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पाकिस्तान के नेतृत्व में रूस, चीन, ईरान और मध्य एशिया के देशों के ख़ुफ़िया प्रमुखों ने बैठक में भाग लिया!

सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान ने शनिवार को अफ़ग़ानिस्तान के हालात को लेकर कई देशों के ख़ुफ़िया प्रमुखों की बैठक की मेज़बानी की है.

इस बैठक को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है लेकिन ख़ुफ़िया सूत्रों ने पाकिस्तानी मीडिया को इसकी पुष्टि की है.

डॉन अख़बार लिखता है कि पाकिस्तान के नेतृत्व में रूस, चीन, ईरान और कुछ मध्य एशिया के देशों के ख़ुफ़िया प्रमुखों ने इस बैठक में भाग लिया है.

अख़बार एक सूत्र के हवाले से लिखता है, “पाकिस्तान का इस बैठक की मेज़बानी करना इस क्षेत्र और अफ़ग़ानिस्तान में शांति को लेकर हमारी ईमानदारी को दिखाता है.”

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून लिखता है कि इस बैठक में पाकिस्तान, ईरान, चीन, उज़्बेकिस्तान, ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान के ख़ुफ़िया प्रमुखों ने भाग लिया जिसकी मेज़बानी आईएसआई चीफ़ लेफ़्टिनेंट जनरल फ़ैज़ हमीद कर रहे थे.

ट्रिब्यून लिखता है, “ऐसा माना जा रहा है कि यह बैठक अफ़ग़ानिस्तान को लेकर एक आम सहमति बनाने की पाकिस्तान की कूटनीतिक कोशिश है क्योंकि पाकिस्तान इस बात को लेकर बेहद उत्सुक है कि इस क्षेत्र के मुल्क अफ़ग़ानिस्तान को अकेला न छोड़ें और नई सच्चाई को स्वीकार करें.”

“क्षेत्रीय ख़ुफ़िया प्रमुखों की बैठक इन मायनों में भी ख़ास है क्योंकि इसमें अफ़ग़ानिस्तान में अस्थिरता की स्थिति के दौरान पड़ोसी देशों पर पड़ने वाले असर को देखा गया है. पाकिस्तान, रूस, चीन और मध्य एशियाई देशों को इस बात को लेकर चिंता है कि अगर अफ़ग़ानिस्तान में अस्थिरता हुई तो इससे पूरे क्षेत्र की सुरक्षा ख़तरे में पड़ सकती है.”

अफ़ग़ानिस्तान में शपथ ग्रहण समारोह पर बोला तालिबान

अफ़ग़ानिस्तान में सत्ता पर क़ब्ज़ा हासिल करने वाले तालिबान के प्रवक्ता ने कहा है कि मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह फ़िलहाल उनकी योजना का हिस्सा नहीं है.

तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने एक बयान जारी कर कहा कि कैबिनेट के शपथ ग्रहण समारोह की पहले योजना थी लेकिन फ़िलहाल इसे रोक दिया गया है.

अख़बार जंग के अनुसार तालिबान के प्रवक्ता ने कहा कि शपथ ग्रहण समारोह के लिए ज़रूरी था कि दूसरे देश के नेताओं को बुलाया जाए, उनके प्रोटोकॉल का पालन किया जाए और इन सबके लिए और वक़्त की ज़रूरत थी.

सुहैल शाहीन ने कहा कि दूसरी तरफ़ अफ़ग़ानिस्तान की जनता तक सेवाएं पहुँचाना भी बहुत ज़रूरी है, इसलिए तालिबान के शीर्ष नेतृत्व ने निर्णय लिया है कि फ़िलहाल मंत्रियों की घोषणा की जाए और वो किया जा चुका है और उनके शपथ ग्रहण समारोह को फ़िलहाल टाल दिया गया है.

पंजशीर में तालिबान की मदद का आरोप हास्यास्पद: पाकिस्तानी एनएसए

पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोईद यूसुफ़ ने कहा है कि पाकिस्तान पर अफ़ग़ानिस्तान के पंजशीर में तालिबान की मदद करने का आरोप हास्यास्पद है.

मोईद यूसुफ़ ने अमेरिकी न्यूज़ चैनल सीएनएन को दिए एक इंटरव्यू में यह बातें कहीं.

पाकिस्तान के तमाम अख़बारों ने मोईद यूसुफ़ के इस इंटरव्यू को प्रमुखता से छापा है.

अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार पंजशीर में ड्रोन हमलों के ज़रिए तालिबान की मदद करने के आरोप पर पाकिस्तानी सुरक्षा सलाहकार ने साफ़ कहा, “मैं सिर्फ़ इतना कह सकता हूं यह आरोप हास्यास्पद है. अफ़ग़ानिस्तान की पूर्व सरकार की तरफ़ से हमें बलि का बकरा बनाया गया था जिस पर बदक़िस्मती से अंतरराष्ट्रीय बिरादरी ने भी यक़ीन करना शुरू कर दिया है क्योंकि वो अपनी नाकामी पर बात नहीं करना चाहती है.”

इस मौक़े पर मोईद यूसुफ़ ने भारतीय मीडिया पर भी हमला करते हुए कहा कि ब्रिटेन के ऊपर एक अमेरिकी विमान की उड़ान को भारतीय मीडिया ने इस तरह से दिखाने की कोशिश की कि जैसे पाकिस्तान पंजशीर में कुछ कर रहा है.

सुरक्षा सलाहकार ने आरोप लगाया कि भारत ने ‘फेक न्यूज़ नेटवर्क’ बनाने में लाखों डॉलर ख़र्च किए हैं.

पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख की काबुल यात्रा पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए मोईद यूसुफ़ ने कहा, पाकिस्तान की सीमा अफ़ग़ानिस्तान से लगी हुई है और सीमा की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए नई सरकार से संपर्क करना ज़रूरी था.

आईएसआई प्रमुख ने काबुल का दौरा किया है और दोबारा भी करेंगे.

‘अमेरिका हमारी सलाह मानता तो इतनी लंबी जंग ना होती’

पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी के पूर्व प्रमुख जनरल एहसानुल हक़ (रिटायर्ड) ने कहा है कि अगर अमेरिका ने 9/11 हमलों के बाद पाकिस्तान और सऊदी अरब की सलाह मान ली होती तो उसे अफ़ग़ानिस्तान में इतनी लंबी जंग नहीं लड़नी पड़ती.

अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार जनरल हक़ ने कहा, “मैं सऊदी प्रिंस सऊद अल-फ़ैसल के साथ अमेरिका गया था. हमने अमेरिकी राष्ट्रपति, विदेश मंत्री और सीआईए प्रमुख से मुलाक़ात की थी. हमने उन्हें सलाह दी थी कि अफ़ग़ानिस्तान में कोई भी हस्तक्षेप संयुक्त राष्ट्र के ज़रिए होना चाहिए. अफ़ग़ानिस्तान मसले का कोई सैन्य समाधान नहीं है और संयुक्त राष्ट्र के ज़रिए समस्या का सियासी हल तलाशना ही बेहतरीन विकल्प है.”

आईएसआई के पूर्व प्रमुख ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र के ज़रिए सर्वसम्मति से एक समावेशी सरकार बनाने का सुझाव दिया गया था लेकिन अफ़सोस कि अमेरिका ने उन सुझावों को मानने से इनकार कर दिया और नतीजा यह हुआ कि अमेरिका को अगले 20 साल तक युद्ध में शामिल रहना पड़ा.

अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ को किए गए फ़ोन के बारे में जनरल हक़ ने कहा कि महज़ एक फ़ोन पर किसी देश को किसी फ़ैसले के लिए तैयार नहीं किया जा सकता है.

जनरल एहसानुल हक़ का कहना था, “हम पहले ही यह फ़ैसला कर चुके थे कि हम अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के साथ खड़े होंगे. हमारी प्रतिक्रिया सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के अनुरूप होगी.”

उन्होंने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में स्थिरता लाने के लिए तालिबान की नई सरकार को अमेरिकी मदद की ज़रूरत है. उन्होंने अमेरिकी प्रशासन से अपील की कि अफ़ग़ानिस्तान की जनता की बेहतरी के लिए जो बाइडन की सरकार तालिबान की नई सरकार को मंज़ूर करे.

अफ़ग़ानिस्तान में स्थायी शांति के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद की ज़रूरत: जनरल बाजवा

पाकिस्तानी सेना के प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में शांति बनाए रखने के लिए यह ज़रूरी है कि अंतरराष्ट्रीय बिरादरी उसकी मदद करे.

अख़बार नवा-ए-वक़्त के अनुसार शुक्रवार को पाकिस्तानी सेना के कोर कमांडरों को संबोधित करते हुए जनरल बाजवा ने कहा, “अफ़ग़ानिस्तान को नए सिरे से बनाने, वहां के लोगों की मदद और स्थायी शांति और स्थिरता के लिए अंतरराष्ट्रीय बिरादरी की तरफ़ से मदद की ज़रूरत है.”

जनरल बाजवा ने कहा कि पूरे क्षेत्र में शांति और पूरे इलाक़े की ख़ुशहाली के लिए तमाम क्षेत्रीय स्टेकहोल्डरों के बीच सहयोग बहुत ज़रूरी है.
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इक़बाल अहमद
बीबीसी संवाददाता

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