साहित्य

उस दिन से मेरा गधा बहुत खुश है औऱ मेरी हर बात मानता है…!!!

Alka Singh
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एक धोबी था। उसके पास एक छोटा सा गधा था।

धोबी को अपने गधे से बहुत प्यार था। गधा भी अपने मालिक से बहुत प्रेम करता औऱ दिन रात उसका बहुत सारा काम करता था ।
एक दिन यूं ही रास्ते में चलते हुए धोबी को एक पत्थर पड़ा दिखा। पत्थर बहुत चमक रहा था।

धोबी ने पत्थर उठा कर देखा, उसे वो पत्थर चमकीला और बहुत सुंदर लगा। उसने पत्थर को एक मज़बूत धागे में बांधकर गधे के गले में लटका दिया।
अब धोबी खुश, गधा भी खुश। दोनों मस्त भाव में चले जा रहे थे तभी अचानक एक आदमी की निगाह गधे के गले में लटके उस पत्थर पर पड़ी।
आदमी ने बहुत हैरान होकर देखा कि ये तो हीरा है। उसे बड़ा आश्चर्य हुआ लेकिन वो ये तुरंत समझ गया कि धोबी को ये नहीं पता कि गधे के गले में हीरा है।
आदमी बड़े शातिर अंदाज़ में धोबी के पास पहुंचा और उसने पूछा, अरे धोबी भाई ये गधे के गले में पत्थर क्यों लटका रखा है….बेकार में गधे का बोझ बढ़ा रहे हो ?

धोबी ने कहा, “हुजूर, मुझे रास्ते में मिला था, मैंने अपने प्यारे गधे के गले में उसे पहना दिया और जबसे मैंने उसके गले में ये पत्थर पहनाया है, उस दिन से मेरा गधा बहुत खुश है औऱ मेरी हर बात मानता है ।”

आदमी समझ रहा था कि धोबी पत्थर की कीमत से एकदम अनजान है, इसलिए उसने धोबी को लालच दिया और कहा कि धोबी भाई ये पत्थर तुम मुझे दे दो, मैं तुम्हें सौ रुपए दूंगा।

धोबी सोच में पड़ गया, फिर सोचता हुआ उसने कहा कि नहीं हुजूर सौ रुपए का मैं क्या करूंगा, इस पत्थर को पहनकर मेरा गधा खुश है और गधा खुश तो मैं भी खुश हूं।

आदमी धोबी के साथ-साथ चलता रहा, बातें करता रहा और मोल भाव बढ़ाते हुए पांच सौ रुपए तक पहुंच गया। लेकिन धोबी नहीं माना।
आदमी भी पक्का शातिर था, लगा रहा पीछे। आदमी ने अपनी बातचीत में धोबी से एक बार भी जाहिर नहीं होने दिया कि पत्थर हीरा है।
धोबी के साथ पीछे पीछे जाते हुए वो आदमी बीच में एक जगह रुक गया औऱ दूर से ही देखने लगा कि आख़िर ये धोबी जा कहाँ रहा है ??
कुछ देर रुककर वो फिर धोबी के पीछे लपका, लेकिन ये क्या? वहां पहुंच कर उसने देखा कि गधे के गले से पत्थर गायब है।
आदमी धोबी पर खूब जोर से चिल्लाया, अरे बेवकूफ़…तेरे गधे के गले से पत्थर कहां गया?

धोबी ने बहुत विनम्र होकर जवाब दिया, हुजूर जब आप पीछे रुक गए थे तभी एक और आदमी आया और उसने मुझे पचास हजार रुपए दिए और वो पत्थर लेकर चला गया।

आदमी चिल्लाया, “मूर्ख आदमी ! तुझे पता नहीं कि तू कितना बड़ा अभागा औऱ बेवकूफ़ है…वो जिसे तू पत्थर समझ रहा था वो दरअसल एक बेशकीमती हीरा था और कमसे कम दस लाख का था जिसे तूने मात्र पचास हजार में गंवा दिया।”

धोबी मुस्कुराया और उसने कहा कि हुजूर मुझे तो नहीं पता था कि वो एक कीमती हीरा है। मैंने तो उसे बस एक मामूली पत्थर समझकर पचास हजार रुपए में बेच दिया, लेकिन आपको तो अच्छी तरह ये पता था कि वो दस लाख का हीरा है, फिर आप ये सौ रुपए और पांच सौ रुपए का मोलभाव पिछले सात घंटों से क्यों कर रहे थे? सौ और पांच सौ की जगह अगर आपने पांच या दस हजार रुपए भी इसकी कीमत लगाई होती तो हो सकता था कि मैं आपको वो हीरा ख़ुशी ख़ुशी दे देता ।

और ख़ूब जोर से हँसते हुए उसने कहा कि अब आप तय कीजिए कि अभागा कौन है, मैं या आप ?

Alka Singh
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अख़बार बेचने वाला 10 वर्षीय बालक एक मकान का गेट बजा रहा है।
मालकिन बाहर आकर पूछी…क्या है ?

बालक – आंटी जी, क्या मैं आपका गार्डेन साफ कर दूं ?

मालकिन – नहीं, हमें नहीं करवाना है, और आज अखबार नही लाया ।

बालक – हाथ जोड़ते हुए दयनीय स्वर में…”प्लीज आंटी जी करा लीजिये न, अच्छे से साफ करूंगा, आज अखबार नही छपा, कल छुट्टी थी।

मालकिन – द्रवित होते हुए ”अच्छा ठीक है, कितने पैसा लेगा ?

बालक – पैसा नहीं आंटी जी, खाना दे देना।”

मालकिन- ओह !! आ जाओ अच्छे से काम करना ।
(लगता है बेचारा भूखा है पहले खाना दे देती हूँ….मालकिन बुदबुदायी।)

मालकिन- ऐ लड़के…पहले खाना खा ले, फिर काम करना ।

बालक -नहीं आंटी जी, पहले काम कर लूँ फिर आप खाना दे देना।

मालकिन – ठीक है, कहकर अपने काम में लग गयी।

बालक – एक घंटे बाद “आंटी जी देख लीजिए, सफाई अच्छे से हुई कि नहीं।

मालकिन -अरे वाह! तूने तो बहुत बढ़िया सफाई की है, गमले भी करीने से जमा दिए। यहां बैठ, मैं खाना लाती हूँ।

जैसे ही मालकिन ने उसे खाना दिया, बालक जेब से पन्नी निकाल कर उसमें खाना रखने लगा।

मालकिन – भूखे काम किया है, अब खाना तो यहीं बैठकर खा ले। जरूरत होगी तो और दे दूंगी।

बालक – नहीं आंटी, मेरी बीमार माँ घर पर है,सरकारी अस्पताल से दवा तो मिल गयी है, पर डाॅ साहब ने कहा है दवा खाली पेट नहीं खाना है।

मालकिन की पलके गीली हो गई..और अपने हाथों से मासूम को उसकी दूसरी माँ बनकर खाना खिलाया फिर उसकी माँ के लिए रोटियां बनाई और साथ उसके घर जाकर उसकी माँ को रोटियां दे आयी ।

और आते आते कह कर आयी “बहन आप बहुत अमीर हो जो दौलत आपने अपने बेटे को दी है वो हम अपने बच्चों को नहीं दे पाते हैं” ।
माँ बेटे की तरफ डबडबाई आंखों से देखे जा रही थी…बेटा बीमार मां से लिपट गया…….!!

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