में अनेक उच्च पदों पर बैठे लोग हैं जो अनेक बार संघ के आतंकवादी कार्यवाहियों में शामिल होने से पर्दा उठा चुके हैं, यहाँ मुंबई हाई कोर्ट में जज रहे पाटिल का वीडियो में बयान है कि मेरे पास सबूत हैं, मोहन भागवत ने पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी ISI से 20 करोड़ रूपए लिए हैं, इन तमाम लोगों के बयानों पर कभी किसी सरकार या एजेंसी ने कोई कार्यवाही/जाँच नहीं की, वजह बहुत साफ़ है कि अगर जांच की जाती तो मामला दबाया/छुपाया नहीं जा सकता था और संघ के तमाम आतंकी समपर्क जग ज़ाहिर हो जाते

इंसानों के लिए इंसानियत की ज़रूरत होती है, वार्ना हैवानों का राज हो जाता है, अहंकार, ऐंठ, कलाकारी, जादूगरी, जोकरगीरी, फ़र्ज़ीवाड़ा, पाखंड,,,आसाराम,,,न रही आशा, न मिला राम,,,काम कर गया ‘वो’, नाम दे दिया ‘कोरोना’,,GO_GO_e की कोरोना को तलाश है,,,मंदिर, मस्जिद, गुरूद्वारे, गिरजा,,,हवा, पानी, आसमा, धुप, चाँदनी, दिन, रात, फूल, खुशबू,, तुम और हम, मै और तू, मिल जुल कर जीलें, मर तो वैसे भी एक दिन जायेंगे, हंसलो, मुस्कुरालो, झूमों, गालो,,,रोना,,,को-‘रोना’, रुला, देखो सबको रुला रहा है,,,ट्रम्प चाल चल रहा है,,,’वो’ अपनी चाल चल रहा है,,,कोरोना कितने सवालों का जवाब है देखो,,,,परवेज़

 

बोया पेड बबूल का तो आम कहाँ से आयें,,,,

आज का जो हिन्दोस्तान है उसमे हर आदमी असुरक्षित है, भय, भूख, अपराध, हिंसा, भेदभाव, साम्प्रदायिकता, कट्टवाद, चरमपंथ, आतंकवाद, नक्सलवाद, माववाद, बलात्कार, हत्या और अब कोरोना,,,हालात इतने बुरे और खराब हो चुके हैं कि रिज़र्व बैंक की जमा पूंजी लेकर सरकार, सरकार चलाती है, गिराती है, बनाती है, रिज़र्व बैंक को अपना पैसा बैंकों और बाजार में फेंकना पड़ रहा है ताकि बची कूची पूंजी न डूब जाए, कोरोना पूरी दुनियां में फैला है, भारत में भी इसका बहुत असर देखने को मिल रहा है, एक महिने के अंदर देश में अकाल/भुखमरी जैसी इस्थिति हो गयी, सरकार के पास पैसा है, नेताओं के यहाँ अम्बार लगे हैं, धार्मिक बाबाओं, संतों के गोदाम नोटों और सिक्कों से भरे पड़े हैं, हर कोई हराम की दौलत की लूट में शामिल है और दबा कर बैठा है, एक महिने के अंदर जहाँ देखो भूखे लोगों की लाइने लग लगी, ये देश ऐसा तो था नहीं, यहाँ तो अनाज ज़रूरतों से ज़यादा पैदा होता है, यहाँ खनिज पदार्थों के ख़ज़ाने हैं, यहाँ समंदर हैं, यहाँ बड़े बड़े दरिया हैं, यहाँ वो सब कुछ है जो दुनियां के और देशों के पास ख़ाब में भी देखने को नहीं है, मगर देश की ऐसी दुर्दशा हो गयी है, इसका अंदाजा लोगों को अब भी क्यों नहीं हो रहा है, सरकार ये लॉक डाउन दो महिने कर दे, हिम्मत अगर है तो समय बढ़ा दे, कर्फ्यू सख्त लगा दे, फिर देखें, ये भूखे लोगों के झुण्ड किस का क्या हाल करते हैं, देश की तमाम व्यवस्थाएं भंग हो चुकी हैं, ऊपर के लोगों के पास सिर्फ बातें, जोक्स, और जोकर हैं, ये जोकर जनता के बीच आ कर तमाशा दिखा देता है और उसका मन बहल जाता है,,,,परवेज़

ऐसा शायद पहली बार देखने को मिल रहा है जब अरब जगत से भारत के मुसलमानों के ऊपर हो रहे अत्याचारों पर ज़ोरदार आवाज़ उठ रही है, दुनियांभर में मुसलमानों की अक्सरियत वाले 54 देश हैं, किसी भी देश में धर्म को लेकर कोई भेदभाव नहीं है बल्कि बहुत से अरब तो हिन्दू शब्द को ही नहीं जानते हैं वो भारतियों को ”हिंदी” कह कर सम्बोधित करते हैं

कई मुस्लिम देशों के अंदर झगडे, युद्ध चल रहे हैं लेकिन उनका धरम से कोई वास्ता नहीं है, वो युद्ध ”आयल” पर कब्ज़े को लेकर अमेरिका/इसराईल/यूरोपीय देश और रूस की आपसी खींचतान की वजह से हो रहे हैं

भारत के अंदर पिछले तीन दशकों से जो होता रहा है वो किसी से ढाका छुपा नहीं है, बाबरी मस्जिद की शहादत, उसके बाद संघ, ख़ुफ़िया एजेंसियों, मोसाद का साझा कार्यक्रम आतंकवाद, गुजरात नरशंहार, और अब तो बात बहुत आगे जा पहुंची है, जो लोगों को ‘डिटेंशन सेंटरों’ तक पहुँचने की तैयारी है, बाबरी मस्जिद की जगह को राम मंदिर बनाने के लिए माननीय सर्वोच्या न्यायलय ने दे ही दिया है, अब बाकी का जो काम बचा है वो बहुत ज़यादा मुश्किल है नहीं, ये तो ‘कोरोना न जाने कहाँ से आ टपका, वार्ना इन दिनों भारत में नागरिकता कानून को लेकर ज़ोरदार हंगामे, गिरफ्तारियां, बंद, लॉक डाउन, कर्फ्यू और शायद आपातकाल लगा होता….,,,,परवेज़…

300 वेरिफाइड मोबाइल नंबरों की जासूसी होने की रिपोर्ट

इस्राइल के पिगासस सॉफ्टवेयर से देश के करीब 300 वेरिफाइड मोबाइल नंबरों की जासूसी होने की रिपोर्ट सामने आई है। इनमें सरकार में शामिल मंत्रियों, नामचीन नेताओं, बड़े पत्रकारों के अलावा अधिवक्ताओं, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और अन्य लोगों के नाम शामिल होने का दावा किया गया। यह रिपोर्ट द गार्जियन और वाशिंगटन पोस्ट समेत 16 मीडिया संस्थानों की एक संयुक्त जांच के बाद सामने आई है। हालांकि, पिगासस नामक एनएसओ ने इन दावों का खंडन किया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि इस हैकिंग सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल सिर्फ अपराधियों और आतंकवादियों के खिलाफ किया जाता है।
इसके अलावा केंद्र सरकार ने भी इन दावों को खारिज कर दिया। सरकार की तरफ से कहा गया कि देश में किसी का भी फोन गैरकानूनी रूप से हैक नहीं किया गया। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से जारी चिट्ठी में कहा गया कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मसलों पर तयशुदा कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए ही किसी का फोन टेप करने की इजाजत दी जा सकती है।

सॉफ्टवेयर का दुरुपयोग होने का दावा
गौरतलब है कि इस रिपोर्ट में पिगासस सॉफ्टवेयर का लगातार और बड़े स्तर पर दुरुपयोग होने का दावा किया गया। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इस हैकिंग सॉफ्टवेयर से दुनिया भर में कई सरकारों ने जासूसी कराई, जिनमें 300 से अधिक वेरिफाइड भारतीय मोबाइल नंबर शामिल हैं। इन फोन नंबरों का इस्तेमाल, मंत्रियों, सरकारी अधिकारियों, पत्रकारों, वैज्ञानिकों, विपक्षी नेताओं, व्यापारियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं समेत अन्य कर रहे थे। दावा है कि इन नंबरों से संबंधित कुछ फोन की फॉरेंसिक जांच में साफ संकेत मिले कि 37 फोन पिगासस सॉफ्टवेयर के जरिए निशाना बनाए गए। इनमें से 10 भारतीय थे। माना जाता है कि इस्राइली कंपनी एनएसओ ने यह सॉफ्टवेयर दुनिया की 36 सरकारों को बेचा, लेकिन उसने अपने ग्राहकों की पहचान उजागर नहीं की।

कैसे सामने आया डाटा?
जानकारी के मुताबिक, इस लीक डाटाबेस को पेरिस के नॉन प्रॉफिट मीडिया ‘फॉरबिडेन स्टोरीज’ और ‘एम्नेस्टी इंटरनेशनल’ ने एक्सेस किया। उन्होंने ही यह डाटा अन्य मीडिया संस्थानों के साथ साझा किया। इस पड़ताल को ‘प्रोजेक्ट पिगासस’ नाम दिया गया। फॉरबिडेन स्टोरीज के मुताबिक, इस रिपोर्ट में एनएसओ के ग्राहकों द्वारा चुने गए फोन नंबरों के रिकॉर्ड हैं। इस सूची में पहचाने गए अधिकतर फोन नंबर 10 देशों के हैं। इन देशों में भारत, अजरबैजान, बहरीन, हंगरी, कजाकिस्तान, मैक्सिको, मोरक्को, रवांडा, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत में 40 से अधिक पत्रकारों, तीन प्रमुख विपक्षी नेताओं, एक सांविधानिक अधिकारी, केंद्र सरकार के दो मंत्रियों, सुरक्षा संगठनों के वर्तमान व पूर्व अध्यक्ष व कारोबारी की जासूसी की गई। इसके अलावा पिगासस प्रोजेक्ट के डाटाबेस में एक फोन नंबर सुप्रीम कोर्ट के एक वर्तमान न्यायाधीश के नाम पर दर्ज है। हालांकि, रिपोर्ट में यह पुष्टि नहीं हो पाई है कि डाटाबेस में जब यह नंबर जुड़ा, तब न्यायाधीश उस नंबर का इस्तेमाल कर रहे थे या नहीं।

संयुक्त रिपोर्ट में नहीं हुई जासूसी की पुष्टि
रिपोर्ट में दावा किया गया कि भारत में 13 आईफोन की जांच की गई, जिनमें नौ मोबाइल फोन को निशाना बनाने की बात सामने आई। वहीं, इनमें से सात आईफोन में पिगासस सॉफ्टवेयर पाया गया। हालांकि, इस संयुक्त जांच में यह स्पष्ट नहीं हुआ कि जिन नंबरों की सूची लीक हुई है, उनकी जासूसी की गई या नहीं।

Pegasus : दुनिया के सबसे ताकतवर जासूसी सॉफ्टवेयर की कहानी

भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी के एक ट्वीट से तहलका मच गया है। स्वामी ने अपने एक ट्वीट में कहा है कि वॉशिंगटन पोस्ट और लंदन गार्जियन एक रिपोर्ट प्रकाशित करने वाले हैं जिसमें कई मंत्रियों और पत्रकारों के फोन टैपिंग की जानकारी है। कहा जा रहा है कि करीब 2,500 लोगों के टैप किए गए फोन कॉल्स को लेकर कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। इस फोन टैपिंग के पीछे दुनिया के सबसे ताकतवर हैकिंग सॉफ्टवेयर पिगासस (Pegasus) का नाम सामने आ रहा है। बता दें कि साल 2019 में जब भारत समेत दुनियाभर के 100 से अधिक पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के व्हाट्सएप अकाउंट की जासूसी हुई थी, उस समय पिगासस के बारे में पूरी दुनिया को विस्तार से जानकारी मिली थी और दो साल बाद Pegasus एक बार फिर से खबरों में है। आइए जानते हैं आखिर यह Pegasus सॉफ्टवेयर है क्या और यह काम कैसे करता है?

जासूसी का सबसे बड़ा सॉफ्टवेयर
जासूसी की दुनिया में पिगासस का बड़ा नाम है। इससे उन फोन और डिवाइस को भी हैक किया जा सकता है जिसे लेकर कंपनियां दावा करती हैं कि यह हैकप्रूफ है। पिगासस एक स्पाईवेयर है जो चुपके से किसी भी डिवाइस की जासूसी कर सकता है। पिगासस जैसे स्पाईवेयर यूजर्स की जानकारी के बिना उनके फोन में मौजूद रहते हैं और फोन में मौजूद गोपनीय जानकारी को हैकर्स तक आसानी से पहुंचाते हैं। आपके फोन में स्पाईवेयर है या नहीं इसका पता लगाना बहुत ही मुश्किल काम है। आपको बता दें कि साल 2019 में पिगासस के जरिए ही भारत समेत दुनिया के करीब 1,400 पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की जासूसी हुई थी। इसके अलावा अमेजन के सीईओ जेफ बेजोस का व्हाट्सएप भी इसी सॉफ्टवेयर से हैक हुआ था।

क्या है और Pegasus और क्या-क्या कर सकता है?
इस्रायल के NSO ग्रुप/Q साइबर टेक्नोलॉजीजी ने इस स्पाइवेयर (जासूसी वाले सॉफ्टवेयर) को तैयार किया है। पिगासस का दूसरा नाम Q Suite भी है। पिगासस दुनिया के सबसे खतरनाक जासूसी सॉफ्टवेयर्स में से एक है जो एंड्रॉयड और आईओएस डिवाइस दोनों की जासूसी कर सकता है। पिगासस सॉफ्टवेयर यूजर की इजाजत और जानकारी के बिना भी फोन में इंस्टॉल हो सकता है। एक बार फोन में इंस्टॉल हो जाने के बाद इस आसानी से हटाया नहीं जा सकता है। पिगासस को किसी फोन में सिर्फ एक मिस्ड कॉल के जरिए इंस्टॉल किया जा सकता है। यह फोन में मौजूद एंड टू एंड एंक्रिप्टेड चैट को भी पढ़ सकता है यानी इससे व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे एप्स भी सुरक्षित नहीं हैं।

पिगासस सॉफ्टवेयर आपकी निजी जानकारियों पर बारिकी से नजर रख सकता है। हैरान करने वाली बात यह है कि फोन में इस सॉफ्टवेयर का कोई आइकन भी नहीं बनता जिसके जरिए आप इसकी पहचान कर सकें। यह सॉफ्टवेयर पासवर्ड, कॉन्टेक्ट लिस्ट, कैलेंडर, मैसेज, माइक्रोफोन, कैमरा और विभिन्न मैसेजिंग एप्स के कॉलिंग फीचर पर पल-पल नजर रखने में माहिर है। पिगासस यूजर का जीपीएस लोकेशन भी ट्रैक करता है।

56 करोड़ से भी अधिक है पिगासस सॉफ्टवेयर की कीमत
इकोनॉमिक्स टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक पिगासस (Pegasus) सॉफ्टवेयर की कीमत 7-8 मिलियन डॉलर यानी करीब 56 करोड़, 56 लाख, 40 हजार रुपये है। इस कीमत में पिगागस सॉफ्टवेयर का एक साल के लिए लाइसेंस मिलता है। एक लाइसेंस पर आप एक साल में 500 फोन को मॉनिटर कर सकते हैं। पिगासस के जरिए एक बार में 50 मोबाइल फोन पर पल-पल नजर रखी जा सकती है।पिगासस सॉफ्टवेयर यूजर की परमिशन के बिना उसके फोन को ऑफ/ऑन के अलावा फॉर्मेट भी मार सकता है।

Pegasus से ही हुआ था जेफ बेजोस का फोन हैक
जनवरी 2020 में ‘द गार्जियन’ ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि 8 नवंबर 2018 को जेफ बेजोस को एक व्हाट्सएप मैसेज भेजकर उनके फोन को हैक किया गया था। अमेजन के सीईओ जेफ बेजोस का व्हाट्सएप अकाउंट हैक हुआ था और हैकिंग का आरोप सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान पर लगा था। बेजोस को मैसेज सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस के पर्सनल व्हाट्सएप अकाउंट से भेजा गया था, हालांकि अभी तक इस बात की जानकारी नहीं मिली है कि जेफ बेजोस के फोन से क्या-क्या डाटा चोरी हुए। जेफ बेजोस का व्हाट्सएप अकाउंट हैक के पीछे भी पिगासस सॉफ्टवेयर (Pegasus) का ही नाम सामने आया था।

MP हनीट्रैप में भी हुआ पिगासस का इस्तेमाल
इस पिगासस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल मध्य प्रदेश के चर्चित हनीट्रैप कांड में भी हुआ था। 2020 में कई रिपोर्ट में दावा किया गया था कि बंगलूरू की एक कंपनी नेताओं और अफसर के फोन टैपिंग के लिए पिगासस (Pegasus) सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करती थी। यह सॉफ्टवेयर फोन में छिपकर कॉल रिकॉर्डिंग, वॉट्सएप चैटिंग, एसएमएस के साथ अन्य चीजों की सर्विलांस आसानी से कर सकता है।

आईफोन पर हो चुका है हैकिंग का प्रयास
2016 में एनएसओ ने पिगासस के जरिए आईफोन को हैक करने की कोशिश की थी। जैसे ही एपल को इसकी जानकारी मिली, तो कंपनी ने तुरंत यूजर्स के लिए अपडेट जारी किया था। वहीं, 2017 में आई रिपोर्ट में पता चला था कि सबसे समाजिक कार्यकर्ता अहमद मंसूर को पिगासस की जानकारी मिली थी। रिपोर्ट में आगे कहा गया था कि हाईटेक प्लेटफॉर्म को हैक करने के लिए इस सॉफ्टवेयर पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे। इसके बाद से ही एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम को हैक करना आसान हो गया था।

सरकारी एजेंसियां करती हैं इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल
सिटिजन लैब की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी एजेंसियां पिगासस जैसे स्पाईवेयर के जरिए उन यूजर्स की जासूसी करती हैं, जिससे सरकार को खतरा होता है। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि इस सॉफ्टवेयर को राजनीतिक इरादों के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है।

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