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पश्चिम बंगाल पर भाजपा की साज़िशें कम नहीं हो रही हैं

पश्चिम बंगाल के बीजेपी सांसद अर्जुन सिंह के घर पर एक बार फिर से बम से हमला किए जाने का दावा किया गया है।

इससे पहले 8 सितम्बर को भी उनके घर पर बम फेंके जाने का मामला सामने आया था। सोमवार को ही राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने उस घटना की जांच की थी और उसके अगले ही एक दिन एक बार फिर से बमकांड के दोहराये जाने का दावा किया गया है।

बीजेपी सांसद अर्जुन सिंह ने इस घटना के लिए टीएमसी पर निशाना साधते हुए कहा है कि उसके पाले गए गुंडों ने ही यह किया है।

तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को ख़ारिज किया है और उल्टे बीजेपी सांसद पर ही हमला बोला है। तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि बीजेपी सांसद ने ख़ुद अपने घर पर हमला कराया है ताकि राजनीतिक तौर पर चर्चा में बने रहें।

दूसरी ओर पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हुई हिंसा की घटनाओं की जांच के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा गठित समिति के सदस्यों को लेकर राज्य सरकार ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय में सवाल उठाए।

राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने न्यायमूर्ति विनीत सरन और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की पीठ को बताया कि समिति के प्रमुख राजीव जैन ने केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के तहत गुप्तचर ब्यूरो के निदेशक के रूप में काम किया है।

उन्होंने यह भी कहा कि जब माननीय प्रधानमंत्री गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब जैन 2005 से 2008 तक अहमदाबाद में सहायक ख़ुफिया ब्यूरो प्रमुख थे।

समिति के एक अन्य सदस्य के बारे में सिब्बल ने कहा कि आतिफ़ रशीद ने भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के दिल्ली राज्य प्रभारी के रूप में कार्य किया था और अभी भी वह भाजपा के समर्थन में ट्वीट करते हैं। सिब्बल ने कहा कि क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि इन लोगों को आंकड़े एकत्र करने के लिए नियुक्त किया गया है? क्या यह भाजपा की जांच समिति है?

उनकी दलील पर टिप्पणी करते हुए पीठ ने कहा कि अगर किसी का राजनीतिक अतीत रहा हो और अगर वह आधिकारिक पद पर आ जाता है तो क्या हम उसे उसी तथ्य के आधार पर पूर्वाग्रह से ग्रस्त मानेंगे?” सिब्बल ने इस दौरान अंतरिम आदेश का अनुरोध किया, लेकिन शीर्ष अदालत ने कहा कि वह मामले में 20 सितंबर को सुनवाई करेगी।

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