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उत्तर प्रदेश के एक सत्ता पोषित दारोग़ा की कहानी : वीडियो

Surya Pratap Singh IAS Rtd.
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ये मुंशी प्रेमचंद के नमक के दारोगा की कहानी नहीं,ये उत्तर प्रदेश के एक सत्ता पोषित उस दारोगा की कहानी है जिसकी इतनी दहशत है कि उसे देख भगदड़ मच जाती है,लोग जमीन पर गिरते हैं और खलास हो जाते हैं।

उसे स्वप्न आता है कि होटल में 3 व्यवसाई ठहरे हैं,वह पुलिस अमले के साथ जाता हैं और उसकी दहशत के आगे एक व्यवसाई जमीन पर गिरकर मर जाता है।

ये वो दारोगा है जो बंदूकची है,बेलगाम है, बरकंदाज है। सत्ता का दुलारा है,बड़े काम की चीज है।
ये दारोगा एक आज की यूपी पुलिस के अंदाज का प्रतीक है।

व्यवसाई की विधवा पीड़िता को जिले के मालिक मुख्तार DM,SSP धमकाते हैं कि FIR दर्ज मत करो, कार्ट के चक्कर लगाने पड़ेंगे। सत्ता के दबाव में वे दारोगा को बचाते हैं।

विधवा प्रदेश के अलमदबरदार यानी राजा से मिलती है। राजा खजाना खोल देता है, बदले में दारोगा की हिफाजत मांगता है।

उस दारोगा की जो राजा के बड़े काम का है, चुनाव में काम आएगा,उसने उसके इधर उधर के काम किए हैं।

ये दारोगा राजा का दुलारा है,आंख का तारा है,नाक का बाल है।
विधवा के लिए इधर कुंआ उधर खाई है, मरती क्या न करती। नौकरी व मुआवजे का प्रस्ताव स्वीकार कर लेती है।

ये दारोगा ही नहीं इस कहानी के अन्य पात्र भी काल्पनिक हो सकते हैं।

यूपी में तमाम फर्जी एनकाउंटर की बात मानवाधिकार आयोग ने स्वीकार की है।

प्रदेश के IAS,IPS अधिकारी क्यों सत्ता की गुलामी करते हैं,समझ से परे है।

दर्ज FIR पर SIT बैठी है, पूरी सत्ता लगी है,काम की चीज, दारोगा जी को बचाने में।

ठाकुर लैंड में ये है,एक ठाकुर दारोगा की कहानी।

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