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शरद भाई नहीं रहे…

Mahendra Mishra
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शरद भाई नहीं रहे। बेहद जिंदादिल और सरल स्वभाव के इंसान थे। हमारी सांगठनिक धारा के उन चंद वरिष्ठों में शुमार थे जिनका हम लोगों के सामने बार-बार नाम आता था। फैजाबाद से जुड़े होने के नाते अक्सर मेरे सामने लोग शरद भाई का जिक्र कर ही देते थे। और इस बीच चेतना समूह और उसके क्लब हाउस में तो नियमित मुलाकात होती थी। और रोजाना उनको सुनने का मौका मिलता था। अभी कल भी शरद भाई हम लोगों के साथ थे। शाम को तीन बजे आर्थिकी से जुड़ी गोष्ठी में उन्होंने अपनी बात रखी। और फिर जब दूसरे लोग बात रख लिए तो कुछ सवालों के जवाब के लिए हम लोगों ने बार-बार उन्हें नाम लेकर पुकारा। लेकिन उधर से कोई आवाज नहीं आयी। हम लोगों ने सोचा कि कुछ कनेक्टिविटी का इश्यू है। लिहाजा उधर से कोई उत्तर न मिलने के बावजूद हम लोगों ने उस ओर ध्यान नहीं दिया।

अभी मेरी शरद भाई की पत्नी से बात हुई तो उन्होंने बताया कि वह गोष्ठी में थे और उसी दौरान उन्हें नींद आयी और जब उठे तो उन्होंने चाय मांगी। उनका कहना था कि उन्होंने चाय दिया। और फिर अभी चाय पीकर निपटे थे कि उन्हें हार्ट अटैक आ गया। और वह बेहोश हो गए। घर पर ही परिजनों ने उन्हें रिवाइव करने की कोशिश की जब कोई सफलता नहीं मिली तो उन्हें अस्पताल ले जाया गया। जहां रास्ते में ही उनका निधन हो गया। अस्पताल पहुंचने पर डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके भाई आज दिन में फैजाबाद से मुंबई पहुंच रहे हैं। बेटा हैदराबाद से मुंबई आ गया है। आज दोपहर में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। लाल बहादुर भाई ने बताया कि इसके पहले एक बार शरद भाई की बाईपास सर्जरी भी हो चुकी थी। शरद भाई तमाम मुद्दों समेत आर्थिकी से जुड़े प्रश्नों पर रोजाना आपको सुनना न केवल हमें समृद्ध करता था बल्कि आपकी मिश्री से घुली आवाज को सुनने का हमेशा इंतजार रहता था। लेकिन अब वह कभी संभव नहीं होगा। आपका नाम सुनते रहते थे लेकिन कभी मुलाकात नहीं थी। और अब यह ख्वाहिश…ख्वाहिश ही बन कर रह गयी।….अलविदा शरद भाई।

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