धर्म

#नबी-ए-रीम मुहम्मद सअव ने फ़रमाया : जो महिला, औरत, लड़की अपने अभिभावक की मर्ज़ी के बिना निकाह करे उसका निकाह बातिल है

Shahnaj Begam
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#देखिए लड़की का भाग के किसी लड़के से निकाह करना बगैर वली बाप दादा या जिसके परवरिश में लड़की रह रही है बगैर उनकी मर्जी इजाज़त से तो ऐसा निकाह जाएज़ नही है बल्कि बातिल है (मतलब की लड़की का निकाह में वली बाप दादा या उनकी परवरिश करने वालो की रज़ामन्दी जरूरी व लाजिम है बगैर उनकी परमिसन के निकाह नही होगा)

#नबी ए करीम मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया: जो महिला औरत लड़की अपने अभिभावक वली की (मर्जी) अनुमति के बिना निकाह करे उसका निकाह बातिल है, आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने इसे तीन बार फरमाए,

(फिर फ़रमाया) अगर इस व्यक्ति ने ऐसी महिला लड़की से संभोग जिमाअ कर लिया तो संभोग जिमाअ के एवज उस लड़की महिला का महर है अगर वली
अभिभावक ऐतराज़ करे तो बादशाह उसका वली है जिसका कोई वली ना हो उसका बादशाह वली है
(हदीस अबु दाऊद हदीस नो 2084)

#नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया
की वली अभिभावक के बगैर निकाह नही है
(हदीस अबु दाऊद हदीस नो 2086)

मतलब की लड़की महिला जब भी निकाह करे तो पहले अपने घर वालो से उसकी इजाज़त ले और फिर निकाह करे
परिवार की मर्जी के बगैर निकाह को मना इसलिए किया गया की लड़की बच्ची अक्सर बगैर सोचे समझे कदम उठा लेते है क्यों की कमसिन उम्र में ऐसा अक्सर होता रहता है इसलिए अपने से बड़ो की इजाज़त से निकाह करने में ही भलाई है क्यों की बड़ो ने दुनिया देखि है वो अपनी बच्ची का भला बुरा अच्छे से जानते है वो उस लड़के की तहक़ीक़ करेंगे उसके बारे में जानने की कोशिश करेंगे की लड़का मर्द केसा है उसका चाल चलन केसा है किस क़ौम का है कहि वो शराबी कबाबी चोर चकका गलत आद्तो का तो आदि नही है इसलिए निकाह के लिए वली की इजाज़त अहम है और आप सभी तो जानते ही है अक्सर ऐसे निकाह फ़ैल ही हुए है जिसमे लड़का लड़की ने भाग के बगैर घर वालो की परमिशन के निकाह किया या फिर ऐसे लड़के लड़की को परिवार वाले नाक के लिए जान से भी मार देते है या बोलचाल बिल्कुल ही बन्द कर देते है इसलिए भलाई इसी में है की घर परिवार के लोगो की मर्जी को शामिल करके ही निकाह किया जाए।

#नॉट
वली अभिभावक की भी जिम्मेदारी है की वो लड़की की मर्जी के बगैर उसका निकाह जबरदस्ती ना करे बल्कि जहाँ तक मुमकिन हो लड़की की निक़ाह शादी उसकी अपनी पसंद हो वहां करें,

क्यों की
महफ़ूम् ए हदीस: प्यारे आक़ा मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का फरमान है की बगैर इजाज़त किसी भी लड़की या बेवा औरत का निकाह ना किया जाए
(हदीस बुख़ारी हदीस नो 5136)

(मतलब लड़की या बेवा औरत से पहले उसकी परमिशन इजाज़त ले की फ्ला फ्ला लड़के से क्या तेरा निकाह करा दे और लड़की या बेवा औरत उसकी इजाज़त
दे, तभी वली अभिभावक उसका निकाह करे बगैर लड़की या बेवा औरत की मर्जी के घर वाले उसका निकाह नही कर सकते है। और अगर बगैर लड़की की मर्जी के, बगैर घर वालो ने लड़की का निकाह कर दिया तो लड़की को इख्तयार है कि निकाह को तोड़ सकती है या रख सकती है
(महफ़ूम् ए हदीस अबु दाऊद हदीस नो 2096)

इसलिए वली अभिभावक की भी यह जिम्मेदारी है की लड़की औरत का निकाह उसकी मर्जी से करे,
अगर जहाँ लड़की निकाह करना चाहती है और लड़का बद अखलाक़ बदकिरदार है तो लड़की को प्यार मोहब्बत से समझाए की लड़का तुम्हारे लायक नही है इससे अच्छा और सच्चा लड़का तलाश करके तेरा निकाह कर देंगे।

लड़की औरत को भी अपने घर वालो की जाएज़ बात को मानना चाहिए इसी में उसकी भलाई है,
कहने का मतलब यह है की ऐसा निकाह किया जाए जिससें वली भी राजी हो और लड़की औरत भी राजी हो
जिससे उन दोनों की ज़िन्दगी अच्छे से गुजरे बगैर किसी फ़ितने फसाद लड़ाई झगड़े के और एक अच्छी बीवी और एक अच्छे शौहर की तरह,
#क़ुरान
“هُنَّ لِبَاسٌ لَّكُمْ وَأَنتُمْ لِبَاسٌ لَّهُنَّ.”(बक़र: 187)
“औरतें तुम्हारे लिये लिबास हैं और तुम उनके लिये लिबास हो।”)

क़ुरान पाक में मर्द को औरत का लिबास कहा गया है और औरत को मर्द का लिबास कहा गया है, लिबास का मकसद जहाँ एक तरफ सतर को छिपाना होता है, तो दूसरी तरफ उसका मकसद ज़ेब व जीनत (शोभा) का इज़हार भी होता है। क़ुरान ने इस जुमले (वाक्य) में औरत और मर्द दोनों की हैसियत तय कर दी, यानि दोनों एक दूसरे के लिए लिबास की तरह हैं। जो इनके लिए ज़ेब व ज़ीनत का सबब है जिससे उनके जिस्म की बाहरी असर से हिफाज़त होती है, जो उनके जिस्मानी ऐब पर पर्दा डालता है, जो उनके जिस्म का सबसे क़रीबी राज़दार होता है और जो उनके वजूद से सबसे करीब चीज़ होती है। क़ुरान मजीद में औरत और मर्द के लिए लिबास की उपमा के द्वारा न सिर्फ ये कि उनके रिश्ते को तय करती है बल्कि इस रिश्ते की आवश्यकताओं को भी एक दूसरे पर पूरी तरह स्पष्ट कर देती है।

#इसलिए अपनी ज़िन्दगी ऐसे ही गुजारो जैसे शरीयत ने हुक्म दिया है जिससे आपकी दुनिया भी स्वर जायेगी और आखरत भी
रब्ब ए करीम हमे शरीयत के मुताबिक़ ज़िन्दगी गुजारने की तौफ़ीक़ अता करे

आमीन या रब्बुल आलमीन

#मजीद मालूमात के लिए किसी आलिम ए दीन से सम्पर्क करे।।।

रोशन खान दायमखानी लाडनुँ✍

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