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इस्लामी इतिहास में सबसे बड़ी क़ुर्बानी हज़रत इमाम हुसैन ने दी है, इमाम हुसैन हमारे सुन्नी और शिया के इमाम हैं : तालेबान

तालेबान ने कहा है कि शियों के साथ इस गुट की कोई दुश्मनी नहीं है।

तालेबान गुट के सांस्कृतिक आयोग के सहायक ने बल देकर कहा है कि शियों के साथ इस गुट का न तो कोई विरोधाभास है न ही कोई दुश्मनी और इमाम हुसैन ने इस्लामी इतिहास में सबसे बड़ी क़ुर्बानी दी है।

अहमदुल्लाह वसीक़ ने समाचार एजेन्सी तसनीम के पत्रकार से वार्ता में कहा कि हमने शियों को इस बात की अनुमति दी है कि वे अपने धार्मिक कार्यक्रमों को निश्चिंत होकर आयोजित करें क्योंकि वे भी अफगानी हैं और अपने धार्मिक कार्यक्रमों को आज़ादी के साथ आयोजित कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में भी अफगानिस्तान में मोहर्रम के कार्यक्रम होते थे और तालेबान इस वर्ष भी मोहर्रम के कार्यक्रमों की सुरक्षा की आपूर्ति का पूरा प्रयास कर रहा है। तालेबान के इस वरिष्ठ सदस्य व नेता ने बल देकर कहा कि यह गुट समस्त धर्मों का सम्मान करता है और हमारे सुन्नी और शिया धर्म के मध्य बहुत अधिक समानतायें हैं जिसे हम मानते हैं।

इससे पहले तालेबान गुट के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा था कि यद्यपि अभी अफगानिस्तान की सुरक्षा स्थिति सामान्य नहीं है परंतु तालेबान मोहर्रम की सुरक्षा को सुनिश्चित बनाये जाने को अपनी ज़िम्मेदारी समझता है।

ज्ञात रहे कि अभी कल सामाजिक और धार्मिक मामलों के एक विशेषज्ञ हुसैन नादिरी ने भी कहा था कि सौभाग्य से तालेबान को मोहर्रम के कार्यक्रमों से कोई समस्या नहीं है और अब तक शियों से तालेबान का व्यवहार उचित था। उन्होंने कहा कि इस समय के तालेबान और 20 साल पहले के तालेबान में अंतर है और वे इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि अपने शिया भाइयों को अपने साथ रखें और जहां तक मुझे सूचना है शिया भी तालेबान के बर्ताव से राज़ी हैं।

उन्होंने बल देकर कहा कि इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम केवल शियों के नहीं हैं बल्कि वह पैग़म्बरे इस्लाम के प्राणप्रिय नाती हैं और उनका संबंध समस्त मुसलमानों से है और मानवता उनके आंदोलन से जीवनदायक पाठ ले सकती है।

इसी प्रकार अफगानिस्तान से प्राप्त होने वाले समाचारों में कहा गया है कि मज़ार शरीफ़ में सात मोहर्रम के उपलक्ष्य में सड़कों पर अलम लगाये गये और तालेबान ने किसी प्रकार की बाधा व समस्या उत्पन्न नहीं की।

इसी प्रकार हेरात के शियों ने किसी प्रकार की समस्या के बिना शुक्रवार की नमाज़ अदा दी। अभी हाल ही में तालेबान ने कहा था कि अगर हेरात के शिया मोहर्रम के कार्यक्रमों की सुरक्षा नहीं कर सकते तो उसकी सुरक्षा हम करने के लिए तैयार हैं।

रोचक बात यह है कि मोहर्रम के कार्यकर्मों में हर रात्रि को भी इमाम बारगाहों और मस्जिदों से लाउड स्पीकरों का प्रयोग हो रहा है और तालेबान ने अब तक इन कार्यक्रमों को सीमित करने के संबंध में किसी प्रकार का कोई क़दम नहीं उठाया है।

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