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अरब डायरी : कुर्दिस्तान के अरबील में ज़ायोनियों की बैठक पर मचा अरब में बवाल : ईरान और अरब देशों की उच्च स्तरीय बैठक!

 

अरबील में ज़ायोनियों की बैठक का बग़दाद ने किया खुलकर विरोध

इराक़ की सरकार ने एक बयान जारी करके अरबील में होने वाली ज़ायोनियों की उस बैठक को ग़ैर क़ानूनी बताया है जिसे अवैध ज़ायोनी शासन के साथ संबन्ध सामान्य करने के नाम पर आयोजित किया गया।

तसनीम समाचार एजेन्सी के अनुसार इराक़ के प्रधानमंत्री के मीडिया विभाग की ओर से शनिवार को एक बयान जारी किया गया।

इस बयान में अरबील में आयोजित बैठक को ग़ैर क़ानूनी बताते हुए इसका कड़ा विरोध किया गया है। इस बयान में कहा गया है कि इराक़ के नियंत्रण वाले कुर्दिस्तान के अरबील में कुछ क़बीलों के साथ ज़ायोनी शासन के संबन्ध सामान्य करने के नाम पर की जाने वाले बैठक का हम खुलकर विरोध करते हैं।

इराक़ सरकार ने इस बयान में कहा है कि वास्तव में यह बैठक कुछ स्थानीय क़बीलों के प्रतिनिधित्व करते हुए आयोजित नहीं हुआ बल्कि यह एक बहाना है।

इराक़ सरकार का कहना है कि फ़िलिस्तीनी राष्ट्र के समर्थन पर आधारित हम अपने पुराने एतिहासिक स्टैंड पर बाक़ी हैं। बयान के अनुसार इराक़, एक स्वतंत्र फ़िलिस्तीनी देश के गठन का समर्थक है जिसकी राजधानी बैतुल मुक़द्दस होनी चाहिए।


अरबील में ज़ायोनियों की बैठक पर बिफरे मुक़तदा सद्र

इराक़ के अरबील में ज़ायोनियों की बैठक का मुक़तदा सद्र ने कड़ा विरोध किया है।

सद्र धड़े के प्रमुख मुक़तदा सद्र ने कहा है कि इराक़ को अवैध ज़ायोनियों के साथ संबन्ध सामान्य करने के बारे में की जाने वाली बैठक को रोकना चाहिए था।

रश्याटूडे के अनुसार मुक़तदा सद्र ने कहा है कि इराक़ के कुर्दिस्तान क्षेत्र के अधिकारियों को जानना चाहिए कि ज़ायोनी शासन के साथ संबन्ध सामान्य करना अपराध है। उन्होंने कहा कि इस ज़ायोनी बैठक में भाग लेने वाले सभी लोगों को गिरफ़्तार किया जाए।

सद्र धड़े के प्रमुख मुक़तदा सद्र ने बल देकर कहा है कि इराक़ कभी भी इस्राईल के साथ अपने संबन्ध सामान्य नहीं करेगा।

इराक़ की सरकार ने एक बयान जारी करके अरबील में होने वाली ज़ायोनियों की उस बैठक को ग़ैर क़ानूनी बताया है जिसे अवैध ज़ायोनी शासन के साथ संबन्ध सामान्य करने के नाम पर आयोजित किया गया। इराक़ सरकार ने इस बयान में कहा है कि वास्तव में यह बैठक कुछ स्थानीय क़बीलों के प्रतिनिधित्व करते हुए आयोजित नहीं हुई बल्कि इस बात को एक बहाने के रूप में पेश किया जा रहा है।

इस्राईल की नीव रखने वाले भी अब उसके भविष्य को लेकर भयभीत

इस्राईल की नीव रखने वाले के बेटे ने कहा है कि मैं ज़ायोनी शासन के भविष्य को पूरी तरह से अंधकारमय देखता हूं।

अरब पोस्ट के अनुसार 95 वर्षीय याक़ूब शारीत ने ज़ायोनी समाचारपत्र हाआरेत्स को दिये साक्षात्कार में कहा है कि मुझको इस्राईल का भविष्य बहुत अधिक अंधेरे में डूबा हुआ दिखाई दे रहा है।

अवैध ज़ायोनी शासन के पहले विदेशमंत्री और दूसरे प्रधानमंत्री के बेटे याक़ूब शारीत ने कहा कि ज़ायोनी परियोजना का जन्म पाप की कोख से हुआ है। इस्राईल के अंधकारमय भविष्य के बारे में उन्होंने कहा कि मेरी आयु अब लगभग 95 वर्ष की है। मेरी आर्थिक स्थिति भी अच्छी है।

याक़ूब शारीत का कहना था कि हर प्रकार के आराम के बावजूद मैं अपने पोतों और नवासों अर्थात इस्राईल की नई पीढ़ी के भविष्य को लेकर बहुत चिंतित हूं। मुझको उनके कल की चिंता है।

सन 1948 में इस्राईल के गठन के घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करने वाले मूशे शारीत के 95 वर्षीय बेटे याक़ूब शारीत का कहना है कि इस समय मैं यहां पर अर्थात ज़ायोनी शासन में हूं। इस उम्र में मैं इधर-उधर नहीं जा सकता। अब मैं यह सोचकर परेशान रहता हूं कि इस्राईल का क्या होगा क्योंकि यह एक वर्चस्ववादी शासन है जो दूसरे लोगों पर अत्याचार और हमले करता रहता है।

ज्ञात रहे कि सन 1948 में ब्रिटेन की सहायता और खुले समर्थन से फ़िलिस्तीनियों की मात्रभूमि पर क़ब्ज़ा करके अवैध ज़ायोनी शासन का गठन किया गया था।

हमास ने अपने व्यवहार से इस्राईली सैनिक का जीता दिल

 

अतिवादी ज़ायोनियों की ओर से भारी दबाव डाले जाने के बावजूद भी ज़ायोनी सैनिक हमास की बुराई करने के लिए तैयार नहीं हुआ।

हमास ने एक पूर्व ज़ायोनी सैनिक गिलआद शालीत को 1000 से अधिक फिलिस्तीनी बंदियों के बदले में वर्ष 2011 में रिहा कर दिया था और लगभग 10 वर्षों का समय बीत जाने के बाद भी यह ज़ायोनी सैनिक अतिवादी ज़ायोनियों की ओर से भारी दबाव डाले जाने के बावजूद एक बार भी हमास की बुराई करने के लिए तैयार नहीं हुआ।

10 वर्षों तक हमास के बारे में मौन धारण करने के बाद गिलआद शालीत ने बताया कि वह हमास के पास कैसे था।

समाचार एजेन्सी फार्स की रिपोर्ट के अनुसार 25 जून 2006 को हमास की सैनिक शाखा क़स्साम ब्रिगेड ने इस ज़ायोनी सैनिक को बंधक बना लिया था और 2011 में 1027 फिलिस्तीनी बंदियों के बदले में उसे रिहा कर दिया गया था।

जायोनी सेना ने ग़ज़्ज़ा पट्टी का परिवेष्टन कर रखा था और वह आधुनिकतम हथियारों व तकनीक से लैस है फिर भी वह 5 वर्षों तक इस बात का पता न लगा सकी कि गिलआद शालीत को हमास ने कहां रखा है जब वह अपने सैनिक को नहीं ढ़ूंढ़ पायी तो मजबूर होकर एक हज़ार से अधिक फिलिस्तीनी बंदियों को उसने आज़ाद कर दिया। दूसरे शब्दों में उसने मजदूर होकर हमास के साथ बंदियों के आदान- प्रदान के समझौते पर हस्ताक्षर किया और हमास इस बात के प्रति कटिबद्ध हुआ कि वह एक हज़ार से अधिक फिलिस्तीनी बंदियों की आज़ादी के बदले में गिलआद शालीत को रिहा करेगा।

बहरहाल गिलआद शालीत को आज़ाद हुए 10 वर्ष का समय हो रहा है और जब से उसे आज़ाद किया गया है अधिकांश समय वह इस्राईल से बाहर रहता है और अब तक उसने अतिवादी ज़ायोनियों के भारी दबाव के बावजूद एक बार भी उन लोगों की बुराई नहीं की या उन पर किसी के प्रकार के दुर्व्यवहार का आरोप लगाया जिन्होंने 5 वर्षों तक उसे बंदी बनाकर रखा था।

फिलिस्तीनी समाचार एजेन्सी शहाब ने 25 सितंबर को एक वीडियो प्रकाशित किया जिसमें बिल्कुल साफ- साफ देखा जा सकता कि गिलआद शालीत कुछ उन इस्राईलियों के बीच में है जिनके बारे में कहा जाता है कि ये लोग होलोकास्ट की घटना में बच जाने वाले हैं और 10 साल के बाद पहली बार वह बताता है कि हमास ने उसे कैसे बंदी बना कर रखा था।

जब उससे पूछा जाता है कि बंदी बनाये जाने के दौरान हमास ने उसके साथ कैसा व्यवहार किया था तो वह कहता है कि उन पांच वर्षो के दौरान हमास का प्रयास था कि मैं पूरी सलामती के साथ रहूं। मैं उन वर्षों में बीमार नहीं था। मैं इस समय भी कमज़ोर व पतला हूं परंतु उस समय अधिक दुबला था। हमास वाले उस समय इस बात से चिंतित थे कि कहीं मेरा स्वास्थ्य ख़राब न हो जाये, मेरी शारीरिक स्थिति विषम व खराब न हो जाये क्योंकि मैं एक ज़िन्दा सैनिक था और मरे हुए सैनिक से मेरा महत्व बहुत अधिक था। इसलिए मैं उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण था और इसीलिए वे मेरा बहुत ध्यान रखते थे।

जब गिलआद शालीत से पूछा गया कि रात-दिन कैसे गुज़रते थे तो कहता है कि समस्त चीज़ें उल्टी थीं दिनों को मैं सोता था और रातों को जागता था।

गिलआद शालीत से जब एक व्यक्ति सवाल करता है कि जब आप हमास की कैद में थे तो एक वीडियो प्रकाशित हुई थी जिसमें आपको समाचार पत्र पढ़ते दिखाया गया था तो क्या हमास ने आपको इस कार्य के लिए बाध्य किया था? इस सवाल का जवाब शालीत मुस्कुरा कर देता और कहता है मैं समझता हूं कि वह वीडियो मेरी गिरफ्तारी के तीन वर्ष बाद का था। वीडियो में जो समाचारपत्र मुझे पढ़ते हुए दिखाया गया था उसका लक्ष्य उस तारीख को दिखाना था जो समाचार पत्र पर लिखी हुई थी।

गिलआद शालीत से जब पूछा गया कि जब वह हमास की क़ैद में थे तो उनके कैद व रखने की जगह को लगातार बदला जाता था या नहीं तो इसके जवाब में वह कहता है कि जो लोग मेरी देखभाल व निगरानी करते थे वे हमास के बहुत ही भरोसेमंद लोग थे और वे सारी चीज़ों को गोपनीय रखते थे और इसी कारण इस्राईल वर्षों तक मुझे बंधक बनाये रखने के बावजूद इस बात का पता नहीं लगा सका कि मुझे कहां रखा गया है। इन वर्षों में मैं अधिकांश समय में एक ही स्थान पर था और बहुत कम जगह बदली जाती थी।

जब उससे पूछा गया कि इन वर्षों में उसे खाने के लिए क्या दिया जाता था तो उसने कहा कि इस्राईल की बनी हुई चीज़ें मुझे खाने के लिए दी जाती थीं।

इसी प्रकार जायोनी सैनिक गिलआद शालीत जिन लोगों की निगरानी में था उनके व्यवहार के बारे में कहता है कि उनमें से कुछ हिब्रु भाषा जानते थे और उनमें कुछ बड़ी उम्र के लोग थे जो इस्राईल में काम कर चुके थे जबकि कुछ अंग्रेजी भी जानते थे मगर जो लोग न अंग्रेजी जानते थे और न हिब्रु तो उनसे संपर्क करने के लिए मैं उन कुछ सीमित अरबी शब्दों का सहारा लेता था जिन्हें मैं जानता था और कहने का अपना तात्पर्य समझा ले जाता था।

शालीत कहता है कि जैसाकि आप लोग देख रहे हैं कि मैं ठीक व स्वस्थ हूं। इस समय मैं काम करता हूं, मैंने विवाह कर लिया है और मैं एक साधारण ज़िन्दगी गुज़ार रहा हूं।

यह वीडियो ऐसी स्थिति में प्रकाशित हुआ है जब अब भी कई इस्राईली हमास की क़ैद में हैं और वे भी अपनी आज़ादी की प्रतीक्षा में हैं।

जानकार हल्कों का मानना है कि हमास द्वारा इस वीडियो के प्रकाशित करने का उद्देश्य, यह बताना है कि दुश्मन के बंदी के साथ भी मानवता प्रेमी व्यवहार किया जा रहा है और साथ ही यह बताना है कि इस्राईल आधुनिकतम तकनीक से लैस होने के बावजूद यह भी पता नहीं लगा पा रहा है कि उसके सैनिक व ग़ैर सैनिक को हमास ने कहां रखा है और न ही वह उन्हें आज़ाद करा पा रहा है।


ईरान विरोधी अमरीकी प्रतिबंध अमानवीय क़दम है, ईरानी विदेश मंत्री

ईरान के विदेश मंत्री ने वर्ल्ड रेड क्रॉस के प्रमुख के साथ मुलाक़ात में तेहरान के ख़िलाफ़ अमरीका के दमनकारी प्रतिबंधों की कड़ी आलोचना करते हुए उन्हें अमानवीय बताया है।

ईरानी विदेश मंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान ने बुधवार को वर्ल्ड रेड क्रॉस के प्रमुख पीटर माउर के साथ मुलाक़ात में ईरान विरोधी अमरीका के अमानवीय प्रतिबंधों पर मानव अधिकार संस्थाओं की चुप्पी की आलोचना करते हुए कहाः ईरानी जनता के ख़िलाफ़ अमरीका के दमनकारी और अमानवीय प्रतिबंध, आतंकवाद है, जिसकी सभी को आलोचना करनी चाहिए और उसका मुक़ाबला करना चाहिए।

इसी के साथ ईरानी विदेश मंत्री ने ईरान-इराक़ युद्ध के दौरान लापता होने वालों और शहीदों के शवों की खोज में रेड क्रॉस की मदद और कोरोना से मुक़ाबले में रेड क्रिसेंट की सीमित लेकिन मूल्यवान सहायता के लिए उसका आभार व्यक्त किया।

अफ़ग़ानिस्तान में भंयकर मानवीय संकट के ख़तरे का उल्लेख करते हुए अमीर अब्दुल्लाहियान ने कहाः ईरान पर कोरोना के व्यापक दबाव के बावजूद, तेहरान का प्रयास है कि विस्थापित होने वाले अफ़ग़ान नागरिकों का टीकाकरण किया जाए, लेकिन इसके लिए तुरंत रूप से अंतरराष्ट्रीय सहायता की ज़रूरत है।

इस मुलाक़ात में रेड क्रिसेंट के प्रमुख ने भी हालिया वर्षों में ईरान के सहयोग की सराहना की और कहाः ईरानी समाज पर दबाव के बावजूद कोरोना महामारी के दौरान हमने ईरान में विस्थापित होने वाले अफ़ग़ान नागरिकों के टीकाकरण के लिए प्रयास किए, लेकिन इसके लिए अभी भी अंतरराष्ट्रीय सहायता की ज़रूरत है।

न्यूयार्क में ईरान और अरब देशों की उच्च स्तरीय बैठक, एक महीने में दूसरी बार यह महत्वपूर्ण घटना

न्यूयार्क में जहां संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा का अधिवेशन चल रहा है इस्लामी गणतंत्र ईरान और अरब देशों की एक उच्च स्तरीय बैठक हुई है। इससे पहले इराक़ की राजधानी बग़दाद में इसी तरह की महत्वपूर्ण बैठक में ईरान और अरब देशों की वार्ता हुई थी। दोनों ही वार्ताओं में सऊदी अरब ने भी हिस्सा लिया है।

मेहर न्यूज़ ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि ईरान के विदेश मंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान ने न्यूयार्क में सऊदी अरब और अन्य अरब देशों के नेताओं से मुलाक़ात की है। समाचार एजेंसी के अनुसार ईरान की नई सरकार पड़ोसी देशों के साथ संबंधों के विस्तार को प्राथमिकता दे रही है।

इस बैठक में ईरान के विदेश मंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान और अरब देशों के विदेश मंत्रियों और उच्च पदस्थ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। यही नहीं बैठक में सऊदी अरब, कुवैत, क़तर, मिस्र और जार्डन जैसे अरब देशों के अलावा तुर्की, फ़्रांस औ यूरोपीय संघ ने भी हिस्सा लिया है।

ईरान के विदेश मंत्रालय ने अपने ट्वीटर एकाउंट पर लिखा कि विदेश मंत्री ने बग़दाद में 28 अगस्त को होने वाली बैठक के सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए न्यूयार्क में बैठक की है।

बैठक न्यूयार्क में इराक़ के राजदूत की मेज़बानी में हुई।

मेहर न्यूज़ के अनुसार ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि संकट, ग़लतफ़हमी और मतभेदों को केवल डिप्लोमेसी से हल किया जा सकता है।

 

इस्राईली सैनिकों के हमले में फ़िलिस्तीनी युवा शहीद, प्रदर्शन और भी तेज़

फ़िलिस्तीन के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि वेस्ट बैंक में बीता नामक गांव के पास इस्राईली सैनिकों के हमले में एक फ़िलिस्तीनी युवा शहीद हो गया और 28 घायल हो गए। यह हमला तब हुआ जब इस इलाक़े में ग़ैर क़ानूनी यहूदी बस्ती के निर्माण के ख़िलाफ़ फ़िलिस्तीनी प्रदर्शन कर रहे थे।

नाबलुस शहर के दक्षिण में स्थित बीता गांव में यह घटना हुई है जिसे फ़िलिस्तीनी विदेश मंत्रालय ने खुली दरिंदगी क़रार दिया है।

21 साल के फ़िलिस्तीनी युवा मुहम्मद अली ख़बीसा के सिर में गोली मारी गई जिसके बाद फ़ौरन उसकी मौत हो गई।

इस्राईली सेना ने अपने बयान में केवल यह कहा है कि फ़िलिस्तीनियों ने प्रदर्शन किया, गाड़ियों के टायर जलाए और पथराव किया, बयान में इस बात का उल्लेख नहीं है कि इस्राईली सैनिकों ने प्रदर्शनकारियों पर फ़ायरिंग की।

गत मई महीने से इस इलाक़े में इस्राईल ज़ायोनी बस्ती बसाने की कोशिश में है और उसी समय से प्रदर्शन जारी हैं।

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