कश्मीर राज्य

कश्मीर के कारण दक्षिण एशिया में शांति, स्थिरता और सुरक्षा को गंभीर ख़तरा है : दो परमाणु शक्तियों के बीच आग भड़कने की आशंका है : यूरोपीय संसद

पाकिस्तान के अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार, यूरोपीय संसद के 16 सदस्यों ने भारत प्रशासित कश्मीर में मानवाधिकारों के कथित हनन पर गंभीर चिंता जताई है.

16 सांसदों ने यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को एक ख़त लिखकर भारत प्रशासित कश्मीर की तरफ़ उनका ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की है.

सांसदों के अनुसार, ह्यूमन राइट्स वॉच वर्ल्ड रिपोर्ट 2021 और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायोग ने 2018-19 की अपनी रिपोर्ट में भारत प्रशासित कश्मीर में मानवाधिकार के कथित हनन को शामिल किया था.

भारत की केंद्र सरकार ने पाँच अगस्त, 2019 को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत कश्मीर को मिलने वाले विशेष राज्य के दर्जे को ख़त्म कर दिया था और जम्मू-कश्मीर राज्य को ख़त्म करके उसे दो केंद्र प्रशासित प्रदेश में बांट दिया था.

भारत सरकार ने वहां मोबाइल फ़ोन और इंटरनेट को बंद कर दिया था. इसके साथ ही तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों समेत राज्य के कई वरिष्ठ नेताओं और सैकड़ों कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार या नज़रबंद कर दिया था.

ख़त में सांसदों ने लिखा है कि इसके बाद भारत ने कश्मीर में सख़्त लॉकडाउन लागू कर दिया था और फिर कोरोना की महामारी के कारण आम कश्मीरियों की ज़िंदगी और मुश्किल हो गई है.

ख़त में लिखा गया है, “कश्मीर के कारण दक्षिण एशिया में शांति, स्थिरता और सुरक्षा को गंभीर ख़तरा है. इस कारण दो परमाणु शक्तियों के बीच आग भड़कने की आशंका है. हम लोग इस बात को लेकर चिंतित हैं कि वहां किसी भी ग़लत अंदाज़े के ख़तरनाक नतीजे हो सकते हैं. भारत और पाकिस्तान की सेना के बीच तनाव बढ़ा है.”

ख़त में अपील की गई है कि यूरोपीय संसद को अंतरराष्ट्रीय बिरादरी से मिलकर कश्मीरियों से किए गए वादों को पूरा करने और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों पर अमल करने के लिए अनुकूल माहौल पैदा करने की कोशिश करनी चाहिए.

पाकिस्तान ने इस ख़त का स्वागत किया है.

डॉन न्यूज़ के अनुसार पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ज़ाहिद हफ़ीज़ चौधरी ने कहा, “यह ख़त जम्मू-कश्मीर में भारत के ग़ैर-क़ानूनी क़ब्ज़े के दौरान जारी मानवाधिकार हनन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भर्त्सना का एक और उदाहरण है.”

पाकिस्तानी प्रवक्ता ने कहा कि भारत को अब यह समझना चाहिए कि वो कश्मीरी जनता के मानवाधिकारों के कथित हनन को ख़त्म करने के लिए अंतरराष्ट्रीय बिरादरी की माँग को हमेशा नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता है.

कठपुतली सरकार नहीं चलने देंगे: बिलावल भुट्टो

भारत प्रशासित कश्मीर को लेकर भले ही पाकिस्तान की सभी पार्टियों में एकता दिखती हो, लेकिन पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के मामले में सभी पार्टियाँ एक दूसरे पर हमले कर रही हैं.

अख़बार जंग के अनुसार, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो ने कहा है कि धांधली के बावजूद उनकी पार्टी ने पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के चुनाव में केंद्र में सत्ताधारी इमरान ख़ान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ (पीटीआई) को कड़ी टक्कर दी है.

पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के नव-निर्वाचित पार्टी विधायकों को संबोधित करते हुए बिलावल ने कहा, “चुनाव में भी पैसा चलाया गया, धांधली का सदन के अंदर और बाहर पर्दाफ़ाश करेंगे. आज़ाद कश्मीर (पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर) की कठपुतली सरकार नहीं चलने देंगे”.

इमरान ख़ान की पार्टी ने बिलावल के आरोपों को ख़ारिज करते हुए उन पर हमले किए हैं.

अख़बार जंग के अनुसार, सूचना एवं प्रसारण केंद्रीय राज्य मंत्री फ़र्रुख़ हबीब ने बिलावल पर पलटवार करते हुए कहा, “सिंध में सियासी ओहदों का क्या रेट है? आज़ाद कश्मीर (पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर) के चुनाव में पीटीआई का पीपीपी और मुस्लिम लीग (नवाज़ गुट) से कोई मुक़ाबला था ही नहीं, यह दोनों तो दूसरी और तीसरी पार्टी बनने के लिए लड़ रहे थे.”

सिंध में पीपीपी की सरकार है और अब पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में पीटीआई की सरकार बनने जा रही है.

पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान में शांति एक दूसरे से जुड़ी हुई है: जनरल बाजवा

पाकिस्तानी सेना के प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा ने कहा है कि पाकिस्तान की बहुत इच्छा है कि अफ़ग़ानिस्तान में अमन हो क्योंकि दोनों मुल्कों का अमन एक दूसरे से जुड़ा हुआ है.

अख़बार दुनिया के अनुसार, सेना प्रमुख ने अफ़ग़ानिस्तान की मीडिया के एक प्रतिनिधिमंडल से बातचीत के दौरान यह बातें कहीं.

अख़बार के अनुसार, इस अवसर पर जनरल बाजवा ने कहा कि वो अमन के दुश्मनों को शांति प्रक्रिया को नाकाम करने की इजाज़त नहीं देंगे.

अफ़ग़ानिस्तानी मीडिया के 15 सदस्यों के एक दल ने जनरल बाजवा से सेना मुख्यालय में मुलाक़ात की.

जनरल बाजवा ने कहा, “मीडिया और अवाम की ज़िम्मेदारी है कि वो शांति के दुश्मनों की पहचान कर उन्हें शिकस्त दें. मीडिया दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक, सामाजिक और अवामी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए एक पुल का काम कर सकती है. सीमा की सुरक्षा दोनों देशों के हक़ में है.”

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