सेहत

कोरोना महामारी फ़िलहाल ख़त्म होने नहीं जा रही है, 3 महीने में तीसरी लहर दस्‍तक देगी : रिपोर्ट

कोरोना की महामारी फिलहाल अभी खत्‍म होने नहीं जा रही है। यह कम से कम 6 और महीने रहेगी। पूरा दारोमदार वैक्‍सीनेशन पर है। महामारी से तभी मुक्ति मिलेगी जब 90 से 95 फीसदी लोगों का वैक्‍सीनेशन हो जाएगा। अभी यह दूर की कौड़ी है। ब्‍लूमबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में एक्‍सपर्ट्स के हवाले से कोरोना महामारी के 6 महीने के आउटलुक पर यह बात कही है। उधर, बीएचयू के एक साइंटिस्‍ट ने दावा किया है कि अगले तीन महीने में कोरोना की तीसरी लहर देश में दस्‍तक दे देगी।

देश में जिस तरह से कोरोना के मामले दोबारा बढ़ने शुरू हुए हैं, उससे चिंता है। इस चिंता के बीच दुनिया के जाने-माने वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले छह महीने तक तो कोरोना की महामारी नहीं जाने वाली है। ताज्‍जुब नहीं कि जल्‍द ही कई और लहरें देखने को मिलें। इससे स्कूलों को बंद करना पड़े। कक्षाओं को कैंसिल किया जाए। वैक्‍सीन लगा चुके लोगों को संक्रमण की नए सिरे से चिंता करनी पड़े। अस्‍पतालों में दोबारा संक्रमितों की भीड़ जुटे। कर्मचारी फिर घरों से काम शुरू करें।

कोरोना के आउटलुक को लेकर एक्‍सपर्ट्स का अगले छह महीने का नजरिया बहुत अच्‍छा नहीं है। वे सभी एक बात को लेकर सहमत हैं। वह यह है कि महामारी खत्‍म होने से पहले सभी संक्रमित हो चुके होंगे या फिर उन्‍हें वैक्‍सीन लग गई होगी। जिनका भाग्‍य अच्‍छा नहीं होगा वे दोबारा वायरस के संपर्क में आ जाएंगे। कोरोना के नए वैरिएंट्स का बनना तब तक जारी रहेगा जब तक वह हम सभी के संपर्क में नहीं आ जाता है।

वैक्‍सीनेशन पर नजर
मिनसोटा यूनिवर्सिटी में सेंटर फॉर इंफेक्‍शियस डिजीज रिसर्च एंड पॉलिसी के डायरेक्‍टर और अमेरिकी राष्‍ट्रपति जो बाइडेन के एडवाइजर माइकल ऑस्‍टरहोम ने भी इस खतरे की घंटी बजाई है। उनका कहना है कि कोरोना के मामलों का घटना-बढ़ना जारी रहेगा। दुनियाभर में यह स्थिति बनी रहेगी।

दुनिया में करोड़ों-करोड़ लोगों को अब तक वैक्‍सीन नहीं मिली है। ऐसे में वायरस के खत्‍म होने की संभावना बहुत कम है। एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि तमाम देश आर्थिक गतिविधियां खोलने लगे हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में महामारी कहीं से फैल सकती है। वे क्‍लासरूम, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और कार्यस्‍थल कुछ भी हो सकते हैं। लिहाजा, अगले कुछ महीने बहुत अहम है। एक बड़ा खतरा वैक्‍सीन-रेजिज्‍टेंट (जो वैक्‍सीन से प्रभावित न हो) वैरिएंट विकसित होने का है।

डेनमार्क में रोसकिल्‍डे यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर लोन सिमोनसन कहती हैं कि कोरोना पहले ही सबसे गंभीर महामारी बन चुका है। इसके दो साल पूरे हो चुके हैं। दुनिया तीसरी लहर के मध्‍य में है। आगे क्‍या होगा कोई नहीं जानता है।

कैसे खत्‍म होगा कोरोना?
एक्‍सपर्ट्स मानते हैं कि एक बात बिल्‍कुल साफ है। वह यह है कि कोरोना की महामारी अगले छह महीनों में खत्‍म नहीं होगी। इस पर तभी अंकुश लगेगा जब 90 से 95 फीसदी आबादी का वैक्‍सीनेशन हो जाएगा। ब्लूमबर्ग के वैक्‍सीन ट्रैकर के अनुसार, दुनियाभर में कोरोना वैक्‍सीन की करीब 5.66 अरब डोज लग चुकी हैं। लेकिन, यूरोपीय यूनियन, उत्‍तरी अमेरिका और चीन जैसे कुछ क्षेत्रों की सफलता पर अन्‍य की विफलता पानी फेर देती है। अफ्रीका में ज्‍यादातर देशों में सिर्फ 5 फीसदी से भी कम लोगों का वैक्‍सीनेशन हो पाया है। भारत को भी अपनी आबादी के 26 फीसदी को वैक्‍सीन की दोनों डोज देने में कामयाबी मिली है।

ऑक्‍सफोर्ड यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर एरिका चार्टर्स कहती हैं कि महामारी अलग-अलग जगह अलग-अलग समय पर खत्‍म होगी। जैसा कि पहले भी हुआ है। सरकारों को फैसला लेना होगा कि वे किस हद तक बीमारी को झेल सकते हैं। यह अलग-अलग तरह की एप्रोच पर निर्भर करता है। डेनमार्क और सिंगापुर जैसे कुछ देशों ने केसेज पर काफी हद तक काबू पा लिया है। वहीं, अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देश भी हैं जहां कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच गतिविधियों को शुरू किया जा रहा है।

3 महीने में तीसरी लहर देगी दस्‍तक
बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) में जूलॉजी विभाग में प्रोफेसर ज्ञानेश्‍वर चौबे ने दावा किया है कि तीसरी लहर पिछली लहरों जितनी खतरनाक नहीं होगी। इसका खासतौर से उन पर ज्‍यादा असर नहीं होगा जिन्‍हें वैक्‍सीन लग चुकी है या जो कोरोना वायरस से संक्रमित होकर उबर चुके हैं। उनका कहना है कि कम से कम तीन महीने के बाद तीसरी लहर देश में दस्‍तक देगी। हालांकि, वैक्‍सीनेशन से लोगों को इस लहर से लड़ने में मदद मिलेगी।

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